कल कार्तिक पूर्णिमा पर ज़रूर करें दीपदान

जानें कार्तिक पूर्णिमा व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त व संपूर्ण पूजा-विधि। साथ ही पढ़ें देव दीपावली पर दीपदान से जुड़ी पौराणिक कथा। 


हिंदी धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध कर उसे मोक्ष दिलाया था, इसलिए कई राज्यों में इसे ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। ये पर्व हर वर्ष दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन आता है इसलिए ये देव दिवाली के नाम से भी विख्यात है। यूँ तो ये पर्व देशभर में मनाया जाता है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा उत्साह यूपी के बनारस और काशी में देखने को मिलता है। इस दिन गंगा के तटों पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर मां गंगा की पूजा व आरती की जाती है। इस अदभुद नज़ारे को देखने दुनिया भर में लाखों लोग गंगा नदी के घाटों पर पहुँचते हैं और दीए जलाते व दीपदान करते हैं। 


कार्तिक पूर्णिमा व्रत मुहूर्त 


कल मंगलवार यानि 12 नवंबर 2019 को कार्तिक पूर्णिमा देशभर में मनाई जाएगी। ये शुभ तिथि हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को आती है, इसलिए भी इसे कार्तिक पूर्णिमा या देव दीपावली कहा जाता है। ज्योतिष अनुसार अगर इस दिन कृतिका नक्षत्र होती है तो इसे ‘महाकार्तिकी’ कहा जाता है। इसके साथ ही भरणी नक्षत्र होने पर भी इस पूर्णिमा से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। चूँकि इस वर्ष इस दिन चंद्र भरणी नक्षत्र में होंगे इसलिए भी इस वर्ष इस पर्व का महत्व बढ़ जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा व्रत मुहूर्त
नवंबर 11, 2019 को18:04:00 से पूर्णिमा आरम्भ
नवंबर 12, 2019 को19:06:40 पर पूर्णिमा समाप्त

नोट: ऊपर दिया गया मुहूर्त नई दिल्ली के लिए ही प्रभावी होगा। अपने शहर का मुहूर्त जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।

शास्त्रों की माने तो यही वो शुभ तिथि थी जब भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। इसलिए भी इस दिन गंगा स्नान करने और दीप-दान करने का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि जो भी मनुष्य इस दिन दीप दान कर गंगा स्नान करता है तो उसे इस जन्म में दस यज्ञों के समान फलों की प्राप्त होता है। इस पर्व की महत्ता को देखते हुए ही इसे त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) ने महापुनीत पर्व बताया है। 

कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व


साल भर आने वाली सभी पूर्णिमा तिथियों में से कार्तिक मास में आने वाली पूर्णिमा सबसे पवित्र मानी जाती है। इसलिए इस दिन किये जाने वाले सभी दान-पुण्य का फल शुभ साबित होता है। कहा जाता है कि यदि इस दिन संध्या-काल में त्रिपुरोत्सव करके दीपदान किया जाए तो व्यक्ति के सभी पुनर्जन्म के कष्ट समाप्त हो जाते हैं। 

कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी पौराणिक कथा


इस पावन दिन को लेकर कई प्रकार की पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। उन्ही में से एक कहानी के अनुसार प्राचीन काल में त्रिपुर नाम के एक राक्षस ने अपनी शक्तियाँ बढ़ाने के लिए करीब एक लाख वर्ष तक प्रयागराज में घोर तप किया। उसकी उसी तपस्या के दुष्प्रभाव ने सभी मनुष्य और देवता भयभीत हो गए थे। ऐसे में सभी देवताओं ने उसके तप को भंग करने के लिए एक योजना के अनुसार उसके समक्ष सुन्दर अप्सराएँ भेजने का निर्णय लिया। लेकिन बावजूद इसके देवताओं की ये योजना असफल रही जिसके परिणामस्वरूप त्रिपुर राक्षस का तप सफल हुआ और उसके तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी स्वयं उन्हें दर्शन देते हुए उसे एक वरदान मांगने को कहा।

असुर त्रिपुर ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगते हुए कहा कि, ‘मैं न देवताओं के हाथों मरूं, न मनुष्यों के हाथों से’। इसके बाद तथास्तु कहते हुए ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दे दिया। वरदान पाकर मानो राक्षस त्रिपुर का अहंकार बढ़ गया। उसने देव लोक में अपने अत्याचारों से सभी देवी-देवताओं को परेशान कर दिया। देव लोक पर विजय प्राप्त कर वो कैलाश पर्वत पर भी चढ़ाई करने लगा। जिसके बाद भगवान शंकर ने त्रिपुर को युद्ध के लिए ललकारा। अहंकार में अँधा हुआ त्रिपुर महादेव से भी भीड़ गया। दोनों के बीच कई दिनों तक भयंकर युद्ध भी हुआ। जिसके बाद शिव जी ने ब्रह्मा जी और विष्णु जी की मदद से असुर त्रिपुर का संहार किया। माना जाता है कि जिस दिन असुर त्रिपुर को त्रिदेवो ने मोक्ष दिया उस दिन कार्तिक पूर्णिमा ही थी। जिसके बाद समस्त पृथ्वी-लोक व स्वर्ग-लोक में दीप जलाए गया। 


कार्तिक पूर्णिमा व्रत और धार्मिक कर्मकांड


मान्यता अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दीपदान, व अन्य दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। चलिए जानते हैं इस दिन किये जाने वाले सभी धार्मिक कर्मकांड:-

  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठे। 
  • इसके बाद सूर्य देव के नग्न आँखों से दर्शन करते हुए उसके समक्ष सच्ची भावना से व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करें।
  • इस दिन मुख्य रूप से चंद्रोदय पर छः कृतिकाओं- शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसुईया और क्षमा का पूजन करना न भूलें। 
  • देव दीपावली के दिन मवेशियों, रथ, घी, अन्न आदि का दान करना शुभ होता है। माना जाता है कि ऐसा करने से हर प्रकार की आर्थिक तंगी दूर होती है। 
  • जबकि कार्तिक पूर्णिमा से प्रारंभ होकर प्रत्येक पूर्णिमा पर व्रत रखने और रात्रि में जागरण करने से घर में सुख-समृद्धि आती हैं। 
  • इस दिन व्रत रखने वाले लोगों को किसी पवित्र नदी, कुण्ड व सरोवर के किनारे हवन करके ज़रूरतमंदों को भोजन करना चाहिए। 
  • इस दिन पवित्र यमुना में स्नान करके राधा-कृष्ण का पूजन और दीपदान करने का भी विधान है। ऐसा करने से जीवन में खुशहाली आती है। 
  • मान्यता है कि इस दिन व्रत पारण के दौरान यदि बैल यानी नंदी का दान किया जाएं तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। 

हम आशा करते हैं कि आपको हमारा ये लेख पसंद आया होगा। हमारी ओर से आप सभी को कार्तिक पूर्णिमा व देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !
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साप्ताहिक राशिफल (11 से 17 नवंबर, 2019)

इस सप्ताह इन 5 राशियों के जीवन में होगा बड़ा बदलाव! पढ़ें 11 से 17 नवंबर 2019 का साप्ताहिक राशिफल और जानें क्या है इस हफ्ते आपके सितारों की चाल।



यह साप्ताहिक फलादेश वैदिक ज्योतिष की गणना पर आधारित है। इसलिए इसमें आपकी राशि के अनुसार दी गई भविष्यवाणी बेहद सटीक है। साथ ही इस राशिफल में आपके लिए और भी अतिरिक्त जानकारी दी गई है। इस फलादेश में पंचांग की गणना के अनुसार ग्रहों के गोचर तथा इस सप्ताह पड़ने वाले त्यौहार और व्रतों के बारे में जानकारी बतायी गई है। अगर आप शेयर बाज़ार से जुड़ी भविष्यवाणी जानने के इच्छुक हैं तो आपके लिए इसमें दी गई शेयर बाज़ार से जुड़ी भविष्यवाणी कारगर साबित होगी। साथ ही इसमें आपको भारतीय प्रसिद्ध हस्तियों के इस सप्ताह मनाए जाने वाले जन्मदिन के बारे में बताया गया है। आइए अब डालते हैं साप्ताहिक राशिफल पर एक नज़र... 

इस सप्ताह का हिन्दू पंचांग एवं ज्योतिषीय तथ्य


सप्ताह के पहले दिन यानि 11 नवंबर को कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी है। इस तिथि को मणिकर्णिका स्नान है। इसके बाद 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा व्रत है। इस दिन सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी की जयंती भी मनायी जाएगी। इसके बाद इस सप्ताह की 14 तारीख़ भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन चाचा नेहरु की याद में बाल दिवस मनाया जाएगा। वहीं 16 नवंबर को संकष्टी चतुर्थी है। सप्ताह के अंतिम दिन वृश्चिक संक्रांति हैं। यानि इस दिन सूर्य ग्रह वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। 

इस सप्ताह होने वाले गोचर


इस सप्ताह द्रव्य पदार्थों का कारक चंद्र ग्रह मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क राशियों में गोचर करेगा। इसके बाद आत्मा का कारक ग्रह सूर्य 17 नवंबर 2019 को अपनी नीच राशि तुला से वृश्चिक राशि में संचरण करेगा। यानि इस सप्ताह आपके ऊपर सूर्य और चंद्र ग्रह का प्रभाव देखने को मिलेगा। वृश्चिक राशि सूर्य की मित्र राशि है, अर्थात यहाँ सूर्य का प्रभाव अच्छा होगा। लेकिन अन्य राशियों के लिए यह गोचर समस्याएँ भी पैदा कर सकता है। 

इस सप्ताह शेयर बाज़ार की चाल


इस सप्ताह शेयर बाज़ार का रुख़ सकारात्मक दिशा में बढ़ेगा। हालाँकि सप्ताह के शुरुआत में शेयर बाज़ार सूचकांक में पेट्रोलियम, शिपिंग कॉर्पोरेशन, डायमंड, हैवी इंजीनियरिंग एवं सीमेंट इंडस्ट्री तथा सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण उछाल देखा जा सकता है। हालाँकि 12 और 13 तारीख को मंदड़ियों के प्रभाव के कारण शेयर बाज़ार में मंदी का अनुमान है। 


जन्मदिन विशेष


इस सप्ताह 13 नवंबर को बॉलीवुड एक्ट्रेस जूही चावला का जन्मदिन है। वहीं 16 नवंबर को फिल्म अभिनेता आदित्य रॉय कपूर का बर्थडे है। जबकि 17 तारीख को भारतीय क्रिकेटर युसुफ़ पठान का जन्मदिन है। इन सभी को एस्ट्रोसेज की ओर से जन्मदिन की विशेष शुभकामनाएँ। 

यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


सप्ताह के शुरुआत में जिस वक़्त चंद्र आपकी राशि में होंगे, उस वक़्त आपके तेज और पराक्रम में अचानक से वृद्धि होगी। इस वृद्धि के तेज से इस समय आपका चेहरा भी चमकेगा, जिससे कार्यक्षेत्र पर...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम जीवन की बात करें तो प्रेम में पड़े जातकों के लिए ये सप्ताह कुछ परेशानियाँ लेकर आ सकता है, लेकिन इनसे दुखी होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आप दोनों के प्रबल प्रेम...आगे पढ़ें

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वृषभ


इस सप्ताह सूर्य देव भी आपकी राशि के सप्तम भाव में गोचर करेंगे। जिस समय चंद्र का प्रवेश आपके द्वादश भाव में होगा उस वक़्त आपको कुछ सुदूर मनोरंजक यात्राएँ करनी पड़ सकती है। इन यात्राओं से आपको मानसिक सुकून...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम जीवन की बात करें तो आपके प्रेम संबंध इस समय पहले से बेहतर रहेंगे और आपका ये प्यार भरा रिश्ता सामान्य गति से चलता रहेगा, लेकिन सूर्य का गोचर होने से आप दोनों में...आगे पढ़ें

मिथुन


आपको अपने आमदनी में अच्छा लाभ मिलेगा। इस दौरान आपको आर्थिक लाभ तो होगा ही लेकिन वहीं दूसरी ओर आपके खर्चे भी उसी अनुपात में रहेंगे। जिससे आप धन संचय ...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों के लिए यह सप्ताह अच्छा साबित होने वाला है, क्योंकि इस समय आप दोनों एक दूसरे के प्रति भरपूर आकर्षित होंगे और समय-समय पर कही बाहर घूमने जाने का...आगे पढ़ें

कर्क


आपको अपने भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और इस समय आपको जीवन में उन्नति मिलने की भी संभावना है। अगर कार्यक्षेत्र की बात करें तो उसके लिए समय अच्छा है। आपको अपनी मेहनत के मुताबिक...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों के लिए सप्ताह बेहतरीन रहने वाला है, क्योंकि संभावना है कि इस राशि के कुछ जातक इस समय प्रियतम संग शादी के बंधन में बंधने का निर्णय लेकर प्रेमी का...आगे पढ़ें

सिंह


संभावना है कि अचानक से आपके बनते काम बिगड़ जाएं, लेकिन इसके साथ ही किसी व्यक्ति की मदद से आपको धन लाभ होने की भी संभावना है। आपके पिताजी को स्वास्थ्य संबंधी...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों की बात करें, तो उसके लिए यह सप्ताह थोड़ा नाज़ुक भरा हो सकता है। इस दौरान संभव है कि आपका प्रियतम आपकी किसी छोटी-मोटी आदत को लेकर आप से नाराज़ हो...आगे पढ़ें

कन्या


सप्ताह की शुरुआत में चंद्रमा का गोचर अष्टम भाव में होने से आपको अपने ससुराल पक्ष से मिलने का मौका मिलेगा जिस दौरान आपको लाभ भी हो सकता है। हालाँकि आपको धन हानि की भी संभावना दिखाई दे रही है ...आगे पढ़ें

प्रेमफल

यह सप्ताह प्रेम संबंधित मामलों के लिए पहले से अधिक अनुकूल रहने की पूरी उम्मीद दर्शा रहा है। हालाँकि सूर्य देव की दृष्टि आपके प्रेम संबंध में कुछ दिक्कतें पैदा ज़रूर करेगी, लेकिन...आगे पढ़ें


तुला


सप्ताह की शुरुआत में चंद्रमा का गोचर सप्तम भाव में होगा। उस वक़्त आपको अपने ननिहाल पक्ष की ओर से किसी तरह का लाभ मिल सकता है। जो भी जातक साझेदारी में व्यापार करते हैं, उन्हें इस वक़्त अधिक...आगे पढ़ें

प्रेमफल

यह सप्ताह प्रेम में पड़े जातकों के लिए कुछ प्रतिकूल परिणाम देने वाला है, इसलिए आपको विशेषतौर से प्रियतम संग विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत होगी। संभावना है कि किसी अन्य व्यक्ति के चलते आप दोनों के बीच ...आगे पढ़ें

वृश्चिक


शुरुआत में चंद्रमा का गोचर षष्ठम भाव में होने से संतान को किसी बात को लेकर समस्या होगी, इसलिए उनका ख़्याल रखें। इस समय छात्रों का भी मन पढ़ाई में नहीं लगेगा, इसलिए आपको...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों के लिए ये सप्ताह पहले की तरह सामान्य रहने वाला है। क्योंकि इस समय आप प्रियतम के साथ आप हर मौके का फायदा उठाते हुए अपने प्रेमी संग समय बिताने का प्रयास करते दिखाई...आगे पढ़ें

धनु


दांपत्य जातकों को संतान पक्ष से ख़ुशी मिलेगी क्योंकि उनकी संतान कार्यक्षेत्र में तरक्की कर सकेगी जिससे उन्हें लाभ मिलेगा। सेहत के नज़रिए से देखें तो ये सप्ताह अच्छा है क्योंकि इस दौरान ...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों के लिए यह पूरा ही सप्ताह ज्यादा अनुकूल नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे में आपको इस बात का विशेष ध्यान रखने की ज़रूरत होगी कि इस समय कोई भी बड़ा निर्णय न लें अन्यथा...आगे पढ़ें

मकर


इस दौरान परिवार के लोगों में आपस में प्रेम बढ़ेगा और माता जी की सेहत में भी सुधार देखने को मिलेगा। आर्थिक लाभ के भी योग बनेंगे और आपके निजी प्रयासों से धन लाभ की संभावना बनेगी। कार्य क्षेत्र में ...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों की बात करें तो ये सप्ताह आपके लिए अनुकूल रहने वाला है। क्योंकि इस सप्ताह आप अपने प्रियतम संग शादी के बंधन में बांधने का फैसला लेते हुए उन्हें अपने परिजनों से मिलवा सकते हैं, लेकिन ...आगे पढ़ें

कुंभ


आपके भाई बहनों के विदेश यात्रा पर जाने के योग बनेंगे। साथ ही आपके साहस और पराक्रम में भी वृद्धि देखी जाएगी और इसके चलते ही आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए हर संभव प्रयासों में तेजी लाएंगे...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों की बात करें तो इस सप्ताह प्रेमी संग आपका जीवन अच्छा रहने की उम्मीद है। सम्भावना है कि आप अपने प्रियतम संग किसी यात्रा पर जाने का प्लान करें, जिस दौरान आप...आगे पढ़ें

मीन


इस दौरान आप बेहद साधारण जीवन जीते दिखाई देंगे और सात्विक भोजन ही आपके मन को सात्विक बनाएगा। कार्य क्षेत्र में लाभ मिलेगा और आर्थिक क्षेत्र में धन प्राप्ति के भी योग बनते दिखाई देंगे। वहीं इसके...आगे पढ़ें

प्रेमफल

प्रेम संबंधित मामलों की बात करें तो आपके लिए ये सप्ताह काफी अनुकूल रहने वाला है। इस दौरान आप अपने प्रियतम को विवाह के लिए मनाने का प्रयास कर सकते हैं या संभावना है कि आप...आगे पढ़ें
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मंगल का तुला राशि में गोचर, जानें प्रभाव

मंगल के राशि परिवर्तन से इन राशि के लोगों को रहना होगा सावधान! पढ़ें मंगल का तुला राशि में गोचर का ज्योतिषीय प्रभाव।



10 नवंबर 2019 को मंगल का गोचर तुला राशि में गोचर हो चुका है। मंगल के इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों में पर सकारात्मक और नकारात्मक रूप से पड़ेगा। इन प्रभावों को जानने से पहले हमें मंगल ग्रह के संबंधित आवश्यक बातें जाननी चाहिए। 

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह एक क्रूर ग्रह है। यह ऊर्जा, सेना, खेलकूद, साहस, क्रोध, शक्ति, शौर्य, ज़मीन, लड़ाई-झगड़े आदि का कारक है। राशियों में मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का अधिपति है। जहाँ मकर राशि में यह उच्च का तो कर्क राशि में यह नीच अवस्था में होता है। नक्षत्रों में मंगल ग्रह को मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा का स्वामित्व प्राप्त है। 

ज्योतिष में ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत हो तो वह जातक साहसी और ऊर्जावान होगा। ऐसे जातकों को युद्ध में विजय प्राप्त होती है। मंगल ग्रह के शुभ प्रभाव से जातकों को खेलकूद में सफलता मिलती है। दूसरी ओर, इसके विपरीत यदि जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति ठीक न हो तो ऐसे जातकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अशुभ मंगल से जीवन में लड़ाई-झगड़े, जमीन विवाद तथा अन्य तरह की परेशानियाँ आती हैं। 

वहीं मंगल ग्रह के कारण ही कुंडली में मंगल दोष पैदा होता है। जब किसी जातक की कुंडली में मगल ग्रह लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में हो तो यह स्थिति कुंडली में मंगल दोष बनाती है। इसके प्रभाव से जातक को विवाह से संबंधित परेशानियों को झेलना पड़ता है। ऐसे जातकों की विवाह में भी देरी होती है।

मंगल दोष के बुरे प्रभावों से बचने तथा मंगल की स्थिति को मजबूत करने के लिए जातकों को मंगल ग्रह की शांति के उपाय करने की आवश्यकता होती है। ऐसा करने से आप अपनी कुंडली में मंगल को बली कर सकते हैं तथा इसके शुभ फलों को प्राप्त कर सकते हैं।

मंगल ग्रह को मजबूत करने के उपाय


  • मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करें।
  • मंगलवार को लाल वस्त्र धारण करें।
  • मंगल ग्रह की मजबूती के लिए अनंत मूल पहनें।
  • मूंगा रत्न को पहनने से मंगल ग्रह मजबूत होता है।
  • तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
  • विधि अनुसार मंगल यंत्र को स्थापित कर उसकी पूजा करें।
  • मंगल ग्रह के बीच मंत्र का जाप करें - ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

गोचर की समयावधि


10 नवंबर 2019, रविवार यानि आज दोपहर 13:31 बजे मंगल का गोचर तुला राशि में हो गया है मंगल 25 दिसंबर 2019, बुधवार की रात्रि 20:26 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा।

पढ़ें सभी 12 राशियों पर मंगल के गोचर का ज्योतिषीय प्रभाव….

मेष


मंगल आपकी राशि से सप्तम भाव में प्रवेश करेगा। ज्योतिष में कुंडली के सातवें भाव से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी एवं जीवन के अन्य क्षेत्रों में बनने वाले साझेदार का विचार किया जाता है। आपके सातवें भाव में मंगल का गोचर वैवाहिक जीवन में…. आगे पढ़ें


वृषभ


मंगल आपकी राशि से षष्ठम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में इस भाव को शत्रु भाव कहा जाता है। इस भाव से विरोधियों, रोग, पीड़ा, नौकरी, कम्पीटीशन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, शादी-विवाह में अलगाव एवं क़ानूनी विवादों…. आगे पढ़ें

मिथुन


मंगल आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर करेगा। कुंडली में इस भाव को संतान भाव के नाम से भी जाना जाता है। इस भाव से रोमांस, संतान, रचनात्मकता, बौद्धिक क्षमता, शिक्षा एवं नए अवसरों को देखा जाता है। इस गोचर का फल आपके लिए बहुत ज्यादा…. आगे पढ़ें

कर्क


मंगल आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर करेगा। कुंडली के चौथे भाव को सुख भाव कहा जाता है। इस भाव से माता, जीवन में मिलने वाले सभी प्रकार के सुख, चल-अचल संपत्ति, लोकप्रियता एवं भावनाओं को देखा जाता है। गोचर के दौरान आपको अपने…. आगे पढ़ें

सिंह


मंगल आपकी राशि से तृतीय भाव में जाएगा। कुंडली में तीसरे घर को सहज भाव कहा जाता है। इस भाव से व्यक्ति के साहस, इच्छा शक्ति, छोटे भाई-बहनों, जिज्ञासा, जुनून, ऊर्जा, जोश और उत्साह को देखा जाता है। इस अवधि में आप खुद को…. आगे पढ़ें

कन्या


मंगल आपकी राशि से द्वितीय भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में दूसरे भाव से व्यक्ति के कुटुंब, उसकी वाणी, प्रारंभिक शिक्षा एवं धन आदि का विचार किया जाता है। इस दौरान आपको अपनी भाषा में मधुरता लानी होगी। क्योंकि संभव है कि आपकी वाणी में मंगल के प्रभाव…. आगे पढ़ें

तुला


मंगल ग्रह आपकी ही राशि में गोचर करेगा जो आपके प्रथम भाव अर्थात लग्न भाव में स्थित होगा। ज्योतिष में लग्न भाव को तनु भाव कहा जाता है। गोचर के प्रभाव से आपके स्वभाव में कठोरता आ सकती है। छोटी-छोटी बातों को लेकर आप गुस्सा…. आगे पढ़ें

वृश्चिक


मंगल आपकी राशि से द्वादश भाव में प्रवेश करेगा। ज्योतिष में यह भाव व्यय भाव कहलाता है। इस भाव से ख़र्चे, हानि, मोक्ष, विदेश यात्रा आदि को देखा जाता है। इस गोचर से आपके शादीशुदा जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं। जीवन साथी को आपके…. आगे पढ़ें

धनु


मंगल आपकी राशि से एकादश भाव में स्थित होगा। कुंडली में एकादश भाव को आमदनी का भाव कहा जाता है। इस भाव से आय, जीवन में प्राप्त होने वाली सभी प्रकार की उपलब्धियाँ, मित्र, बड़े भाई-बहनों आदि को देखा जाता है। गोचर के दौरान आपको कई क्षेत्रों में…. आगे पढ़ें

मकर


मंगल आपकी राशि से दशम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में दशम भाव करियर एवं प्रोफेशन, पिता की स्थिति, रुतबा, राजनीति एवं जीवन के लक्ष्यों की व्याख्या करता है। मंगल का ये गोचर आपके करियर में ईंधन का कार्य कर सकता है। इस दौरान आप करियर के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों…. आगे पढ़ें

कुंभ


मंगल आपकी राशि से नवम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में नवम भाव को भाग्य भाव कहते हैं। इस भाव से व्यक्ति के भाग्य, गुरु, धर्म, यात्रा, तीर्थ स्थल, सिद्धांतों का विचार किया जाता है। ये समय आपके लिए मिला-जुला रहेगा। संभव है कि इस बीच आप जॉब चेंज कर लें या फिर दूसरे…. आगे पढ़ें

मीन


मंगल आपकी राशि से अष्टम भाव में स्थित होगा। कुंडली के अष्टम भाव को आयुर्भाव भी कहा जाता है। इस भाव से जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव, अचानक से होने वाली घटनाएँ, आयु, रहस्य, शोध आदि को देखा जाता है। कार्यों में लाभ प्राप्त करने के लिए आपको अधिक…. आगे पढ़ें
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शनि त्रयोदशी व्रत आज- जानें महत्व, पूजा विधि व लाभ

इस शनि त्रयोदशी पर शनि देव और भगवान शिव का पाएँ आशीर्वाद! जानें व्रत और उद्यापन की संपूर्ण विधि। 


त्रयोदशी व्रत को प्रदोष व्रत भी कहा जाता है, जो माता पार्वती और भगवान शंकर की अपार कृपा पाने के लिए सबसे आसान व्रत माना जाता है। प्रदोष व्रत हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि के दिन ही रखा जाता है। ऐसे में जो प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है उसे शनि प्रदोष या शनि त्रयोदशी व्रत भी कहते हैं। इस बार ये व्रत 9 नवंबर, शनिवार के दिन यानि आज है। शनि प्रदोष व्रत विधि अनुसार करके कोई भी मनुष्य भगवान शिव और शनि देव का आशीर्वाद पाकर अपने मन की किसी भी इच्छा को बहुत जल्दी पूरा कर सकता है। 

शनि त्रयोदशी व्रत से पाएँ भगवान शिव का आशीर्वाद 


शनि त्रयोदशी व्रत में भक्त शाम के समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के करीब 45 मिनट बाद भगवान शिव की पूजा-अराधना करते हैं। ऐसा करने से मान्यता है कि व्यक्ति को भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की महा कृपा भी प्राप्त होती है और साथ ही उसकी कुंडली से शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या का दुष्प्रभाव भी शून्य या कम हो जाता है। 

शनि की साढ़े साती व शनि की महादशा को करें कम- यहाँ क्लिक कर !

शनि प्रदोष व्रत का महादेव से संबंध 


सनातन धर्म में हर मास आने वाले शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त के बाद के समय से रात्रि प्रारंभ होने के ठीक पूर्व का समय होता है। जिस प्रकार किसी भी शुभ तिथि में किया गया कार्य या उपवास मनवांछित इच्छाएँ पूर्ण करता है, ठीक उसी प्रकार प्रदोष व्रत करने का भी अपना एक विशेष महत्व होता है। धार्मिक शास्त्रों अनुसार प्रदोष काल के समय भगवान शिव कैलाश पर्वत स्थित अपने रजत भवन में तांडव नृत्य करते हैं। इसलिए शिव भक्तों में इस तिथि का महत्व पौराणिक काल से ही चला आ रहा है। 


विभिन्न त्रयोदशी व्रत और उनके लाभ


विभिन्न वार अनुसार प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत अलग-अलग नामों से विख्यात हैं, जिसका महत्व भी आपस में एक दूसरे से भिन्न होता है। चलिए जानते हैं वार अनुसार त्रयोदशी व्रत का महत्व और उनके लाभ:- 

  • रविवार त्रयोदशी व्रत: रविवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत करने से स्वास्थ्य जीवन व दीर्घायु की प्राप्ति होती है। 
  • सोमवार त्रयोदशी व्रत: सोमवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत से व्यक्ति की हर मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसे सोम प्रदोषम या चंद्र प्रदोषम के नाम से भी जाना जाता है। 
  • मंगलवार त्रयोदशी व्रत: मंगलवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत से आरोग्य जीवन की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपने जीवन में हर प्रकार की गंभीर बीमारी से भी मुक्ति मिलती है। इसे भौम प्रदोषम भी कहा जाता है। 
  • बुधवार त्रयोदशी व्रत: बुधवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत से भगवान शिव हर कामना पूरी करते हैं। 
  • बृहस्पतिवार त्रयोदशी व्रत: गुरूवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत करने से आप अपने शत्रुओं और विरोधियों पर विजय प्राप्त कर पाते हैं। 
  • शुक्रवार त्रयोदशी व्रत: शुक्रवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत आजीवन सुख और सौभाग्य प्रदान करता है। इस व्रत से आपका दांपत्य जीवन भी सुखमय व्यतीत होता है। 
  • शनिवार त्रयोदशी व्रत: शनिवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी व्रत को शनि प्रदोषम भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से शनि देव संतान प्राप्ति की चाह रखने वाले सभी जातकों को तेजस्वी संतान प्रदान करते हैं। 

शनि देव की शान्ति के उपाय - यहाँ पढ़ें!

त्रयोदशी व्रत का पौराणिक महत्व


हिंदू धर्म में त्रयोदशी व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सबसे आसान तरीका माना गया है। जिस दौरान व्रत करने से भगवान शिव की कृपा पाकर व्यक्ति को शुभ फलदायक लाभों की प्राप्ति अवश्य होती है। इसलिए माना जाता है कि जो भी भक्त इस तिथि के दिन सच्ची श्रद्धा भाव से उपवास रख, भगवान शिव की आराधना करता है, उन्हें समस्त बाधाओं और कष्टों से भगवान भोले मुक्ति दिलाते हैं और उन्हें मृत्यु के पश्चात मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। इस व्रत से जुड़ी यूँ तो आपको कई पौराणिक कथाएँ सुनने को मिल जाएंगे जिनके अनुसार प्रदोष व्रत करने से सौ गायों के दान व कन्या दान जितना पुण्य मिलता है। इस व्रत को लेकर ये भी माना जाता है कि वेदों के महाज्ञानी सूतजी ने शौनकादि ऋषियों से चर्चा करते हुए इस बात का उल्लेख किया था कि कलियुग में अधर्म का बोल-बाला होगा, इसलिए न्याय की राह छोड़ अधर्म के मार्ग पर चल निकले मनुष्यों के लिए प्रदोष व्रत ही उनके पश्चाताप का एक मात्र माध्यम साबित होगा। 


शनि त्रयोदशी व्रत के दौरान इन बातों का रखें ध्यान 


शनि त्रयोदशी व्रत के दिन विशेष तौर से सुबह और शाम दोनों समय ही भगवान शिव और शनि देव की पूजा की जाती है। इस दौरान संध्या का समय व्रत पूजन के लिए सबसे शुभ एवं लाभकारी माना जाता है। तभी इस तिथि पर सभी शिव मंदिरों व शनि मंदिरों में संध्या के समय शनि प्रदोष मंत्र का जाप किया जाता है। ऐसे में शनि प्रदोष व्रत को करने के कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं, जिन्हे अपना कर आप इस व्रत को और भी शुभ बना सकते हैं। 

  • शनि त्रयोदशी तिथि के दिन सर्वप्रथम सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान-ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद अपनी नग्न आँखों से उगते हुए सूर्य देव के दर्शन करें और उन्हें जल अर्पित करें। 
  • इसके पश्चात किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि अर्पित करें। 
  • इसके बाद शनि मंदिर जाकर भगवान शनि देव की प्रतिमा को बिना छुए सरसों के तेल या काले तिल का तेल अर्पित करें। 
  • इसके साथ ही सरसों के तेल का चौमुखा दिया किसी पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं और एक दीया शनिदेव के मंदिर में जलाएं और शनि त्रयोदशी व्रत का संकल्प लें। 
  • इस व्रत को करने वाले लोगों को इस पूरे ही दिन किसी भी प्रकार का भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। 
  • हालांकि अगर ऐसा मुमकिन न हो तो फलाहार करें या संध्या के समय एक बार भोजन भी कर सकते हैं। 
  • शनि त्रयोदशी वाले दिन सूर्यास्त से कुछ देर पहले पुनः स्नान कर सफेद वस्त्र पहनें। 
  • इसके पश्चात स्वच्छ जल अथवा गंगाजल से पूजा स्थल को भी शुद्ध करें। 
  • इस दौरान आप पूजा स्थल पर अलग-अलग रंगों से रंगोली भी बना सकते हैं। 
  • इसके बाद सारा दिन भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। 
  • अब प्रदोष काल में भगवान शिव को सबसे पहले पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से स्नान कराए और फिर उन्हें शुद्ध जल से भी स्नान कराए। 
  • अब अंत में रोली, मोली, चावल, धूप, दीप आदि से उनका पूजन कर उन्हें भोग लगाएँ। 


प्रदोष व्रत के उद्यापन की पूजा-विधि


प्रदोष व्रत को लेकर माना जाता है कि जो भी व्यक्ति इस व्रत को 11 या फिर 26 त्रियोदशी तक करता है, उसे भगवान शिव और मां पार्वती का आशीर्वाद ज़रूर प्राप्त होता है। आइये जानते हैं इस व्रत के उद्यापन की सही पूजा-विधि। 

  • प्रदोष व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि को अर्थात प्रदोषम के दिन हीं करना अनिवार्य होता है। 
  • प्रदोष व्रत के उद्यापन से एक दिन पूर्व भगवान श्री गणेश की पूजा-वंदना ज़रूर करनी चाहिए। 
  • उद्यापन से एक रात पूर्व जागरण कर रात भर भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती का कीर्तन करें। 
  • जागरण के अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में गाय के गोबर से एक मंडप बनाएँ और उसे रंगीन वस्त्रों और सुंदर-सुंदर रंगोली से सज़ाएँ। 
  • इसके बाद ‘ओम उमा सहित शिवाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करते हुए पूजा स्थल पर एक हवन करें।
  • ध्यान रखें की हवन में आहूति देने हेतु खीर का प्रयोग अवश्य करें। 
  • हवन पूर्ण होने पर भगवान शंकर की आरती और शांति पाठ करें। 
  • इसके बाद ब्राह्मणों को अपनी श्रद्धा अनुसार भोजन कराए और अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें दान दक्षिणा देकर उनका आर्शीवाद प्राप्त करें।
  • इस पूरे ही समय अपने मन में किसी भी तरीके के गलत विचारों को न आने दें। 

शनि साढ़े साती का राशियों पर प्रभाव - यहाँ क्लिक कर पढ़ें 

हम आशा करते हैं कि हमारा ये लेख आपको पसंद आया होगा। हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।
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तुलसी विवाह कल, जानें शुभ मुहूर्त में कैसे करें तुलसी विवाह

तुलसी विवाह हिन्दुओं का धार्मिक पर्व है। यह पर्व हमेशा कार्तिक मास की शुक्ल एकादशी अथवा द्वादशी के दिन मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठनी एकादशी कहते हैं। इसी दिन भगवान विष्णु जी चार माह के पश्चात् शयन के बाद जागते हैं। इसके एक दिन बाद भगवान विष्णु का विधिनुसार उनकी प्रिय तुलसी से विवाह किया जाता है। 


इस वर्ष तुलसी विवाह का पर्व 9 नवंबर को है। पंचांग के अनुसार इस दिन द्वादशी है। अतः इसी दिन ही तुलसी विवाह का मुहूर्त भी होगा। शास्त्रों के अनुसार तुलसी विवाह का समारोह देवउठनी एकादशी एवं कार्तिक पूर्णिमा के बीच कभी भी संपन्न कराया जा सकता है।


तुलसी विवाह का मुहूर्त


द्वादशी तिथि प्रारंभ8 नवंबर 201912:26:21 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त9 नवंबर 2019शाम को 02:41:33 बजे तक

नोट: ऊपर दिया गया समय नई दिल्ली (भारत) के लिए मान्य है।

तुलसी और भगवान विष्णु जी का संबंध


हिन्दू धर्म में तुलसी का पौधा पूजनीय है। इसलिए प्रत्येक हिन्दू घर के आंगन या छत पर तुलसी का पौधा अवश्य ही लगा होता है। यह औषीधीय गुणों से संपन्न पौधा होता है। वहीं धार्मिक दृष्टि से देखें तो शास्त्रों में तुलसी को माँ लक्ष्मी का रूप माना गया है और माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु जी की अर्धांगिनी हैं।

इसलिए तो तुलसी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय हैं और तुलसी विवाह के दिन भगवान विष्णु के प्रतीक शालिग्राम और तुलसी माता के बीच विधि-विधान से विवाह कराया जाता है। इस अवसर पर श्री हरि नारायण को दूल्हे और तुलसी को एक दुल्हन की तरह सजाकर उनका विवाह संपन्न कराया जाता है। साथ ही इसी दिन से विवाह ऋतु प्रारंभ हो जाती है।

तुलसी विवाह की विधि


  • इस दिन परिवार के सभी सदस्यों को नहा धोकर के अच्छे कपड़े पहना जाता है।
  • वहीं जो कन्यादान करते हैं उन्हें इस रस्म से पहले व्रत रखना चाहिए।
  • शुभ मुहूर्त के दौरान तुलसी के पौधे को आंगन में पटले पर रखें।
  • अपनी सुविधानुसार आप चाहे तो छत या मंदिर स्थान पर भी तुलसी विवाह किया जा सकता है।
  • तुलसी के गमले की मिट्टी में ही एक गन्ना गाढ़ें और उसी पर लाल चुनरी से मंडप सजाएं।
  • गमले में शालिग्राम पत्थर भी रखें।
  • यहाँ शालिग्राम पत्थर भगवान विष्णु जी के प्रतीक हैं।
  • तुलसी और शालिग्राम की हल्दी करें।
  • इसके लिए दूध में हल्दी भिगोकर लगाएं।
  • गन्ने के मंडप पर भी हल्दी का लेप लगाएं।
  • अब पूजन करते हुए फल-फूल चढ़ाएं।
  • अब पूजा की थाली में ढेर सारा कपूर रख जलाएं।
  • इससे तुलसी और शालिग्राम की आरती उतारें।
  • आरती उतारने के बाद तुलसी की 11 बार परिक्रमा करें और प्रसाद बांटे।

तुलसी विवाह का महत्व


तुलसी विवाह का आयोजन धार्मिक, आध्यात्मिक और चिकित्सीय दृष्टि महत्वपूर्ण है। तुलसी का पौधा अति शुभ होता है। जहाँ कहीं भी यह होता है उस वातावरण में अपनी सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखता है। अतः कई रोग-दोषों समाप्त करने में यह यह कारगर और सक्षम है। धार्मिक दृष्टि से देखें तो इस विवाह में भाग लेने वाले सभी लोगों को माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

माँ लक्ष्मी धन की देवी हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में धन समृद्धि का आगमन होता है। जीवन में दरिद्रता कभी नहीं आती है और सपन्नता बनी रहती है। वहीं भगवान विष्णु जी जो कि समस्त सृष्टि के पालन हार हैं। यदि किसी व्यक्ति पर उनकी कृपा दृष्टि हो जाए तो उस व्यक्ति जीवन ही धन्य हो जाता है। 

पौराणिक मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जिस घर में बेटी न हो तो वहाँ पर तुलसी विवाह का आयोजन नहीं करना चाहिए। तुलसी विवाह से ही हिन्दू धर्म में होने वाले सभी शुभ कर्मकांड प्रारंभ होने लगते हैं।

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तुलसी विवाह से जुड़ी पौराणिक कथा


भगवान शिव और पार्वती का एक तीसरा पुत्र था। इस पुत्र का नाम जलंधर था, जो असुर प्रवत्ति का था। वह खुद को सभी देवताओं को ऊपर समझता था। जलंधर का विवाह भगवान विष्णु की परम भक्त वृंदा से विवाह हुआ। वह बार-बार अपनी शक्तियों से देवताओं को परेशान करता, लेकिन देवता वृंदा की भक्ति की वजह से जलंधर को मारने में असफल रहते। एक बार सभी देवता इस समस्या को लेकर भगवान विष्णु के पास गए और हल मांगा।

हल बताते हुए विष्णु जी ने वृंदा का सतीत्व खत्म करने की योजना बनाई। ऐसा करने के लिए विष्णु जी ने जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया। इसके बाद त्रिदेव जलंधर को मारने में सफल हुए। इस छल को जान वृंदा ने विष्णु दी को श्राप दिया। इस पर सभी देवताओं ने श्राप वापस लेने की विनती की, जिसे वृंदा ने माना और अपना श्राप वापस ले लिया। लेकिन भगवान विष्णु ने प्रायश्चित के लिए खुद का एक पत्थर का स्वरूप बनाया। यही पत्थर शालिग्राम कहलाया।

वृंदा अपने पति जलंधर के साथ सती हो गई और उसकी राख से तुलसी का पौधा निकला। इतना ही नहीं भगवान विष्णु ने अपना प्रायश्चित जारी रखते हुए तुलसी को सबसे ऊँचा स्थान दिया और कहा कि, मैं तुलसी के बिना भोजन नहीं करूंगा। इसके बाद सभी देवताओं ने वृंदा के सती होने का मान रखा और उसका विवाह शालिग्राम के कराया। जिस दिन तुलसी विवाह हुआ उस दिन देवउठनी एकादशी थी। इसीलिए हर साल देवउठनी के दिन ही तुलसी विवाह किया जाने लगा।

एस्ट्रोसेज की ओर से आपको तुलसी विवाह की हार्दिक शुभकामनाएँ। हम आशा करते हैं कि माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद सदैव आपके ऊपर बना रहे। एस्ट्रोसेज से जुड़ने रहने के लिए आपका धन्यवाद!
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देव उठनी एकादशी, जानें पारण मुहूर्त एवं व्रत विधि

देव उठनी एकादशी का व्रत धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को ही देव उठनी या फिर प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का धार्मिक महत्व है। यह तिथि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु जी को समर्पित है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु 4 माह (देव शयनी एकादशी से देव उठनी एकादशी तक) सोने के बाद जागते हैं। हरि के जागरण से शुभ और मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं।

आज 8 नवंबर, शुक्रवार को देव उठनी एकादशी का व्रत रखा जायेगा, जिसका पारणा कल यानि 9 नवंबर, शनिवार को होगा। चलिए जानते हैं, देव उठनी एकादशी मुहूर्त के बारे में -



देव उठनी एकादशी का दिन और पारण मुहूर्त


तारीख़दिनपारणा मुहूर्तअवधि
8 नवंबर 2019शुक्रवार06:38:43 से 08:49:08 बजे तक 9 नवंबर 2019 को 2 घंटे 10 मिनट

नोट: ऊपर दिया गया समय नई दिल्ली (भारत) के लिए मान्य है। अपने शहर के अनुसार देव उठनी एकादशी का पारण मुहूर्त जानने के लिए यहाँ क्लिक करें - देव उठनी एकादशी पारण मुहूर्त 2019 

देव शयनी एकादशी व्रत विधि 


  • इस दिन प्रातःकाल उठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए।
  • घर की सफाई के बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर आँगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाना चाहिए।
  • एक ओखली में गेरू से चित्र बनाकर फल, मिठाई, बेर, सिंघाड़े, ऋतुफल और गन्ना उस स्थान पर रखकर उसे डलिया से ढांक देना चाहिए। 
  • इस दिन रात्रि में घरों के बाहर और पूजा स्थल पर दीये जलाना चाहिए।
  • रात्रि के समय परिवार के सभी सदस्य को भगवान विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं का पूजन करना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान को शंख, घंटा-घड़ियाल आदि बजाकर उठाना चाहिए और ये वाक्य दोहराना चाहिए- उठो देवा, बैठा देवा, आंगुरिया चटकाओ देवा, नई सूत, नई कपास, देव उठाये कार्तिक मास।

देव उठनी एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा


एक समय भगवान नारायण से लक्ष्मी जी ने पूछा- “हे नाथ! आप दिन रात जागा करते हैं और सोते हैं तो लाखों-करड़ों वर्ष तक सो जाते हैं, तथा इस समय में समस्त चराचर का नाश कर डालते हैं। इसलिए आप नियम से प्रतिवर्ष निद्रा लिया करें। इससे मुझे भी कुछ समय विश्राम करने का समय मिल जाएगा।”

लक्ष्मी जी की बात सुनकर नारायण मुस्कुराए और बोले- “देवी! तुमने ठीक कहा है। मेरे जागने से सब देवों और खासकर तुमको कष्ट होता है। तुम्हें मेरी वजह से जरा भी अवकाश नहीं मिलता। अतः तुम्हारे कथनानुसार आज से मैं प्रतिवर्ष चार मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। उस समय तुमको और देवगणों को अवकाश होगा। 

मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और प्रलय कालीन महानिद्रा कहलाएगी। मेरी यह अल्पनिद्रा मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी होगी। इस काल में मेरे जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे और शयन व उत्थान के उत्सव को आनंदपूर्वक आयोजित करेंगे उनके घर में, मैं तुम्हारे साथ निवास करूंगा।”

एस्ट्रोसेज की ओर से आपको देव उठनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ!
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वक्री बुध का तुला राशि में गोचर

वक्री बुध के गोचर से इन राशियों को होगा लाभ! पढ़ें वक्री बुध के तुला राशि में गोचर के ज्योतिषीय प्रभाव।



बुध ग्रह वक्री अवस्था में है और इसी अवस्था में यह तुला राशि में गोचर हो रहा है। हो सकता है कि आपके सामने ये सवाल हो कि यह वक्री अवस्था क्या है। जब कोई भी ग्रह अपनी विपरीत दिशा में आगे की ओर बढ़ता है तो ग्रह की उस चाल को वक्री चाल कहते हैं। आकाश मंडल में बुध ग्रह एक तटस्थ ग्रह है। न तो यह अशुभ और न ही यह शुभ ग्रहों की श्रेणी में आता है। किंतु जिस ग्रह के साथ इसकी युति होती है बुध उसी ग्रह के अनुरूप ही फल देता है। 

कुंडली में बुध का बड़ा महत्व है। क्योंकि बुध ग्रह के शुभ प्रभाव से कोई व्यक्ति चालाक, प्रखर वक्ता, गणितज्ञ, तर्कवादी बन सकता है। ज्योतिष में बुध ग्रह को वाणी, संचार, गणित, तार्किक शक्ति, चतुराई आदि का कारक माना जाता है। राशियों में यह मिथुन और कन्या राशि का मालिक है। कन्या इसकी उच्च राशि भी है। जबकि मीन इसकी नीच राशि है। 

यदि कुंडली में बुध ग्रह कमज़ोर हो अथवा यह पापी या क्रूर ग्रहों से पीड़ित हो तो जातकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कमजोर बुध के कारण जातक को संवाद करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। उसके स्वभाव में भोलापन होता है और ऐसा व्यक्ति गणित एवं तार्किक क्षमता में पिछड़ जाता है। 

किंतु यदि बुध ग्रह की शांति के उपाय किए जाएं तो जातक की कुंडली में बुध ग्रह मजबूत हो सकता है और जातक को इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

बुध ग्रह के उपाय


  • बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करें।
  • इस दिन हरे रंग का वस्त्र धारण करें।
  • बुध ग्रह की मजबूती के लिए विधारा मूल धारण करें।
  • चार मुखी रुद्राक्ष को धारण करें। 
  • विधि पूर्वक बुध यंत्र की स्थापना कर उसकी पूजा करें।
  • बुध ग्रह के बीच मंत्र का जाप करें - ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

गोचर की समयावधि


वक्री बुध 7 नवंबर बृहस्पतिवार शाम 4:04 तुला राशि में प्रवेश करेगा और 21 नवंबर को मार्गी होने के बाद पुनः 5 दिसंबर बृहस्पतिवार सुबह 10:23 बजे बजे वृश्चिक राशि में पुनः प्रवेश कर जाएगा। 

आइए जानते हैं राशि के अनुसार तुला राशि में वक्री बुध के इस गोचर का प्रभाव…. 

मेष राशि


आपकी राशि के लिए बुध तीसरे और छठे भाव का स्वामी है और इस गोचर के दौरान वक्री अवस्था में बुध आपके सप्तम भाव में गोचर करेगा। सप्तम भाव हमारे जीवन में होने वाली बड़ी साझेदारियों का भाव है। इसी के आधार पर हमारे जीवन साथी का चयन होता है तथा…...आगे पढ़ें

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वृषभ राशि


आपकी राशि के लिए वह दूसरे और पांचवें भाव का स्वामी है और इस गोचर के दौरान अपनी वक्री अवस्था में वह आपके षष्टम भाव में प्रवेश करेगा। छठे भाव के द्वारा जीवन में संघर्षों के बारे में पता चलता है। किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता की बात करनी हो अथवा…...आगे पढ़ें

मिथुन राशि


बुध ग्रह आपकी राशि का स्वामी होने के साथ-साथ आपके चतुर्थ भाव का स्वामी है और अपने इस गोचर के दौरान वक्री गति से आपके पंचम भाव में प्रवेश करेगा। पांचवा भाव हमारी बुद्धि और ज्ञान की दिशा का निर्धारण करता है। इसी के आधार पर हमारी शिक्षा…...आगे पढ़ें

कर्क राशि


इस राशि के लोगों के लिए बुध आपकी कुंडली के बारहवें तथा तीसरे भाव का स्वामी है। अपने इस गोचर के दौरान वे आपके चतुर्थ भाव में संचरण करेगा। चतुर्थ भाव हमारे सुख का भाव है और यही हमारी माता के बारे में भी बताता है। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की…...आगे पढ़ें

सिंह राशि


सिंह राशि के लोगों के लिए बुध ग्रह दूसरे तथा ग्यारहवें भाव का स्वामी है तथा अपने वक्री गोचर के दौरान आपके तृतीय भाव में प्रवेश करेगा। तीसरा भाव हमारे संचार माध्यमों तथा संवाद शैली का भाव है। इस भाव की सहायता से हम अपने छोटे भाई बहनों तथा छोटी दूरी की यात्राओं…...आगे पढ़ें

कन्या राशि


बुध ग्रह आपकी ही राशि का स्वामी है और साथ ही साथ आपके दशम भाव पर भी आधिपत्य रखता है। अपने इस गोचर के दौरान वह आपके द्वितीय भाव में प्रवेश करेगा। दूसरा भाव हमारी वाणी तथा भोजन का भाव होता है। हम कैसा भोजन खाते हैं और कैसी वाणी…...आगे पढ़ें

तुला राशि


तुला राशि के लोगों के लिए बुध बारहवें तथा नवें भाव का स्वामी है और इस दौरान बुध का गोचर आपके प्रथम भाव में होगा। इसे लग्न भाव भी कहते हैं। प्रथम भाव हमारे व्यक्तित्व का आईना होता है। इसी के द्वारा हमारा शरीर, समाज में हमारी पहचान तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता…...आगे पढ़ें

वृश्चिक राशि


बुध ग्रह का गोचर आपकी राशि से द्वादश भाव मैं होगा। वह आपके लिए अष्टम तथा एकादश भाव का स्वामी है। बारहवाँ भाव हमारी विदेश यात्राओं को बताने का कारगर माध्यम है। इसकी सहायता से हम अपने जीवन में आने वाले ख़र्चों, हानियों, शयन सुख तथा आध्यात्मिक…...आगे पढ़ें

धनु राशि


आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर करने वाला वक्री बुध आपकी राशि के लिए सप्तम और दशम भाव का स्वामी ग्रह है। एकादश भाव जीवन में लाभ का भाव माना जाता है क्योंकि हमारी सभी आकांक्षाएं इसी भाव से देखी जाती हैं। हमें हमारी मेहनत का लाभ कितना मिलेगा…...आगे पढ़ें

मकर राशि


बुध ग्रह का गोचर आपकी राशि से दशम भाव में होगा तथा वह आपकी राशि से छठे तथा नवम भाव पर अपना अधिकार रखता है। दशम भाव हमारे जीवन में कर्म पर आधिपत्य रखता है और जीवन में हमारे कर्म की दिशा का निर्धारण करता है। इसी के द्वारा हमारी ख्याति…...आगे पढ़ें

कुंभ राशि


बुध ग्रह का गोचर वक्री अवस्था में आपके नवम भाव में होगा और वह आपकी राशि के लिए पांचवें तथा आठवें भाव का स्वामी है। नवम भाव हमारे भाग्य का भाव होने के कारण जीवन में भाग्योदय के बारे में बताता है। इसके साथ ही लंबी दूरी की यात्राएं, गुरु तथा मान-सम्मान की प्राप्ति…...आगे पढ़ें

मीन राशि


आपकी राशि के लिए बुध ग्रह चतुर्थ तथा सप्तम भाव का स्वामी है और अपने इस गोचर के दौरान वह आपके अष्टम भाव में प्रवेश करेगा। अष्टम भाव अनिश्चितताओं का भाव है। इस भाव के द्वारा ही जीवन में अध्यात्म का स्तर तथा अचानक से होने वाली घटनाओं का…...आगे पढ़ें
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