आज से शुरू हुआ सावन मास, जानें शिव पूजन विधि

भगवान शिव को करें प्रसन्न और पाएँ मनचाहा वरदान ! आज 17 जुलाई 2019 से हुई श्रावण मास की शुरुआत। जानें भगवान शिव को प्रिय इस माह की महिमा और महत्व।


आज, 17 जुलाई से सावन मास की शुरुआत हो गई है। इस श्रावण मास से व्रत और त्योहारों की भी शुरुआत हो जाती है। हिन्दू धर्म में श्रावण मास का सबसे बड़ा महत्व बताया गया है, विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए इस माह का विशेष महत्व होता है। क्योंकि माना गया है कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। हिंदू पंचांग की मानें तो चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले हर वर्ष का पांचवां महीना श्रावण मास होता है। वहीं अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना हर वर्ष जुलाई या अगस्त माह में आता है। इसके साथ ही ये देखा गया है कि वर्षा ऋतु के समय ही श्रावण मास का आगमन हर वर्ष होता है। यही वह समय होता है जब पृथ्वी पर चारों ओर प्रकृति अपना रंग दिखाती है और हरियाली ही हरियाली होती है। सावन मास में स्नान और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।


सावन सोमवार व्रत की तिथियां


पहला सावन सोमवार व्रत
सोमवार
जुलाई 22, 2019
दूसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
जुलाई 29, 2019
तीसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
अगस्त 5, 2019
चौथा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
अगस्त 12, 2019

सावन 2019 पर बना दुर्लभ संयोग 


इस बार के सावन महीने में कई शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार पहले सोमवार को श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि का संयोग, दूसरे सोमवार को त्रयोदशी प्रदोष व्रत के साथ-साथ सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग, तीसरे सोमवार को नागपंचमी का शुभयोग व चौथे सोमवार को त्रयोदशी तिथि का शुभ संयोग होगा। इस कारण इस वर्ष के सावन माह का महत्व बढ़ गया है। 

सावन सोमवार व्रत व पूजा विधि 


सावन का महीना भगवान शिव के सभी भक्तों के लिए किसी पर्व से कम नहीं होता है। भक्त इस मास में आने वाले प्रत्येक सोमवार को भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, साथ ही भगवान् शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु सच्ची श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखते हैं। देश-विदेश के तमाम ज्योतिर्लिंगों, शिवालयों और मंदिरों में भगवान भोलेनाथ के भक्तों का तांता लगा रहता है, इसलिए हर ज्योतिर्लिंग और शिवालय की साज-सजावट की जाती है। चलिए अब जानते हैं कि शिव पूजन और सावन मास में की जाने वाली पूजा और व्रत विधि:-

  • सावन मास के शुरू होते ही सुबह जल्दी उठकर स्नान व नए स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। 
  • पूजा स्थान की सफाई करें। 
  • तत्पश्चात आसपास कोई मंदिर हो तो वहां जाकर भगवान शिव का जल व दूध से अभिषेक करें।
  • इसके बाद पहले भगवान शिव को और शिवलिंग को चंदन का तिलक लगाएं और फिर ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान शंकर को सुपारी, पंच अमृत, नारियल, बेल पत्र, धतूरा, फल, फूल आदि चढ़ाएँ। 
  • इसके बाद घी या तेल का दीपक जलाएं।
  • इसके बाद भोलेनाथ के सामने आंख बंद कर शांति से बैठें और व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद कथा व शिव चालीसा का पाठ कर मंगल आरती करनी चाहिए। 
  • व्रत के दिन सुबह और शाम शिवलिंग का पूजन करें व भगवान शिव की आराधना करें। 
  • शाम को पूजा समाप्ति के बाद, यदि व्रत रखा है तो अपना व्रत खोलें और सात्विक भोजन करें।


भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय होता है श्रावण मास


हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार सावन मास में किए जाने वाले सोमवार के व्रत और दान-पुण्य भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होते हैं। इस संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं सुनने को मिलती हैं। उन्हीं में से एक पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए सावन मास में निराहार रहकर कठोर व्रत किया था। उनकी इस कठोर तपस्या से ही प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह रचाया था। इसलिए ही इस माह पड़ने वाले सावन सोमवार का व्रत यदि कुंवारी कन्याएँ रखती हैं तो माना गया है कि उन्हें भगवान शिव के समान पति की प्राप्ति होती है। 

वहीं एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा भी माना जाता है कि इसी माह को भगवान शिव ने पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने ससुराल जाने का निर्णय लिया था। जहाँ उनका भव्य स्वागत जलाभिषेक आदि से किया गया था। तभी से ऐसा माना जाता है कि हर वर्ष इसी माह भगवान शिव पृथ्वी पर अपने ससुराल आते हैं। ऐसे में इस समय भगवान भोले नाथ के भक्त उनकी पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद और कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 

सावन सोमवार व्रत का महत्व


शास्त्रों में भी इस बात का उल्लेख किया जाता है कि सावन के महीने में जो भी भक्तगण भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें भगवान शिव अपना आशीर्वाद ज़रूर देते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि सावन सोमवार के व्रत करके कोई भी विवाहित महिला अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बना सकती है। वहीं अविवाहित महिलाएं अच्छे वर की प्राप्ति कर सकती हैं। वहीं भक्तों को सावन माह में भगवान शिव का पूजन व व्रत करने से भगवान शिव से लंबी आयु का वरदान भी प्राप्त होता है।

सावन की शुरुआत के साथ हुआ कांवड़ और झंडा यात्रा का भी शुभारंभ 


सावन माह की शुरुआत होते ही भगवान भोलेनाथ के भक्त कांवड़ और झंडा यात्रा का शुभारंभ कर देते हैं। हर वर्ष इस मास की शुरुआत होते ही आस्था और उत्साह पूर्वक कांवड़ यात्राएं निकालने की एक विशेष धार्मिक परम्परा होती है। इस दौरान सावन के सोमवार को कांवडि़ए मां गंगा और नर्मदा के तट से अपनी कांवड़ में पवित्र जल भरते हैं और शिवालयों में उसी पवित्र जल से भक्त शिव के शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। सावन माह में कावंडि़ए बोल बम और हर हर महादेव के जयघोष के साथ आपको सड़कों पर कांवड़ लिए चलते दिखाई दे जाएंगे, जिसे देख पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। इसी प्रकार शारदा मंदिर मदन महल में भी सावन सोमवार के दिन झंडा चढ़ाने की विशेष पौराणिक परम्परा है। इस दौरान झंडों के लिए लम्बे-लम्बे बांसों की रंगाई-पुताई कर उन्हें सजाया जाता है। जिसके बाद उनमें भगवती के झंडे बांधकर गाजे-बाजे के साथ लोग इन झंडों को मंदिर में अर्पित करने जाते हैं। 

हम आशा करते हैं कि सावन के इस पवित्र माह में भगवान भोलेनाथ की कृपा आप पर बनी रहेगी। एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को अनंत शुभकामनाएँ!

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सूर्य का कर्क में गोचर आज, जानें प्रभाव।

चंद्र ग्रहण के तुरंत बाद सूर्य ने किया कर्क राशि में गोचर ! हो जाएं सावधान अब आएँगे ये बड़े बदलाव। पढ़ें सूर्य के कर्क राशि में हुए गोचर का प्रभाव।


सूर्य ग्रह सौर मंडल के सभी ग्रहों में एकमात्र स्वयं प्रकाशित ग्रह है। चंद्र और दूसरे अन्य ग्रह सूर्य से ही प्रकाशित होते हैं। इसीलिए इसे नौ ग्रहों में राजा की उपाधि प्राप्त है। सूर्य की अनमोल किरणें सभी जीव-जंतुओं के लिए वरदान हैं। इसलिए, सूर्य को पूरे संसार का पालनहार कहा जाता है। सूर्य की इसी महत्ता को देखते हुए ज्योतिष में सूर्य देव को पिता, पुत्र, हृदय और सत्ता का कारक माना गया है। वैदिक ज्योतिष्य के अनुसार सूर्य का रत्न माणिक्य है। इसलिए यदि किसी भी जातक की कुंडली में सूर्य शुभ प्रभाव में है तो उस जातक को अवश्य ही माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए। 

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सूर्य देव का कुंडली पर प्रभाव 


सूर्य को जगत की आत्मा भी कहा जाता है। इसीलिए, हर जन्म कुंडली का विचार करते समय ज्योतिष विशेषज्ञ सबसे पहले मुख्य तौर पर सूर्य का विचार करते हैं। जो पूर्व दिशा में स्थान बली बनता है और राशि चक्र की 5वीं राशि यानि सिंह राशि पर अपना आधिपत्य रखता है। इसलिए, सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य स्वगृही है। मेष राशि में ये परम उच्च का हो जाता है। यानि यह बहुत ही अच्छी स्थिति में पहुँचकर अति शुभ हो जाता है। वहीं तुला राशि में सूर्य नीच का गिना जाता है।

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इसके साथ ही अन्य ग्रहों की सूर्य से दूरी यह बताती है कि जातक पर सूर्य का कैसा प्रभाव पड़ेगा। साथ ही एक कुंडली में सूर्य किस राशि में है, वह उसकी नीच राशि, उच्च राशि, स्वगृही, मित्र या शत्रु राशि तो नहीं यह सब भी फलित ज्योतिष में फलादेश करते समय सभी ज्योतिषी ध्यान में रखते हैं।

यदि किसी कुंडली में सूर्य के अशुभ प्रभावों को कम करना और कुंडली में सूर्य को मजबूत करना हो तो सूर्य यंत्र का प्रयोग करना सबसे ज्यादा उत्तम माना गया है। कोई भी जातक सूर्य यंत्र का सही विधि–विधान से पूजन कर शीघ्र ही शुभ फल प्राप्त कर सकता है। इसके शुभ प्रभाव से जातक को अच्छी सेहत के साथ ही पद–प्रतिष्ठा, नौकरी और ख़ास तौर से सरकारी कार्य में सफलता मिलती है।

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गोचर काल का समय 


अग्नि तत्व और लाल वर्ण वाला सूर्य ग्रह एक बार फिर राशि परिवर्तन कर रहा है। सूर्य देव 17 जुलाई 2019, बुधवार को प्रातः 04:23 बजे मिथुन राशि से कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं जो अगले महीने 17 अगस्त 2019 तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। सूर्य के इस गोचर का प्रभाव सभी बारह राशियों के जातकों पर होगा। ऐसे में हम इस लेख में प्रत्येक राशि पर होने वाले सूर्य के इस गोचर का प्रभाव जानेंगे लेकिन उससे पहले आइये जानते हैं इस गोचर से देशभर में क्या बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे:-


  • बुधादित्य योग से छात्रों को मिलेंगे अच्छे फल

17 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर चंद्र की राशि कर्क में प्रवेश करेंगे जहाँ वो बुध के साथ युति करते हुए बुधादित्य योग बनाएंगे। जिसके चलते जिस भी राशि में सूर्य अच्छी स्थिति में होगा उस जातक की बुद्धि में वृद्धि देखी जायेगी। इन लोगों को इस गोचर के दौरान पढ़ाई-लिखाई एवं सरकारी नौकरी में सफलता मिलने की संभावना बन रही है। 


  • सूर्य के गोचर के दौरान गर्मी से परेशान होगा देश

सृष्टि के पालनहार देव सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने के दौरान सूर्य के प्रभाव से देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप परेशान करेगा, जिसके परिणामस्वरूप देशभर के कई राज्यों में जगह-जगह आगजनी की घटनाएँ बढ़ेंगी। साथ ही साथ कई इलाकों में जल की कमी से सम्बन्धी कई समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। 


  • सूर्य के गोचर से ठीक पहले लगा चंद्र को ग्रहण 

चूँकि सूर्य सरकारी पदों, आत्मबल, प्रतिष्ठा आदि का कारक होता है इसलिए इस गोचर काल के दौरान जब सूर्य मिथुन राशि छोड़कर कर्क राशि में गोचर करेगा तो वहां मौजूद मंगल सेनापति की भूमिका निभाते हुए पराक्रम योग का निर्माण करेगा, जिससे गोचर से ठीक पहले घटित हुए चंद्र ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव भी मंगल सूर्य की युति से समाप्त हो जाएंगे। 

चंद्र ग्रहण 2019 की दिनांक और उसके सूतक का समय: यहाँ क्लिक कर पढ़ें

आइये अब जानते हैं सभी राशियों पर कैसा होगा सूर्य के इस गोचर का असर:- 


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


सूर्य का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में होगा। इसलिए इस गोचर के समय आपको अपने माता-पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत है। उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। पारिवारिक जीवन में किसी समस्या के चलते आपको मानसिक तनाव होने की भी संभावना है। हालांकि आप अपनी सूझबूझ से समस्या का हल निकालने की कोशिश करेंगे, लेकिन इस...आगे पढ़ें

वृषभ


तृतीय भाव में सूर्य का यह गोचर आपके साहस में वृद्धि करेगा। आप इस दौरान जो भी काम हाथ में लेंगे उसे एकाग्रता के साथ पूरा करने की कोशिश करेंगे। आपकी ऊर्जा कार्यक्षेत्र में आपको अच्छे फल दिलाएगी। अपने विरोधियों पर इस दौरान आप हावी रहेंगे और तर्क-वितर्क की स्थिति में उनपर विजय प्राप्त करेंगे। इस राशि के कुछ लोगों को काम के सिलसिले में इस दौरान...आगे पढ़ें

मिथुन


इस गोचर के कारण आपके कठोर वचनों से कुछ लोग आपसे नाराज़ भी हो सकते हैं। परिवार के लोगों के साथ सामंजस्य बिठाना है तो अपनी वाणी में आपको मधुरता लानी होगी। आपका जीवनसाथी इस समय आपको समझने में कामयाब होगा और आपकी कई समस्याओं को वो दूर कर देगा। सरकारी क्षेत्र से आपको मुनाफ़ा हो सकता है। आर्थिक पक्ष भी इस दौरान मजबूत होगा यह वह समय है जब...आगे पढ़ें


कर्क


सूर्य का गोचर आपकी ही राशि यानि आपके लग्न भाव में होगा। जिससे आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस समय ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें जिनसे आपको एलर्जी है। सूर्य के आपकी राशि में गोचर के चलते आपके स्वभाव में अहंकार की वृद्धि हो सकती है और वाणी में भी कड़वापन आ सकता है। आपके व्यवहार के कारण परिवार के लोगों से भी आपकी...आगे पढ़ें

सिंह


इस गोचर के दौरान आपको धन से जुड़े मामलों में बहुत संभलकर चलना होगा। किसी ऐसे इंसान को इस वक्त उधार देने से बचें जिस पर आपको भरोसा नहीं है। यह गोचर आपकी सेहत के लिहाज से अच्छा नहीं कहा जा सकता इसलिए इस दौरान आपको अपने शरीर को तंदरुस्त रखने के लिए योग करना चाहिए। नियमित प्राणायाम करना आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। अगर समस्या बड़ी है तो तुरंत चिकित्सक के पास जाएं...आगे पढ़ें

कन्या


सूर्य देव के आपके एकादश भाव में गोचर करने से आपको आर्थिक लाभ होने की पूरी संभावना है। खासकर वो लोग जो विदेशों से व्यापार करते हैं उन्हें इस समय मुनाफ़ा हो सकता है। आपके विरोधी इस समय में आपके तेज के सामने टिक नहीं पाएंगे। नौकरी पेशा से जुड़े लोगों को भी कार्यक्षेत्र में इस दौरान अच्छे फल मिलेंगे। आपके सीनियर्स आपके काम से खुश रहेंगे ऐसे में आप भी...आगे पढ़ें

तुला


सूर्य की ये स्थिति आपके लिए मंगलकारी है। आपके काम करने की गति इस अवधि में बहुत तीव्र होगी। आप जो भी काम हाथ में लेंगे उसे पूरी रचनात्मकता के साथ करेंगे। कार्यस्थल में आपको उन्नति मिल सकती है। आपके काम से खुश होकर आपके सीनियर्स के द्वारा आपकी तारीफ होने की पूरी संभावना है। सरकारी योजनाओं का इस दौरान आपको लाभ प्राप्त होगा। हालांकि पारिवारिक जीवन में...आगे पढ़ें

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वृश्चिक


नवम भाव में सूर्य का गोचर आपके लिए अच्छा रहने वाला है। गोचर के दौरान आप धर्म के प्रति जुड़ाव का अनुभव करेंगे। इस दौरान आप किसी लंबी यात्रा पर भी जा सकते हैं और इस यात्रा से आपको लाभ भी हो सकता है। इस अवधि में दान-पुण्य करना आपके लिए लाभदायक रहेगा। इससे आपको मानसिक शांति का अनुभव होगा। सामाजिक जीवन में आप इस दौरान अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे...आगे पढ़ें

धनु


आर्थिक पक्ष इस दौरान कमजोर हो सकता है इसलिए धन से जुड़े मामलों में इस दौरान सावधानी बरतें। अगर धन का निवेश करने का सोच रहे हैं तो ऐसा करने से पहले किसी जानकार से सलाह अवश्य लें। इस दौरान आपकी सेहत भी नासाज़ रहेगी जिसकी वजह मानसिक तनाव हो सकता है। खुद को तरोताज़ा रखने के लिए आप सुबह शाम सैर कर सकते हैं या घर पर योग कर सकते हैं...आगे पढ़ें

मकर


इस गोचर के चलते आपको पारिवारिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपकी भाषा का कठोरपन घर में अशांति ला सकता है इसलिए इस दौरान अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें और उतना ही बोलें जितना ज़रूरी है। यह गोचर आपको शारीरिक परेशानियां भी दे सकता है, अत: अपने स्वास्थ्य के प्रति ढुलमुल रवैया इस दौरान न अपनाएं। इस राशि के छात्रों के लिए...आगे पढ़ें

कुंभ


सूर्य के गोचर के दौरान आप अपने विरोधियों पर पूरी तरह से हावी रहेंगे। अपने तर्कों से आप अपने विरोधियों का मुंह बंद कर देंगे। हालांकि आपको इस दौरान किसी से भी ऐसी बात कहने से बचना चाहिए जिससे बाद में आपको ही बुरा लगे। जिन छात्रों ने हाल ही में प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया है उन्हें इस गोचर के दौरान सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में आपको...आगे पढ़ें

मीन


सूर्य के इस गोचर के चलते कार्यक्षेत्र मे आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सीनियर्स के साथ विवाद की स्थिति बन सकती है इसलिए संभलकर चलें। प्रेम जीवन में प्रियतम के साथ अनबन की स्थिति बन सकती है लेकिन आप यदि शांति बनाए रखेंगे तो स्थिति जल्द ही सुधर जाएगी। हालांकि अगर आपने अपने गुस्से को खुद पर हावी होने दिया तो रिश्ते में खटास आ सकती है...आगे पढ़ें

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आंशिक चंद्र ग्रहण आज, पढ़ें राशिफल

149 साल बाद गुरु पूर्णिमा के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण, सभी राशियों पर होगा इसका असर। पढ़ें 16-17 जुलाई की मध्य रात्रि में होने वाले चंद्र ग्रहण का समय, सूतक और 12 राशियों पर उसका प्रभाव।


ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण घटना होती है और इसको लेकर लोगों के मन में भी एक प्रकार की उत्सुकता देखने को मिलती है। खगोल विज्ञान के मुताबिक, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच धरती आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है और यही स्थिति चंद्र ग्रहण कहलाती है। वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि राहु और केतु जब चंद्रमा को निगल जाते हैं तो उस घटना को चंद्र ग्रहण कहते है। हालाँकि इसके पीछे समुद्र मंथन से जुड़ी एक रोचक एवं पौराणिक कथा है। यूँ तो चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण की तरह ही हर साल घटित होते हैं, जिस दौरान उनकी संख्या कभी दो होती है तो कभी तीन। अगर साल 2019 की बात करें तो इस वर्ष कुल 2 चंद्र ग्रहण घटित होने थे, जिसमें पहला पूर्ण चंद्रग्रहण 21 जनवरी को घटित हुआ था, जबकि दूसरा चंद्र ग्रहण 16 व 17 जुलाई की मध्य रात्रि में दिखाई देगा। हालांकि भारत वासियों के लिए इसे ही पहला चंद्र ग्रहण कहा जाएगा क्योंकि 21 जनवरी को घटित हुआ पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में नहीं देखा गया। जिस कारण इसका सूतक भी यहाँ मान्य नहीं था। लेकिन आज रात घटित होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में भी दृश्य होगा, जिसके चलते यहाँ ग्रहण का सूतक भी लगेगा।

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आज देश भर में गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जा रहा है। गौरतलब है कि इस चंद्र ग्रहण के सूतक की वजह से गुरु पूर्णिमा पर होने वाला हर प्रकार का पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान सूतक काल से पहले ही यानी दोपहर 3 बजकर 54 मिनट से पहले करना शुभ है। क्योंकि ये देखा गया है कि ग्रहण का सूतक लगने के बाद मूर्ति पूजा और मूर्ति को स्पर्श करना वर्जित होता है।

चंद्र ग्रहण 16-17 जुलाई 2019
समय
प्रकार
दृश्यता
25:32:35 से 28:29:50 बजे तक (भारतीय समयानुसार, 01:32:35 से 04:29:50 बजे तक)
आंशिक चंद्र ग्रहण   
भारत और अन्य एशियाई देश, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया

चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल की अवधि


यह चंद्रग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इसका सूतक और धार्मिक महत्व दोनों ही मान्य होंगे। चंद्र ग्रहण का सूतक 16 जुलाई को दोपहर 03:54 बजे से प्रारंभ होगा जो अगली सुबह 17 जुलाई, बुधवार को 04:29:50 बजे ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म हो जाएगा। चूंकि 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा भी है इसलिए पूजा संबंधी सभी धार्मिक कार्य दोपहर 03:54 बजे से पहले ही कर लें। 

चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव


इस आंशिक चंद्र ग्रहण का प्रभाव लोगों के जीवन पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा। चूँकि ये ग्रहण आषाढ़ मास में घटित हो रहा है जिसके चलते नदी और तालाबों का जल स्तर कम हो जाएगा। साथ ही देश के कई राज्यों में सूखा व अकाल पड़ने की भी आशंका बनेगी। चंद्र पर लग रहे इस ग्रहण के चलते भारत के कश्मीर और चीन से सटे राज्यों में कुछ सियासी उथल-पुथल या प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की हानि होने की आशंका है। 

यह चंद्र ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगेगा और सबसे ज्यादा इसका असर धनुमकर दोनों राशि के जातकों पर को मिलेगा। जिसके अनुसार इस ग्रहण के दौरान साफ़ तौर से इन राशि व नक्षत्र से संबंधित लोगों को सबसे अधिक कष्ट होने की संभावना होगी। हालांकि ये लोग इस संभावना से बचने के लिए हिन्दू धर्म में सुझाए गए हवन, शांति, दान और मंत्र जप आदि उपाय कर सकते हैं। अतः इस चंद्र ग्रहण से प्रभावित होने वाली राशि के सभी जातकों को विशेष रूप से चंद्र-राहु तथा शनि और गुरु बृहस्पति का जप और इन ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है। 

  • खुदरा बाज़ार पर चंद्र ग्रहण का असर

चंद्र ग्रहण मंगलवार को घटित होने से चांदी, मोती के भाव में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनेगी। वहीं सफ़ेद वस्तुएं जैसे चावल, घी और तेलवान वस्तुओं में मंदी आएगी। इसके अलावा अनाजवान व दलहन वस्तुओं में तेजी आने की सम्भावना है। 

  • ग्रहण का राशिफल 

चूँकि यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में घटित हो रहा है, जो सूर्य का नक्षत्र है इसलिए सूर्य से प्रभावित जातकों को इस ग्रहण के दौरान कष्ट पहुँच सकता है। साथ ही धनु और मकर राशि में ग्रहण पड़ने के कारण इन्हे भी सावधान रहने की ज़रूरत होगी। हालाँकि ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा।

चलिए अब जानते है इस ग्रहण का राशिफल हर राशि के अनुसार :-

मेष: इस ग्रहण के दौरान आपके पारिवारिक सुखों में कमी आएगी और परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। 

वृषभ: जीवन में किसी बात को लेकर चिंता बढ़ सकती है। जिसका सीधा असर आपके पारिवारिक जीवन पर नज़र आएगा। 

मिथुन: इस दौरान आपको विशेष तौर से विरोधियों से सावधान रहने की आवश्यकता होगी। 

कर्क: इस समय आपको वैवाहिक जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 

सिंह: चंद्र ग्रहण से आपको धन हानि होने की संभावना है। इसके आलावा आपको इस दौरान शारीरिक कष्ट होने से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

कन्या: आय की तुलना में ख़र्चा अधिक है और यह आपकी परेशानी का विषय हो सकता है।

तुला: आपके ज्यादातर हर कार्य में निपुणता आएगी और लाभ प्राप्त होगा। इसलिए आपके लिए ये ग्रहण लाभकारी साबित होगा। 

वृश्चिक: आपको अपनी नौकरी व व्यवसाय में प्रगति मिलेगी और दौरान आपको धन लाभ होने से आर्थिक स्थिरता आएगी। 

धनु: आपकी ही राशि में ग्रहण घटित होने पर आपको धन हानि होने की संभावना है। कुछ कारणों से यात्राएं करनी पड़ सकती हैं, लेकिन अगर संभव हो तो इसे अपनी टालना आपके लिए सही रहेगा। 

मकर: आपकी भी राशि में चंद्र को ग्रहण लग रहा है, इसलिए आपको वाहन सावधानी से चलाना होगा, अन्यथा चोट लगने की संभावना है। 

कुंभ: आपको इस समय धन हानि होने की संभावना है। व्यर्थ की चिंता से मानसिक तनाव बढ़ेगा। 

मीन: आपको छोटी दूरी की यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। भाई-बहनों के लिए समय अच्छा रहेगा, उनसे संबंधों में सुधार आएगा। 

सूतक के दौरान बरतनी चाहिए ये सावधानियाँ


विशेषज्ञों अनुसार, माना गया है कि ग्रहण के सूतक के दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इस साल का ये दूसरा चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ योग बना रहा है। इससे पहले यह योग वर्ष 1870 में 12 जुलाई को यानी आज से लगभग 149 साल पहले बना था। जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण हुआ था और उस समय भी केतु के साथ चंद्र भी धनु राशि में स्थित था। जबकि सूर्य, राहु के साथ मिथुन राशि में स्थित था और इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही नज़ारा दिखाई देने वाला है। अब जानते हैं सूतक काल के दौरान किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य होता है:- 

  • सूतक और ग्रहण काल के दौरान विशेष रूप से मूर्ति पूजन, मूर्ति स्पर्श और कुछ भी खाना या पीना वर्जित माना गया है। 
  • तुलसी के पौधे का स्पर्श करने से भी परहेज करें।
  • सूतक और ग्रहण काल के समय कुछ मंत्रों का जप करना विशेष लाभकारी माना गया है। 
  • सूतक काल के समय सभी गर्भवती महिलाएं काटने, छीलने या सिलने का कार्य बिल्कुल न करें।
  • हालांकि कई लोग मानते हैं कि सूतक के ये नियम असहाय,गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग, बच्चे और बीमार व्यक्ति पर यह लागू नहीं होते है।

ग्रहण के समय क्या करें या क्या न करें


विशेषज्ञों की माने तो ग्रहण से वातावरण में नकारात्मक शक्तियाँ बहुत प्रबल हो जाती हैं। जिनका सीधा बुरा असर मानव समुदाय पर देखने को मिलता है। इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के हर प्रकार के बुरे प्रभावों से बचने के लिए या इन्हे कम करने के लिए कुछ कार्य सुझाए गए हैं, जिन्हे अवश्य रूप से करना चाहिए और कुछ कार्य करने से परहेज करना चाहिए। 

  • चंद्र पर ग्रहण लगने से पहले दूध-दही और बने हुए भोजन में तुरंत तुलसी के कुछ पत्ते आवश्यक ही डाल दें। माना गया है कि ऐसा करने से इन पदार्थों पर ग्रहण का असर खत्म हो जाता है। 
  • ग्रहण से पहले ही भोजन कर लें और ग्रहण के दौरान उपवास रखें। 
  • ग्रहण के समय पूजन, भगवान की मूर्ति और तुलसी व शमी के पौधे का स्पर्श पर्ने से परहेज करें। 
  • गर्भवती स्त्रियां ग्रहण के दौरान कुछ भी धारदार वास्तु का उपयोग जैसे:- चाकू, कैंची, सुई, आदि न करें। 
  • ग्रहण के समय जितना अधिक से अधिक हो सके चंद्र मंत्र का जप करें और ईश्वर का ध्यान करें।

ग्रहण समाप्ति के बाद तुरंत करें ये काम


  • ग्रहण की समाप्ति पर तुरंत स्नान करे और भगवान की मूर्तियों को भी गंगाजल से शुद्ध करें। 
  • तुलसी व शमी के पौधे को भी गंगाजल से शुद्ध करें।
  • ग्रहण के बाद हवन और गरीबों को दान और दक्षिणा दें। 

ये देखा गया है कि ग्रहण का असर हर राशि पर पड़ता है लेकिन माना गया है कि गर्भवती स्त्री और उसके होने वाले बालक के लिए ग्रहण का प्रभाव 108 दिनों तक रहता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को इसको लेकर बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसा कहते हैं कि जो गर्भवती महिलाएं ग्रहण को नग्न आँखों से देख लेती हैं तो इसके प्रभाव से उनके शिशु को शारीरिक या मानसिक हानि हो सकती है। हालांकि आधुनिक विज्ञान में इस तथ्य का कोई आधार नहीं मिलता है। 

आशा करते हैं आंशिक चंद्र ग्रहण पर आधारित यह लेख आपको पसंद आया होगा। एस्ट्रोसेज की ओर से उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ!

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करियर काउंसलिंग में अभूतपूर्व शोध "कोग्निएस्ट्रो" - ज्योतिष और मनोविज्ञान का चमत्कार

अब बच्चों के विषयों को चुनने से जुड़ी उलझनों से छुटकारा पाएं - एस्ट्रोसेज की करियर काउंसलिंग से जुड़ी अभूतपूर्व शोध की मदद से। कुंडली और मनोविज्ञान से जाने साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स में से क्या है बच्चे के लिए सही।  पुनीत पाण्डे जी के मार्गदर्शन में ज्योतिष की अनूठी रिसर्च।
करियर का सही चुनाव हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण निर्णय होता है। लेकिन इस फैसले को लेना हमारे लिए आसान नहीं होता। इसलिए अक्सर हम अपने बच्चों के करियर और उनके भविष्य के लिए चिंतित रहते हैं। एक छात्र के लिए दसवीं के बाद की पढ़ाई उसके करियर की मजबूत नींव को रखने में अहम भूमिका अदा करती है। लेकिन अक्सर छात्र इसी पड़ाव में करियर को लेकर भ्रमित हो जाता है। इसलिए कोग्निएस्ट्रो ने ज्योतिष और मनोविज्ञान के आधार पर ऐसे सिस्टम को तैयार किया है जिससे छात्रों की करियर से जुड़ी परेशानियाँ झट से दूर हो जाएंगी।

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आंकड़ों के अनुसार देश में क़रीब 250 करियर क्षेत्र हैं लेकिन अधिकांश लोगों को बहुत कम की जानकारी होती है। इसलिए लगभग 70 फीसदी अपने-अपने क्षेत्र में काम करने वाले लोग अपनी जॉब से असंतुष्ट दिखाई देते हैं। वास्तव में यह एक बड़ी समस्या है। इसी समस्या को दूर करने के लिए कोग्निएस्ट्रो करियर परामर्श रिपोर्ट को बनाया गया है, जिसकी सहायता से छात्र अपने लिए सही करियर का चुनाव कर सकेंगे। कोग्निएस्ट्रो के साथ अपने बच्चे के भविष्य को बनाएं शानदार और करियर से जुड़ी सभी समस्याओं को कहें अलविदा।


कोग्निएस्ट्रो– करियर काउंसलिंग का एक नया स्वरूप


कोग्निएस्ट्रो का उद्देश्य लोगों की सेवा कर उनके जीवन को आसान और बेहतर बनाना है। इसी क्रम में करियर काउसलिंग रिपोर्ट के माध्यम से छात्र स्वयं के लिए या माता-पिता अपने बच्चों के लिए करियर का सही चुनाव कर उनके सुनहरे भविष्य के निर्माण में सफल रहेंगे। अगर आप पूरी ईमानदारी के साथ कोई कार्य करते हैं तो आपको उसमें आनंद आता है। यह न केवल आपकी उत्पादकता के लिए अच्छा होता है बल्कि आप अपने बेहतरीन कार्य से समाज की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और कोग्निएस्ट्रो अपनी करियर परामर्श रिपोर्ट के साथ इसी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

करियर चयन से जुड़ा हुआ कोग्निएस्ट्रो का यह एक अनूठा प्रयोग है, जिसके तहत महान मनोविश्लेषक कार्ल यंग के शोध और ज्योतिष विज्ञान की सहायता से करियर परामर्श रिपोर्ट को तैयार किया गया है। यह रिपोर्ट व्यक्ति के स्वभाव और व्यक्तित्व का सही मूल्यांकन कर यह बताती है कि आप किस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। यह रिपोर्ट मनोविज्ञान पर आधारित अन्य रिपोर्ट की अपेक्षा ज्यादा सटीक है। इस रिपोर्ट में है - 


  • करियर से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान: अब आप अपने बच्चों के करियर को लेकर सारी चिंताओं को भूल जाएंगे। कोग्निएस्ट्रो रिपोर्ट में दिया गया परामर्श आपके बच्चे की कुंडली के आधार पर दिया जाता है, जिसमें उसके व्यक्तित्व का विश्लेषण कर यह बताया जाता है उसके करियर के लिए कौन-सा विषय या स्ट्रीम उसके लिए सबसे बेहतर है। यह रिपोर्ट उनके सुनहरे भविष्य को बनाने में कारगर है।
  • सटीक करियर काउंसलिंग रिपोर्ट: करियर काउंसलिंग रिपोर्ट को कोग्निएस्ट्रो की रिसर्च टीम के द्वारा लैब में टेस्ट किया गया है जिससे यह प्रमाणित होता है कि यह रिपोर्ट अन्य साइक्लॉजिकल टेस्ट की अपेक्षा 98 फीसदी अधिक सटीक है। इस रिपोर्ट में करियर से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान और बच्चों के व्यक्तित्व के आधार पर उनके बेहतर भविष्य को बनाने के लिए महत्वपूर्ण परामर्श निहित हैं।
  • एनालिटीकल साइकॉलॉजी: प्रसिद्ध मनोविश्लेषक कार्ल यंग के शोध पर आधारित कोग्निएस्ट्रो रिपोर्ट आपके व्यक्तित्व का सही मूल्यांकन कर आपके सामने करियर के ढ़ेरों विकल्प देती है। इसमें व्यक्तित्व का मूल्यांकन रियासेक (RIASEC) मॉडल के आधार पर होता है।
  • कोग्निएस्ट्रो = संज्ञानात्मक विज्ञान + ज्योतिष : चूंकि जातक का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन उनकी कुंडली पर आधारित होगा इसलिए यह रिपोर्ट जीवन भर के लिए सटीक और वैध है। अगर उम्र या अनुभव के जरिये मनोवैज्ञानिक स्तर पर कोई परिवर्तन आया तो इसके बावजूद भी इस रिपार्ट में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। 
  • सभी वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध है यह रिपोर्ट: अगर आप इस बात को लेकर चिंतित हैं कि दसवीं के बाद आपको कौन से विषय या स्ट्रीम का चुनाव करना है या अपने करियर को लेकर परेशान हैं, तो कोग्निएस्ट्रो करियर रिपोर्ट और व्यक्तित्व परामर्श के जरिये आपको आपके लिए सबसे उपयुक्त करियर ऑपशन के बारे में जानकारी मिल जाएगी । 
  • उलझन से निश्चितता की ओर: मनोविज्ञान आधारित रिपोर्ट्स की तुलना में कोग्निएस्ट्रो कई मायने में बेहतर है क्योंकि यह आपके बच्चे के भविष्य को लेकर बताती है कि उन्हें किन विषयों का चुनाव करना चाहिए और कौन सी स्ट्रीम लेनी चाहिए। इस रिपोर्ट के जरिये आपको पता चलता है कि आपके बच्चे किन क्षेत्रों में सफलता हासिल कर सकते हैं। यह रिपोर्ट आपके दिलो-दिमाग से सारी उलझनों को दूर कर, आपके बच्चों के अनुकूल सही विषयों का चुनाव करने का बेहतर विकल्प प्रदान करती है। 


  • सटीक मूल्यांकन: कोग्निएस्ट्रो रिपोर्ट में आपके व्यक्तित्व का सटीक मूल्यांकन है। इस रिपोर्ट को पाने के लिए आपको केवल अपने जन्म की तारीख, समय, और जन्म का स्थान बताना होगा और आपको अपनी करियर और व्यक्तित्व परीक्षण रिपोर्ट जल्द ही प्राप्त हो जाएगी। 
  • छात्रों के लिए करियर और व्यक्तित्व परामर्श रिपोर्ट दसवीं कक्षा तक: अपने व्यक्तित्व मूल्यांकन के आधार पर अब आप अपने बच्चो के लिए सर्वश्रेष्ठ स्ट्रीम व विषय के साथ-साथ सही कॉलेज और करियर विकल्प चुनने का महत्वपूर्ण निर्णय भी आसानी ले सकते हैं। 


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गुरु पूर्णिमा कल, जानें क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

चंद्र ग्रहण के सूतक काल से पूर्व करें गुरु पूजन, जानें शुभ मुहूर्त व इस पर्व का धार्मिक महत्व।


आषाढ़ मास की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा पर्व देशभर में मनाया जाएगा। इस दिन विशेष तौर से गुरु व इष्ट देव की आराधना करने का विशेष महत्व होता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व जुलाई या अगस्त महीने में ही आता है। साल 2019 में गुरु पूर्णिमा पर्व 16 जुलाई को देश भर में मनाया जाएगा। इस वर्ष का ये पर्व कई मायनों में ख़ास है क्योंकि इस पर्व के दिन ही देर रात साल 2019 का दूसरा चंद्रग्रहण भी घटित होगा, इसलिए गुरु पूर्णिमा पर होने वाली हर प्रकार की पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों को ग्रहण के सूतक काल से पहले ही करना होगा। 

गुरु पूर्णिमा 2019 मुहूर्त


16 जुलाई 2019 गुरु पूर्णिमा New Delhi, India के लिए
जुलाई 16, 2019 को 
01:50:24 से पूर्णिमा आरम्भ 
जुलाई 17, 2019 को
03:10:05 पर पूर्णिमा समाप्त

विशेष: उपरोक्त मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में गुरु पूर्णिमा 2019 का मुहूर्त

विशेष: 16 जुलाई को चंद्रग्रहण का सूतक दोपहर 3 बजकर 54 मिनट पर लग जाएगा, इसलिए गुरु पूर्णिमा पर होने वाली पूजा इस समय से पहले मुहूर्त अनुसार करना ही सही होगा।

कब लगेगा 2019 का दूसरा चंद्र ग्रहण- यहाँ क्लिक कर पढ़ें 


गुरु पूर्णिमा का महत्व 


सभी धर्मों में गुरु को सबसे बड़ा दर्जा दिया गया है। हिन्दू धर्म में भी गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है, इसी कारण इस विशेष दिन पर गुरू देव के पूजन का बड़ा महत्व होता है। मान्यताओं अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन ही महाभारत के रचियता ऋषि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था, इसलिए भारत के कई राज्यों में इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन व्यास जी की पूजा का विधान है और इस दिन के महत्व को समझते हुए लोग अपने गुरु, इष्ट और आराध्य देव की पूजा इस पर्व पर करते हैं।

हिन्दू पंचांग के अनुसार अपने गुरु व इष्ट देव की पूजा और श्री व्यास जी की पूजा करने के लिए पूर्णिमा तिथि पर सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तक व्याप्त होना आवश्यक होता है। इसके अलावा यदि पूर्णिमा तिथि तीन मुहूर्त से कम हो तो इस पर्व को पहले दिन ही मनाए जाने का विधान है। 

गुरु पूर्णिमा की पूजन विधि


जिस प्रकार गुरु पूर्णिमा की पूजा के लिए सही मुहूर्त का होना अनिवार्य होता है, उसी प्रकार इसकी पूजा का सर्वश्रेष्ठ लाभ उठाने के लिए इसके पूजन विधि को सही प्रकार से किये जाना भी उतना ही महत्व है। आइये अब जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु देव को प्रसन्न करने के लिए कैसे करें पूजन:-

  • गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः काल सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। 
  • इसके बाद स्नान कर नए अथवा साफ कपड़े पहनकर अपने गुरु के पास जाएं या संभव न हो तो अपने इष्ट देव की तस्वीर को एक स्वच्छ स्थान पर रखें। 
  • इसके बाद अपने गुरु या उनकी तस्वीर को ऊँचे सुसज्जित आसन पर विराजमान कर उन्हें पुष्प माला पहनाएं और फल आदि अर्पित करें। 
  • इसके बाद अपनी श्रद्धानुसार दक्षिणा देकर पूर्ण आस्था के साथ गुरु की पूजा करें तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। 
  • इस दिन अपने गुरु (शिक्षक) के साथ-साथ जीवन का पाठ सिखाने वाले अग्रज लोग जैसे- माता-पिता, भाई-बंधु, कोई विशेष व्यक्ति आदि का भी आशीर्वाद लेकर उनका आदर-सम्मान करना चाहिए।
  • इसके बाद इस दिन ख़ास तौर से आपको अपने गुरु से गुरु मंत्र लेना चाहिए। साथ ही अपने इष्ट देव को भी गुरु के रूप में पूजना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा का पौराणिक महत्व 


हमारे पौराणिक वेदों में गुरु को त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश से भी ऊपर बताया गया है क्योंकि माना गया है कि वह गुरु ही है जो अपने शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का रास्ता दिखाता है। अगर प्राचीन काल की बात करें तो गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने वाले सभी छात्र, इसी दिन श्रद्धा व भक्ति के साथ अपने गुरु की सच्चे दिल से पूजा-अर्चना किया करते थे और यही श्रद्धा उनकी गुरु दक्षिणा होती थी। 

इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का भी बहुत महत्व है। इसके अलावा गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान कर दान-दक्षिणा का भी विधान है। इसके अलावा मंदिरों में भी इस दिन पूजा-अर्चना होती है और जगह-जगह पर भंडारे व मेले लगते हैं। विद्यालयों व अन्य शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों द्वारा गुरु को अलग-अलग प्रकार से सम्मानित किया जाता है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य की ये परंपरा सदियों से चली आ रही है। गुरु के प्रति शिष्य के इस आदर भाव को व्यक्त करने के लिए ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

आप सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं! हम आशा करते हैं कि गुरु के मार्गदर्शन से आपको ज्ञान की प्राप्ति हो और जीवन में सुख-समृद्धि आए।

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साप्ताहिक राशिफल (15 से 21 जुलाई 2019)

इस सप्ताह सूर्य की होगी मंगल संग युति, नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा, प्रेम, वैवाहिक और पारिवारिक जीवन पर होगा सीधा असर! पढ़ें 15 से 21 जुलाई का राशिफल और जाने आपके लिए कैसा रहने वाला है ये सप्ताह। 


एस्ट्रोसेज एक बार फिर आपके लिए लेकर आया है, जुलाई माह के तीसरे सप्ताह का राशिफल। इसमें आपको हम देंगे सभी 12 राशियों की संपूर्ण भविष्यवाणी, जिसकी मदद से आप अपने आने वाले 7 दिनों को बना पाएंगे और भी ख़ास। साथ ही आपको इस हफ्ते की सभी अहम भविष्यवाणियाँ भी पता चलेंगी, जिससे आपको पता लगेगा कि यह सप्ताह आपके लिए क्या कुछ ख़ास लेकर आया है। एस्ट्रोसेज के विशेषज्ञों द्वारा ज्योतिष विज्ञान की सही गणना के आधार पर तैयार किए गए हमारे इस सटीक राशिफल की मदद से आप बिना कोई धन ख़र्च किये, अपने प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, करियर, परिवार, स्वास्थ्य, आर्थिक तथा दांपत्य जीवन से जुड़ी हर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हमारे इस राशिफल में आपको आपकी राशि के अनुसार कुछ विशेष उपाय भी प्रस्तावित किये जाएंगे जिन्हे अपने जीवन में अपनाकर आप अपने जीवन में आने वाली सभी बाधाओं से निजात पा सकते हैं। 

इस सप्ताह 4 राशि वालों की चमकेगी किस्मत 


ज्योतिष विशेषज्ञों द्वारा की गई ग्रहों-नक्षत्रों की गणना से ये पता चलता है कि यह सप्ताह विशेष रूप से 4 राशि (मेष, धनु, मकर और कुम्भ) वाले जातकों के जीवन में कई बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। सितारों की दशा और दिशा भी इस ओर इशारा कर रही है कि इन राशियों के जातकों को सूर्य देव और मंगल देव जीवन में अच्छे व सकारात्मक फल देंगे, लेकिन वहीं अन्य राशि के लोगों को कुछ परेशानी दे सकते हैं। उन्हें इस हफ्ते थोड़ा सतर्क रहते हुए सूर्य और मंगल की दृष्टि से बचना होगा अन्यथा परिणाम और भी बुरे झेलने पड़ेंगे। इसके लिए वो सुझाए गए उपायों को भी अपना सकते हैं। 

इस सप्ताह का हिन्दू पंचांग एवं ज्योतिषीय तथ्य


हिन्दू पंचांग के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि से होगी और सप्ताह का अंत कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के साथ होगा। वहीं इस सप्ताह में चंद्र देव धनु राशि से होते हुए कुम्भ राशि तक अपनी गोचरीय अवस्था जारी रखेंगे। इसके अलावा इस सप्ताह 16 जुलाई, मंगलवार को गुरु-पूर्णिमा व आषाढ़ पूर्णिमा, 17 जुलाई, बुधवार को कर्क संक्रांति यानी सूर्य का कर्क राशि में गोचर और 20 जुलाई, शनिवार को संकष्टी चतुर्थी पड़ने वाली है। इसके साथ ही 16-17 जुलाई की देर रात आंशिक चंद्र ग्रहण भी घटित हो रहा है। इसके चलते भी इस सप्ताह का महत्व बढ़ जाता है। इस वर्ष का ये दूसरा चंद्र ग्रहण 16-17 जुलाई के मध्य घटित होगा जो भारत में भी दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इस ग्रहण का सूतक भी मान्य होगा। ऐसे में ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगेगा और इस ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव धनुमकर दोनों राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा।


इस सप्ताह किन ग्रहों की बदलेगी चाल?


इस सप्ताह ग्रह और नक्षत्र को देखें तो ये पता चलता है कि विशेष तौर से परिवार से दूर रह रहने वाले जातक, परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र व ट्रांसफर या पदोन्नति की चाह रखने वाले जातकों के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण सप्ताह रहने वाला है। क्योंकि इस दौरान सूर्य देव उनके जीवन में कई बड़े परिवर्तन लेकर आने वाले है। इसलिए यह सप्ताह इन लोगों के लिए बेहद प्रभावशाली रहेगा। सप्ताह की शुरुआत में जहाँ चंद्र देव धनु राशि में स्थित होंगे वहीं बाद में वो मध्य में मकर और अंत में कुम्भ राशि में गोचर करेंगे जिससे चंद्र अपना प्रभाव सबसे ज्यादा इन्ही राशि के जातकों पर दिखाएँगे। इस दौरान अलग -अलग नक्षत्रों में भी चंद्र देव का प्रभाव जातकों को देखने को मिलेगा। इसके अलावा 17 जुलाई को सूर्य देव चंद्र की राशि कर्क राशि में गोचर कर जाएंगे जहाँ पहले से मौजूद मंगल देव के साथ उनकी युति होगी। इसके अलावा उससे कुछ समय पहले ही आंशिक चंद्र ग्रहण घटित होगा। 

सूर्य का कर्क राशि में गोचर: यहाँ क्लिक कर पढ़ें

शेयर बाज़ार में इस सप्ताह


इस माह के तीसरे सप्ताह के शेयर बाज़ार को देखें तो, सोमवार, 15 जुलाई को शेयर बाज़ार के सामान्य ही रहने की उम्मीद है। हालाँकि इसके बाद बाज़ार 16 जुलाई, मंगलवार को कुछ हद तक समान्तर व हलके उतार-चढ़ाव के साथ आगे की ओर बढ़ता दिखेगा। इसके बाद 17 जुलाई को इसमें कुछ बदलाव देखे जा सकते हैं, परंतु इस समय भी शेयर बाज़ार धीमी गति से ही आगे बढ़ेगा। फिर 18 जुलाई को शेयर बाज़ार की स्थिति में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे, जिसका अच्छा असर अगले दिन 19 जुलाई को बाज़ार में व्यापार की अच्छी स्थिति के साथ देखने को मिलेगा। अगर पूरे सप्ताह की बात करें तो इस पूरे ही सप्ताह चीनी, मनोरंजन, वाहन, रसायन, सीमेंट, फार्मास्यूटिकल जैसे क्षेत्रों में स्थिति अन्य के मुकाबले बेहतर देखी जायेगी। वहीं सरकारी ऊर्जा, एफ. एम. सी. जी. और बैंकिंग से जुड़े क्षेत्रों में रुख मिला जुला ही रहेगा। जबकि तकनीकी निवेश से जुड़े सभी क्षेत्रों पर अच्छा ख़ासा दबाव बना रहेगा। अगर सोने-चाँदी की बात करें तो शुरुआत में उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी, लेकिन मध्य में मंदी का रुख नज़र आएगा। इसके बाद अंत में कुछ तेजी का रुख देखा जा सकता है। जो अगले सप्ताह तक भी बरकरार रहेगा। 


ऋतिक रोशन की ‘सुपर 30’ पर एक नज़र


ज्योतिष विज्ञान की मदद से जब हमने ये जानना चाहा कि 12 जुलाई को रिलीज हुई ऋतिक रोशन की ‘सुपर 30’ क्या वर्ष 2019 की बड़ी हिट साबित होगी। तो विश्लेषण करने पर पता चला कि 12 जुलाई के दिन चंद्रमा तुला राशि में विराजमान होंगे जो कि रितिक रोशन की ही राशि है। इस दिन का अगर पंचांग देखा जाए तो तुला राशि के लिए तारा बल अच्छी स्थिति में है और साथ ही साथ ऋतिक रोशन के जन्म नक्षत्र स्वाति के हिसाब से भी तारा बल उत्तम है। जिसके अनुसार अगर ये कहा जाए कि रितिक रोशन के लिए यह फिल्म आने वाले इस सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर और भी ज्यादा कलेक्शन कर पाएगी जो तो गलत नहीं होगा। फिल्म के नाम की अंक शास्त्र से गणना करने पर फिल्म का नामांक 6 बनता है जो शुक्र ग्रह के अधीन आने वाला अंक है। वहीं ऋतिक रोशन की कुंडली भी तुला लग्न की है जिसका स्वामी शुक्र ही है। ऐसे में यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर और ज्यादा धमाल मचाते हुए दर्शकों का दिल जीतती नज़र आएगी। 

जन्मदिन विशेष 


इस सप्ताह चर्चित हस्तिओं में से 15 जुलाई को तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज की जन्मथिति है। वहीं 17 जुलाई को भोजपुरी अभिनेता और हाल ही में बने सांसद रवि किशन, 18 जुलाई को अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, छोटे पर्दे के एक्टर रजत टोकस, और 20 जुलाई को अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का जन्मदिन है। हमारी ओर से इन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ। चलिए अब जानते हैं इस सप्ताह का राशिफल:-


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


इस सप्ताह चंद्र देव आपकी राशि से नवम, दशम और एकादश भाव में गोचर करेंगे। जिससे समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। इस दौरान लोगों के लिए आप एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत हो सकते हैं। इस दौरान लंबी दूरी की यात्रा के योग भी बन सकते हैं। यह यात्रा आपके लिए शुभ फलदायी हो सकती है। मेष राशि के छात्रों को अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त होगा। आपके बौद्धिक ज्ञान में भी वृद्धि होगी। वहीं...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- यह सप्ताह प्रेम संबंधों के लिए अनुकूल है। चंद्र ग्रह के प्रभाव से प्रेम जीवन में आपको शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी। आप अपने प्रियतम के साथ किसी ट्रिप पर जाने का प्रोग्राम बना सकते हैं। साथ ही दोनों साथ में किसी पार्टी या फिर कैंडिल लाइट डिनर पर भी...आगे पढ़ें

वृषभ


इस सप्ताह की शुरुआत में चंद्र के गोचर के चलते आपको जीवन में कुछ दुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही कुछ बातों को लेकर आपके दिमाग में शक भी बना रहेगा। इस समय आपका व्यवहार ऐसा रहेगा कि आप लोगों से बातें छुपाएंगे और बिना किसी को बताए किसी काम को अंजाम देंगे। हालांकि इसके बाद आपको कुछ शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए आपको...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- विवाहित लोगों के लिए भी सप्ताह अच्छा है, दांपत्य जीवन में संतुलन बना रहेगा। इस समय आप अपने जीवन साथी से उन बातों को साझा कर सकते हैं जो आपको परेशान कर रही हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो जिंदगी अच्छी चलती रहेगी...आगे पढ़ें

मिथुन


इस सप्ताह आपका दांपत्य जीवन अच्छा बीतेगा। यदि आप साझेदारी में कोई व्यापार कर रहे हैं तो इसमें आपको अच्छे फलों की प्राप्ति होगी। व्यापार में मुनाफ़ा होगा। पार्टनर के साथ रिश्ते बेहतर होंगे। लोगों के साथ आप सामंजस्य बिठाने में भी कामयाब होंगे। आप अपने जीवन साथी के साथ किसी ट्रिप/मनोरंजन या फिर सिनेमा देखने जा सकते हैं। इस दौरान आप अपने लाइफ पार्टनर के साथ क़ीमती समय बिताएंगे...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- यह सप्ताह प्रेम संबंधों के लिए अच्छा है। प्रियतम आपके जज्बातों को समझेगा, साथ ही आपकी परवाह भी करेगा। यदि आप सिंगल हैं तो इस सप्ताह आप किसी ऐसे शख्स से मुलाकात कर सकते हैं जो आपके दिल को भा सकता है। वहीं शादीशुदा जातकों के...आगे पढ़ें

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कर्क


इस राशि के जातकों के लिए इस सप्ताह लड़ाई-झगड़ों या कहा सुनी की स्थिति बन सकती है जिसके कारण आपको मानसिक तनाव होने की संभावना है। बेहतर होगा कि किसी भी बात पर प्रतिक्रिया देने से पहले आप स्थिति को भलीभांति जान लें। सुनी-सुनाई बातों पर यकीन न करें तो ही आपके बेहतर रहेगा। ख़र्चों में वृद्धि होने की भी संभावना है। इस समय आपको ज़रूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करना चाहिए और बेफिजूल की...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम से जुड़े मामलों में इस राशि के जातकों को उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। किसी बात को लेकर आप अपने संगी से सहमत नहीं होंगे जिसकी वजह से आप दोनों के बीच झगड़ा हो सकता है। इस कारण आप दोनों के बीच की शांति भंग हो सकती है। हालांकि...आगे पढ़ें

सिंह


इस सप्ताह सूर्य का द्वादश भाव में होना आपके लिए धन हानि के संकेतों को दर्शा रहा है। इसलिए आपको धन से जुड़े मामलों में सावधान रहना होगा। सेहत के लिहाज़ से सूर्य का गोचर आपके लिए शुभ नहीं है। लिहाज़ा इस समय आपको अपनी सेहत पर भी ध्यान देना होगा। इसके अलावा आपके वैवाहिक जीवन में ख़ुशियाँ आएँगी। आप अपने जीवन साथी की भावनाओं को समझेंगे। व्यापार में तरक्की संभव है...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- सप्ताह की शुरुआत प्रेम जीवन के लिए उत्तम नहीं है। लेकिन सप्ताहांत में आपको संतोषजनक परिणाम प्राप्त होंगे। वहीं सप्ताहांत में प्रियतम के साथ बहसबाज़ी देखने को मिल सकती है। हालाँकि आप दोनों ही मामले को सुलझाने में सक्षम होंगे। वहीं...आगे पढ़ें

कन्या


इस सप्ताह चंद्र के गोचर से आपको मानसिक शांति का अनुभव होगा। इस समय आप खुद को परेशानियों से मुक्त पाएँगे, यदि कोई परेशानी आती भी है तो उसका समाधान आप आसानी से निकाल लेंगे। आपका यह रवैया आपको समाज में भी प्रतिष्ठा दिलाएगा। आपका नाम समाज के प्रभावशाली लोगों में दर्ज होगा। आपकी माता को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए इस दौरान आपको उनका ख्याल रखने की आवश्यकता है...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम संबंधी मामलों के लिए यह सप्ताह मध्यम फलदायी रहेगा। इस समय आपको अपने अहम भाव को पीछे रखकर अपने प्रेमी से बात करने और साथ ही गलतफहमियों को दूर करने की जरुरत है। अगर आप जीवन में ताज़गी चाहते हैं तो अपने संगी के साथ कहीं घूमने का प्लान बनाएँ और...आगे पढ़ें


तुला


इस सप्ताह चंद्र देव आपकी राशि से तृतीय, चतुर्थ और पंचम भाव में स्थित होंगे। जिससे आपके साहस में वृद्धि होगी। आपका मनोबल ऊँचा होगा। आप अपनी राह में आने वाली चुनौतियों से नहीं घबराएंगे। कार्य क्षेत्र में आप अपनी बातों को बेबाकी से रखेंगे, जिसका फल आपको प्राप्त होगा। इस समय छोटे भाई-बहनों के साथ आपके रिश्ते मजबूत होंगे। ज़रुरत पड़ने पर वे आपकी सहायता करेंगे। वहीं...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- यह सप्ताह प्रेम संबंधों के लिए बड़ा ही परिवर्तनकारी हो सकता है। हालाँकि आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। प्रियतम की ओर से आपको भरपूर प्यार मिलता रहेगा। प्रियतम की ओर से आपको कोई प्यार भरा तोहफ़ा मिल सकता है। प्रेम संबंध रोमांस का स्वाद घुला रहेगा...आगे पढ़ें

वृश्चिक


इस सप्ताह आपकी वाणी में प्रखरता आएगी और आप अपनी बातों को सही तरीके से लोगों के सामने रख पाएँगे। हालांकि आवश्यकता से अधिक बोलने से इस दौरान आपको बचना चाहिए। ध्यान रखें कि कई बार शब्द बहुत दर्द भी पहुंचा जाते हैं। आपको धन की बचत करने के भी कई मौके मिल सकते हैं। अगर आप धन की बचत करने का प्रयास कर रहे हैं तो आपके प्रयास सफल हो सकती हैं। सप्ताह के...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- चंद्र का गोचर इस सप्ताह आपके द्वितीय भाव और इसके बाद तृतीय भाव में होगा जिसके चलते आपकी वाणी में मिठास रहेगी और आपका बात करने का तरीका संगी को आपकी ओर आकर्षित करेगा। आपके बात करने का अंदाज़ उन्हें मनमोहक लगेगा...आगे पढ़ें

धनु


शुरुआत में प्रथम भाव में चंद्र के गोचर के दौरान आध्यात्मिक विषयों में आपकी रुचि बढ़ेगी। इस दौरान आप आध्यत्म से जुड़ी पुस्तकों को पढ़ने में भी रुचि लेंगे। यह भी हो सकता है कि आप किसी आध्यात्मिक गुरु से मुलाकात करें। इस राशि के वो जातक जो किसी लंबी बीमारी से परेशान थे उन्हें भी इस समय आराम मिल सकता है। इसके बाद आपकी वाकक्षमता दुरुस्त होगी। आप खुद को अच्छी तरह से व्यक्त कर पाने में...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- धनु राशि के जातकों को इस सप्ताह प्यार में सफलता मिलेगी। चंद्र के द्वितीय और तृतीय भाव में गोचर के चलते आपके बात करने का लहेजा सुधरेगा। अगर आपके संगी और आपके बीच कोई ग़लतफहमी बनी थी तो इस समय आप उन गलतफहमियों को दूर कर सकते हैं...आगे पढ़ें

मकर


इस सप्ताह आपको मानसिक तनाव होने की संभावना है। यहां तक कि छोटे-छोटे झगड़े भी आपको परेशान कर देंगे। इस समय आप आवश्यकता से ज्यादा सोच विचार करेंगे। इस समय अपने मन पर काबू पाने के लिए आपको ध्यान योग करने की जरुरत है। इस दौरान आप लंबी दूरी की यात्रा भी कर सकते हैं। यह यात्रा काम से संबंधित भी हो सकती है और निजी भी। आपको यह यात्रा शुरुआत में अच्छी नहीं लगेगी लेकिन...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- शादीशुदा जातक इस सप्ताह किसी वजह से आप दोनों के बीच ग़लतफ़हमियाँ पनप सकती हैं। हो सकता है कि इस दौरान आप दोनों के बीच छोटे-छोटे झगड़े हों। हालांकि इन झगड़ों से आप दोनों के बीच दरार नहीं पड़ेगी, साथ ही आप...आगे पढ़ें

कुंभ


इस सप्ताह सूर्य देव का गोचर आपकी राशि से षष्ठम भाव में होगा। इस दौरान आपको थोड़ा संभल कर चलने की आवश्यकता है। आपके शत्रु इस समय आपके खिलाफ साज़िश कर सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर भी सचेत रहें इस समय आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी नहीं रहेगी। सरकारी कामों में सफलता मिलने के योग हैं। इस समय घर के लोगों का एक दूसरे के साथ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा और ...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम संबंधों के लिए यह सप्ताह सामान्य रहेगा। इस राशि के वो जातक जो अब तक सिंगल हैं उन्हें अपने जोड़ीदार का अभी और इंतजार करना पड़ेगा। वहीं इस राशि के जो जातक पहले से ही प्रेम संबंधों में पड़े हैं उन्हें अपने जोड़ीदार का अच्छा साथ मिलेगा जिससे संतुष्टि...आगे पढ़ें

मीन


इस सप्ताह चंद्र के गोचर से आपके दशम, एकादश और द्वादश भाव सक्रिय अवस्था में रहेंगे जिससे आपको कार्य क्षेत्र में अच्छे फल मिलने की पूरी उम्मीद है इस समय काम करने की आपकी गति काफी अच्छी रहेगी। आप मिले हुए काम को समय पर खत्म कर पाने में इस दौरान सक्षम होंगे। सप्ताह की शुरुआत में आप जीवन में आ रही परेशानियों को दूर कर पाने में सक्षम होंगे और आपके जीवन को...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम संबंधों के लिए यह सप्ताह अच्छा नहीं कहा जा सकता। विवाहित जातकों की जिंदगी में भी परेशानियां आ सकती हैं। छोटे-छोटे झगड़े आपकी मानसिक शांति को भंग कर सकते हैं। ऐसा हो सकता है कि इस दौरान आपका जीवन साथी आपकी बातों को न समझ पाए और...आगे पढ़ें

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देवशयनी एकादशी आज, जानें पूजा मुहूर्त और विधि

चातुर्मास हुआ प्रारंभ, आज से भूलकर भी न करें कोई शुभ काम! पढ़ें देवशयनी एकादशी 2019 व्रत का महत्व, पूजा विधि और मुहूर्त।


हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसे अलग-अलग राज्यों में आषाढ़ी, पद्मनाभा और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। अगर अंग्रेजी कैलेंडर की बात करें तो उसके अनुसार यह एकादशी हर वर्ष जून या जुलाई के माह में आती है, इस साल 2019 में देवशयनी एकादशी देशभर में 12 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जा रही है। 

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह वही विशेष दिन होता है जब भगवान श्री विष्णु क्षीर सागर में शयन करने जाते है और जहाँ वो लगभग चार माह की अवधि के बाद, जब सूर्य, तुला राशि में प्रवेश करता है, तो उन्हें उस काल में उठाया जाता है। शयन से उठाने वाले दिन को देवउठनी एकादशी कहते हैं। ऐसे में भगवान श्री विष्णु के इस 4 माह तक चलने वाले निद्रा काल को सनातन धर्म में चातुर्मास कहा जाता है। पद्मपुराण में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि, जो मनुष्य मोक्ष की कामना रखता है उसे देवशयनी और देवउठनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।


आषाढ़ी या देवशयनी एकादशी 2019 
आषाढ़ी एकादशी पारणा मुहूर्त :
06:32:03 से 08:17:48 तक 13, जुलाई को
अवधि :
1 घंटे 45 मिनट
हरि वासर समाप्त होने का समय :
06:32:03 पर 13, जुलाई को

विशेष: उपरोक्त मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में देवशयनी एकादशी व्रत का मुहूर्त

चातुर्मास 


चूँकि आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी से ही भगवान विष्णु शयन करने चले जाते हैं और इसके बाद सीधा कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी पर निद्रा से जगते हैं। ऐसे में भगवान विष्णु के शयन के इन 4 महीनों को हिन्दू धर्म में चातुर्मास कहा गया है। हिन्दू मान्यताओं अनुसार, इस अवधि में जब भगवान सो जाते हैं तो मनुष्य को अनेक शुभ कार्य जैसे- विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार आदि नहीं करने चाहिए। अगर कोई इस काल में कोई भी शुभ कार्य करता है तो उन्हें उन कार्यों में भगवान का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है। वहीं ये भी देखा गया है कि इन महीनों में बारिश और बादलों के कारण सूर्य-चंद्रमा का तेज भी कम हो जाता है, जिसके कारण उनका आशीर्वाद भी व्यक्ति को उस कार्य में प्राप्त नहीं हो पाता है। 


देवशयनी एकादशी या आषाढ़ी एकादशी व्रत का महत्व


ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार इस एकादशी का विशेष महत्व होता है। क्योंकि माना गया है कि इस विशेष व्रत को करने से कोई भी व्यक्ति न केवल अपनी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण कर सकता है बल्कि वो ऐसा करके अपने सभी प्रकार के पापों को भी नष्ट कर सकता है। इस व्रत के प्रभाव से व्रती को सीधे तौर पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व और विधान बताया गया है। 

देवशयनी एकादशी की सही पूजा विधि


जिस प्रकार देवशयनी एकादशी के दिन व्रत करने का एक शुभ मुहूर्त होता है उसी प्रकार इस व्रत से शुभ लाभ प्राप्त करने के लिए इसकी सही पूजा विधि करने का भी विधान बताया गया है। इस व्रत को करने की सही पूजा विधि इस प्रकार है:-

  • इस विशेष दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करने चाहिए। 
  • इस दिन विशेष तौर पर पवित्र नदियों में भी स्‍नान करने का विशेष महत्‍व बताया गया है। 
  • यदि किसी कारण वश ऐसा कर पाना संभव न हो तो आप गंगाजल से घर में छिड़काव कर स्वयं को शुद्ध करके भी पूजा शुरू कर सकते हैं। 
  • इसके पश्चात घर के मंदिर में भगवान विष्‍णु की मूर्ति स्थापित कर सच्चे हृदय से उसका पूजन करें। 
  • फिर पूजा के बाद व्रत की संपूर्ण कथा सुनें और इसके बाद आरती कर प्रसाद बांटें। 

चातुर्मास में किन विशेष बातों का रखना चाहिए ध्यान


हिन्दू धर्म में 4 माह तक चलने वाले चातुर्मास की इस अवधि में कई शुभ कार्यों के अतिरिक्त कुछ अन्य कामों को करना भी वर्जित माना गया हैं। आइये जानते हैं इस माह क्या करें और क्या नहीं:-

  • अगर अच्छी वाणी और मधुर स्वर चाहते हैं तो इस अवधि में गुड़ का सेवन न करें।
  • लंबी आयु व संतान की प्राप्ति हेतु किसी भी तरह तेल का इस्तेमाल न करें।
  • अपने वंश की वृद्धि के लिए नियमित रूप से इस अवधि काल में दूध का सेवन करें।
  • सब्जियों में ख़ास तौर से शहद, मूली, परवल और बैंगन खाने से परहेज करें।
  • फर्श पर ही सोए, बिस्तर का त्याग करें।
  • हर प्रकार की नमकीन या मसालेदार भोजन का परहेज करें।

पौराणिक कथा से जाने आखिर क्‍यों चार महीने के लिए सो जाते हैं भगवान विष्णु ?


वामन पुराण के अनुसार, पौराणिक काल में असुरों के राजा बलि ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। ऐसे में राजा बलि के अहंकार को देखकर स्वयं इंद्र देव भी घबरा गए थे जिसके बाद इस समस्या से निजात पाने के लिए वो भगवान विष्‍णु के पास मदद की गुहार लेकर गए। सभी देवताओं की पुकार सुनकर भगवान श्री विष्‍णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने उसके महल पहुंचे। वामन रूपी भगवान विष्णु ने बलि से तीन पग भूमि भिक्षा में मांगी। पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं थी तो राजा बलि ने कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दें। 

जिसके बाद भगवान वामन ने ऐसा ही किया और इस तरह देवताओं को इस समस्या से निजात मिली। वहीं भगवान विष्णु भी राजा बलि के इस दान-धर्म से बहुत खुश हुए और उन्होंने उनके इस दान-पुण्य को देख राजा बलि से एक वरदान मांगने को कहा। जिस पर बलि ने उनसे पाताल में बसने का वरदान मांग लिया। बलि की इच्‍छा पूर्ति करने के लिए भगवान पाताल में बसने हेतु चले गए। ऐसे में भगवान विष्‍णु के पाताल जाने के बाद सभी स्वर्ग के देवतागण और माता लक्ष्‍मी चिंतित हो गईं। 

माता लक्ष्मी ने अपने पति भगवान विष्‍णु को स्वर्ग में वापस लाने के लिए गरीब स्‍त्री का रूप धारण किया और राजा बलि के पास पहुंची। जिसके बाद उन्होंने राजा बलि को अपना भाई बनाकर उन्हें राखी बांध दी। जिसके बदले उन्होंने राजा से भगवान विष्‍णु को पाताल लोक से वापस ले जाने का वचन ले लिया। ऐसे में पाताल से वापस स्वर्ग जाते समय भगवान विष्‍णु ने राजा बलि को एक वरदान दिया कि वह आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्‍ल पक्ष की एकादशी तक पाताल लोक में ही वास करेंगे। पाताल लोक में उनके रहने की इस अवधि को ही योगनिद्रा माना जाता है, जिस कारण इन 4 माह कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना गया। 

हम आशा करते हैं कि देवशयनी एकादशी पर आधारित हमारा ये लेख आपके लिए उपयोगी साबित। एस्ट्रोसेज की ओर से आप सभी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ!

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