भाई दूज पर चित्रगुप्त की ये पूजा-विधि करेगी आपके भाई को अमर

जानें भाई दूज के लिए तिलक का शुभ मुहूर्त जिसके अनुसार पूजा करने से भाई को मिलेगी सफलता और समृद्धि
दीपावली महापर्व का अंतिम पर्व ‘भाई दूज’ है, इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि सूर्य पुत्र यम ने इस दिन अपनी बहन यमुना के घर जाकर भोजन किया और उन्हें उपहार उपहार दिये। यमुना ने अपने भाई यम को तिलक किया, तब ही से यह त्यौहार यम द्वितीया व भाई दूज के नाम से मनाया जाने लगा। वहीं इस दिन चित्रगुप्त जी पूजा भी की जाती है।
भाई दूज पूजा मुहूर्त 2018
भाई दूज तिलक का समय
13:10:02 से 15:20:30 बजे तक
अवधि
2 घंटे 10 मिनट
सूचना: उपरोक्त मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में भाई दूज का मुहूर्त


भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में भाई दूज पर्व को भाई को भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया आदि नामों से मनाया जाता है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना करती है। वहीं भाई शगुन के रूप में बहन को उपहार भेंट करता है।

भाई दूज से संबंधित परंपरा और पूजा विधि


  • इस दिन भाई के तिलक के लिए थाली सजाएं। इसमें पुष्प, कुमकुम और चावल आदि रखें।
  • एक निश्चित स्थान पर चावल के मिश्रण से चौक बनाएं और उस पर भाई को बिठाएं।
  • इसके बाद शुभ मुहूर्त में भाई का तिलक करें और उन्हें मिठाई खिलाएं।


चित्रगुप्त पूजा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी ने देवताओं के यज्ञोपवीत के अवसर पर चित्रगुप्त जी को वरदान दिया था कि जो व्यक्ति कार्तिक शुक्ल द्वितीया को चित्रगुप्त जी व उनकी कलम-दवात की पूजा करेगा, उस व्यक्ति को वैकुण्ठ की प्राप्ति होगी। तभी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन चित्रगुप्त जी व उनकी कलम और दवात की पूजा की जाती है। 

भाई दूज पर्व की पौराणिक कथा और महत्व

  • यम और यामि की कथा: यम और यमी सूर्य देव के पुत्र और पुत्री थे। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। इस अवसर पर यमुना ने भाई यमराज को भोजन कराया और उनका तिलक किया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने यमी को वचन दिया कि, जो भी बहन इस दिन अपने भाई का तिलक करेगी उसे मेरा भय नहीं होगा। इसी दिन से भाई दूज पर्व की शुरुआत हुई, जिसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन यमुना नदी में स्नान का बड़ा महत्व है। जो भाई-बहन भाई दूज पर यमुना नदी में स्नान करते हैं उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है। 
  • कृष्ण और सुभद्रा: एक अन्य मत के अनुसार भाई दूज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण राक्षस नरकासुर का वध करके द्वारिका लौटे थे। इस खुशी में उनकी बहन सुभद्रा ने अनेकों दीये जलाकर उनका स्वागत किया था और भगवान श्री कृष्ण के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की थी।

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को भाई दूज पर्व की शुभकामनाएँ!

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