राहु का मिथुन राशि में गोचर है इन बड़े बदलावों का संकेत

सावधान! राहु का मिथुन राशि में गोचर इन राशि के जातकों के लिए होगा संकटकारी, देखें परिणााम 

राहु को वैदिक ज्योतिष में छाया ग्रह माना गया है। अर्थात इस ग्रह का अपना कोई अपना वास्तविक रूप नहीं है। इसके साथ ही राहु को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। हालाँकि यह जिस राशि में होता है उस राशि के स्वामी तथा अन्य ग्रहों के साथ युति एवं दृष्टि के अनुसार ही फल देता है। राहु आद्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह मिथुन या फिर वृषभ राशि में उच्च का होता है। सरल शब्दों में कहें तो यह इन राशियों में बलवान होता है। जबकि वृश्चिक या फिर धनु राशि में नीच का अर्थात पीड़ित या कमज़ोर होता है।


राहु ग्रह भौतिक इच्छाओं और मोह माया का कारक है। इसलिए यह जातकों को इसी ओर ले जाता है। अगर यह किसी जातक की कुंडली में बलवान हो तो उसे प्रसिद्धि, राजनीति में सफलता, गौरव आदि दिलाता है। वहीं दूसरी ओर, पीड़ित होने पर यह उस जातक के जीवन में स्वास्थ्य समस्याएं, दुर्घटनाएँ एवं अन्य प्रकार की परेशानियों को लेकर आता है। सामान्य रूप से एक राशि से दूसरी में राहु का गोचर 18 माह तक रहता है।

राहु के इस गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग प्रकार से पड़ेगा। किसी राशि के लिए यह अच्छा होगा तो किसी राशि के लिए संकट पैदा करेगा। उदाहरण के लिए मेष, सिंह एवं मकर राशि के जातकों को गोचर के दौरान शानदार परिणामों की प्राप्ति होगी। इसके विपरीत कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ और मीन राशि के जातकों को गोचर के दौरान उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। राहु के दोषों से बचने के लिए जातकों को गोमेद रत्न को चाँदी की अंगूठी में जड़वाकर मध्यिका उंगली में पहनना चाहिए। साथ ही इसके नकारात्मक प्रभावों में बचने के लिए जातक नागरमोथा की जड़ी या फिर आठ मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं। 

भारत में राहु गोचर का प्रभाव


वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, भारत की कुंडली में राहु ग्रह गोचर के दौरान दूसरे भाव में स्थित होगा जो मंगल ग्रह के साथ युति बनाएगा। क्योंकि इस भाव में मंगल पहले से ही विराजमान है। दोनों की युति से कुंडली में अंगारक योग का निर्माण होगा जो आग में घी डालने जैसा प्रभावकारी होगा। अर्थात इस योग के कारण जातक हिंसक, दुष्ट, अराजकतावादी एवं अति स्वार्थी हो जाता है। इसलिए यह अनुमान है कि राहु के मिथुन राशि में गोचर से भारत में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

भारत-पाक पर गोचर का असर 


जैसा कि हम जानते हैं कि पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और राहु के गोचर का प्रभाव इस तनावपूर्ण माहौल को और भी बढ़ा सकता है। इसके अतिरिक्त राहु के प्रभाव से भारतीय नेता इस मामले को लेकर राजनीति कर सकते हैं। वहीं देश के संवेदनशील हिस्सों में विरोध, हिंसा आदि की घटनाएँ भी हो सकती है।

लोकसभा चुनावों में दिखेगा बड़ा असर 


यदि राहु और मंगल अथवा इनमें से कोई भी एक ग्रह किसी राशि में मजबूत स्थिति में बैठे हों तो यह उस जातकों को मंगलकारी परिणाम देंगे। इनके प्रभाव से जातक न्याय संगत और सहयोगी होंगे। इसलिए भारत में ऐसे लोग भी एकजुट होंगे जो कि हिंसा और अराजकता का विरोध करेंगे। वे उन नेताओं की निंदा करेंगे जो देश की एकता और सौहार्दपूर्ण वातावरण के खिलाफ होंगे। इस दौरान भारत में लोकसभा चुनाव 2019 का अप्रत्याशित परिणाम भी देखने को मिलेगा। यह गोचर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। चूंकि राहु का गोचर भारत के धन भाव में होगा जिससे भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और यहाँ विदेशी निवेश आएगा।

गोचर का समय


ज्योतिषीय गणना के आधार पर, राहु ग्रह 7 मार्च 2019 को प्रातः 5 बजकर 30 मिनट में मिथुन राशि में गोचर कर चुका है। इस गोचर की अवधि 23 सितंबर 2020 तक रहेगी। यानि कि इसके पश्चात राहु मिथुन राशि से वृषभ में गोचर करेगा। राहु गोचर 2019 का प्रभाव सभी 12 राशियों पर कुछ इस तरह से पड़ेगा...


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मेष


राहु आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में तीसरा भाव पराक्रम के साथ-साथ सहजता का भाव होता है। राहु के तीसरे भाव में स्थिति आपके लिए शुभ संकेत की ओर इशारा कर रही है इसलिए गोचर की अवधि में आपको नौकरी में सफलता….आगे पढ़ें

वृषभ


राहु आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर करेगा। कुंडली में दूसरा भाव जीवन में धन की विवेचना करता है। इस भाव में राहु का स्थित होना आपके लिए कष्टकारी हो सकता है। इस दौरान आर्थिक क्षेत्र में आपको….आगे पढ़ें

मिथुन


राहु आपकी राशि में प्रवेश करेगा और यह आपके लग्न भाव में स्थित होगा। ज्योतिष के अनुसार लग्न भाव हमारे जन्म का भाव होता है। इस भाव में राहु का स्थित होना आपके लिए अनुकूल नहीं है। इस अवधि में आपको संभलकर….आगे पढ़ें


कर्क


राहु आपकी राशि से बारहवें भाव में संचरण करेगा। कुंडली में यह भाव व्यय का होता है इसलिए राहु के इस भाव में होने से आपके ख़र्चों में अधिक वृद्धि होगी। इस अवधि में आपके बेवजह के ख़र्चों की संख्या बढ़ जाएगा। हालाँकि गोचर के दौरान आप किसी विदेश यात्रा पर जा सकते हैं। राहु के प्रभाव से….आगे पढ़ें



सिंह


राहु आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में जाएगा। कुंडली में यह भाव इनकम और लाभ का भाव होता है। इस भाव में राहु की स्थिति आपके लिए सुखद परिणाम कारक रहेगी। आपके जीवन में ख़ुशियाँ आएंगी। करियर में न केवल ग्रोथ बल्कि….आगे पढ़ें

कन्या


राहु आपकी राशि से दसवें भाव में गोचर करेगा। कुंडली में यह भाव कर्म एवं पद-प्रतिष्ठा का भाव होता है। इस भाव में राहु का स्थित होना आपके लिए शुभ संकेत नहीं है। हालाँकि आर्थिक क्षेत्र में आपको इस गोचर का फायदा होगा। आपके धन की बचत होगी….आगे पढ़ें


तुला


राहु आपकी राशि से नौवें भाव में गोचर करेगा। कुंडली में नौवां भाव भाग्य और धर्म के बारे में बताता है। इस भाव में राहु की स्थिति आपके लिए अनुकूल नहीं है। इस दौरान आपके भाग्य का सितारा नहीं चमकेगा और….आगे पढ़ें

वृश्चिक


राहु आपकी राशि से आठवें भाव में प्रवेश करेगा। कुंडली में आठवां भाव आयु का भाव होता है। राहु के इस भाव में उपस्थिति आपके लिए अनुकूल नहीं है। वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों का ध्यान रखें अथवा तेज़ गति या फिर नशे आदि वाहन न चलाएं, अन्यथा….आगे पढ़ें

धनु


राहु आपकी राशि से सातवें भाव में संचरण करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में सातवां भाव वैवाहिक जीवन की विवेचना करता है। राहु का इस भाव में होना आपके लिए अच्छे संकेत नहीं है। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ रिश्तों में खटास आने की संभावना है। इस परिस्थिति से बचने के लिए….आगे पढ़ें

मकर


राहु आपकी राशि से छठे भाव में गोचर करेगा। कुंडली में छठा भाव रोग, भय और क्षति का होता है। राहु के इस भाव में होना आपके लिए अच्छा है। इस दौरान आपको शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी। जीवन में ख़ुशियों का आगमन होगा….आगे पढ़ें

कुंभ


राहु आपकी राशि से पाँचवे भाव में जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में पाँचवा भाव बुद्धि, विद्या एवं संतान को दर्शाता है। राहु ग्रह के इस भाव में उपस्थिति आपके लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है। इस दौरान आपको आर्थिक क्षेत्र में आपको नुकसान हो सकता है….आगे पढ़ें

मीन


राहु आपकी राशि से चौथे भाव में संचरण करेगा। कुंडली में चौथा भाव माता, सुख, वृद्धि और बंधु के संबंध को बताता है। राहु के इस भाव में होना आपके लिए कष्टकारी हो सकता है….आगे पढ़ें

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