पितृपक्ष कल से होंगे प्रारंभ, जानें श्राद्ध की तिथि

पढ़ें पिंड दान का महत्व और पूजा विधि! 24 सितंबर से शुरू हो रहे हैं पितृपक्ष, जानें इन दिनों में पितरों की आत्म शांति के लिए किये जाने वाले उपाय। 


Click here to read in English

हिन्दू धर्म में माता-पिता और पूर्वजों को देवता का दर्जा दिया गया है और उनकी सेवा से बढ़कर कोई और दूसरी सेवा नहीं है। श्राद्ध का तात्पर्य पितरों के प्रति प्रकट की जाने वाली श्रद्धा से है। पितरों की आत्म शांति के लिए शास्त्रों में श्राद्ध यानि पितृ पक्ष का बड़ा महत्व है। वैसे तो हर माह की अमावस्या पर पितरों को तर्पण किया जाता है लेकिन पितृ पक्ष का समय पूरी तरह से पितरों को समर्पित है। भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं। इस अवधि में हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दान, धर्म, हवन और पूजा-पाठ करते हैं। 

इस वर्ष पितृ पक्ष 24 सितंबर से प्रारंभ होकर 8 अक्टूबर को समाप्त होंगे

मान्यता है कि इन 16 दिनों में केवल पितरों की आराधना करनी चाहिए। इससे पितरों को शांति और सद्गति मिलती है और वे प्रसन्न होकर सुखी जीवन का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

पितृ पक्ष में पिंड दान का महत्व और विधि


ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार दिवंगत पितरों के परिवार में सबसे बड़ा पुत्र या सबसे छोटा पुत्र और अगर पुत्र न हो तो भांजा, भतीजा, नाती पिंडदान कर सकते हैं। 

  • श्राद्ध में तीन कार्य मुख्य रूप से किये जाते हैं, पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज। दक्षिणा दिशा की ओर मुख करके आचमन कर अपने जनेऊ को दाएं कंधे पर रखकर चावल, गाय का दूध, घी, शक्कर एवं शहद को मिलाकर बने पिंडों को श्रद्धा के साथ अपने पितरों को अर्पित करना पिंडदान कहलाता है। 
  • जल में काले तिल, जौ, कुशा यानि हरी घास एवं सफेद फूल मिलाकर उससे विधिपूर्वक तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि इससे पितृ तृप्त होते हैं। इसके बाद ब्राह्मण भोज कराया जाता है। 
  • पितरों का तर्पण गया, प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन जैसी धार्मिक नगरी में जाकर करें या फिर अपने घर पर ही करें। 
  • शास्त्रों में कहा गया है कि इन दिनों में आपके पूर्वज किसी भी रूप में आपके द्वार पर आ सकते हैं इसलिए घर आए किसी भी व्यक्ति का निरादर नहीं करें।
  • पितृ पक्ष के दौरान ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें और मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें।

श्राद्ध में किये जाने वाले 10 प्रकार के दान का महत्व


श्राद्ध पक्ष में 10 तरह के दान-पुण्य करने से पितरों को परम शांति मिलती है। इनमें गाय, भूमि, वस्त्र, काले तिल, सोना, घी, गुड़, धान, चांदी और नमक आदि का दान करना चाहिए। इसके अतिरिक्त पितृ पक्ष में मूक जानवरों को भी भोजन कराना चाहिए।


पितरों का श्राद्ध कैसे करें?


पितृ पक्ष परंपरा के अनुसार दिवंगत परिजनों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि पर किया जाना चाहिए। यदि किसी परिजन की मृत्यु सप्तमी को हुई हो तो, उनका श्राद्ध सप्तमी के दिन किया जाता है। ठीक इसी प्रकार अन्य तिथियों में किया जाता है। इसके अतिरिक्त कुछ विशेष मान्यताएं भी हैं जो इस प्रकार हैं:

  • पिता का श्राद्ध अष्टमी और माता का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है।
  • परिवार में जिन परिजनों की अकाल मृत्यु हुई है यानि किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण हुई है। उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है।
  • साधु और संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है।
  • जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद नहीं हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाना चाहिए। इस दिन को सर्व पितृ श्राद्ध कहा जाता है। 
हम आशा करते हैं कि पितृ पक्ष पर आधारित यह लेख आपको पसंद आया होगा।

Read More »

अनंत चतुर्दशी कल, जानें पूजा मुहूर्त

पढ़ें भगवान विष्णु के “अनंत” रूप की पूजा का महत्व! 23 सितंबर 2018 को मनाया जाएगा अनंत चतुर्दशी का पर्व, जानें इस व्रत की पूजा विधि।


Click here to read in English

अनंत चतुर्दशी जिसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है, यह हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला एक पर्व है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुदर्श मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 23 सितंबर रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित की गईं गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है। हालांकि गणेश स्थापना 3, 5 और 7 दिन के लिए भी की जाती है। उत्तर और मध्य भारत में अनंत चतुर्दशी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त 2018
पूजा का समय06:09:42 से 7:19:37 24 सितंबर तक
अवधि25 घंटे 9 मिनट

सूचना: उपरोक्त मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर के अनुसार अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी का महत्व


हिन्दू धर्म में व्रत, पर्व और त्यौहार का विशेष महत्व है। हर साल कई व्रत और त्यौहार मनाये जाते हैं। इन्हीं में से एक है अनंत चतुर्दशी का पर्व। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। यह पूजन दोपहर में संपन्न होता है। इस दिन प्रात:काल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है और कलश स्थापना की जाती है। अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा के महत्व का वर्णन मिलता है। इस दिन पूजन के बाद अनंत सूत्र बांधने का बड़ा महत्व है। ये अनंत सूत्र कपास या रेशम के धागे से बने होते हैं और पूजा के बाद इन्हें हाथ पर बांधा जाता है। मान्यता है कि अनंत सूत्र बांधने से भगवान ‘अनंत’ हमारी रक्षा करते हैं और सांसारिक वैभव प्रदान करते हैं। अनंत चतुर्दशी पर सुख-समृद्धि और संतान की कामना से व्रत भी रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की लोक कथाएं सुनी जाती हैं। 



अनंत चतुर्दशी पर्व की पौराणिक कथा


ऐसा माना जाता है कि अनंत चतुर्दशी पर्व और व्रत की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। जब पांडव पुत्र राज्य हारकर वनवास काट रहे थे, उस समय भगवान श्री कृष्ण ने वन में उन्हें अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन सुनाया था। कहते हैं कि सृष्टि के आरंभ में 14 लोकों की रक्षा और पालन के लिए भगवान विष्णु चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, इससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है।

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को अनंत चतुर्दशी पर्व की शुभकामनाएँ!

Read More »

बुध का कन्या राशि में गोचर कल, जानें प्रभाव

6 राशि वालों पर होगा बड़ा असर! पढ़ें बुध के कन्या राशि में होने वाले गोचर का ज्योतिषीय प्रभाव।


बुद्धि, वाणी और चेतना का कारक कहा जाने वाला बुध ग्रह 19 सितंबर 2018, बुधवार को कन्या राशि में गोचर कर रहा है। बुध ग्रह सुबह 4:23 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेगा और 6 अक्टूबर 2018, शनिवार दोपहर 12:51 तक इसी राशि में स्थित रहेगा। 

बुध कन्या राशि में आकर सूर्य के साथ एक राशि संबंध बनाएगा। इन पर शनि की विशेष दृष्टि रहेगी। इस ज्योतिषीय समीकरण की वजह से गेहूं, शक्कर और बैंकिंग शेयर में तेजी देखने को मिलेगी। 


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


मेष राशि के जातकों की आर्थिक स्थिति में मजबूती देखने को मिलेगी, साथ ही धन लाभ होने के योग भी बनेंगे...आगे पढ़ें

वृषभ


बुध का यह गोचर आपके लिए ज्यादा अनुकूल सिद्ध नहीं होगा। पारिवारिक और व्यावसायिक जीवन में भी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है...आगे पढ़ें

मिथुन


बुध का यह गोचर मिथुन राशि के जातकों के लिए आर्थिक रूप से बहुत अच्छा रहने की संभावना व्यक्त कर रहा है। इस दौरान आप धन की बचत करने में सफल रहेंगे...आगे पढ़ें

कर्क


आपके साहस में कमी आने की संभावना है, साथ ही किसी बात को लेकर आपके मन में एक अनजान सा भय बना रह सकता है...आगे पढ़ें

सिंह


बुध का यह गोचर सिंह राशि वाले जातकों के जीवन में खुशियों के नये रंग भर देगा। इस दौरान आप अपने परिजनों के साथ बेहतरीन पल बिताएंगे...आगे पढ़ें

कन्या


बुध का प्रथम भाव में स्थित होना आपके लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस दौरान आपको कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ेगा...आगे पढ़ें


तुला


आर्थिक दृष्टि से बुध की यह स्थिति बेहतर नहीं कही जा सकती है, अतः इस अवधि में धन का लेन-देन और निवेश सोच-समझकर करें...आगे पढ़ें

वृश्चिक


एकादश भाव में बुध की उपस्थिति कई सौगात लेकर आएगी। क्योंकि एकादश भाव को ज्योतिष में लाभ और आमदनी का भाव कहा जाता है...आगे पढ़ें

धनु


दसवें भाव में बुध की उपस्थिति एक शुभ संकेत देते हुए नज़र आ रही है। इस अवधि में कार्यक्षेत्र में आपको शुभ समाचार मिलेंगे...आगे पढ़ें

मकर


इस अवधि में आपको कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अत्यधिक परेशानी की वजह से मानसिक तनाव भी रहेगा...आगे पढ़ें

कुंभ


विशेष रूप से आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्र में मुनाफा होने की संभावना प्रबल होगी। आपको अपनी कड़े परिश्रम का फल सफलता के रूप में मिलेगा...आगे पढ़ें

मीन


इस दौरान आप शारीरिक रूप से स्वयं को कमजोर महसूस करेंगे। सेहत संबंधी समस्याओं से परेशानी हो सकती है...आगे पढ़ें


Read More »

साप्ताहिक राशिफल- 17 से 23 सितंबर 2018

इस सप्ताह की बड़ी भविष्यवाणियाँ! पढ़ें साप्ताहिक राशिफल और जानें नौकरी, व्यापार, शिक्षा, परिवार और वैवाहिक जीवन आदि के लिए कैसा रहेगा यह सप्ताह?


यह सप्ताह कर्क, कन्या, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए मंगलकारी रहने वाला है। क्योंकि इस अवधि में इन राशि के जातक प्रसन्न और आर्थिक रूप से समृद्ध रहेंगे। छोटी-मोटी परेशानियों को छोड़ दें तो अन्य राशि के जातकों के लिए भी यह सप्ताह लाभकारी सिद्ध होगा। इस सप्ताह 17 सितंबर को सूर्य राशि परिवर्तन करते हुए सिंह से कन्या राशि में प्रवेश करेगा। वहीं 19 सितंबर को बुध भी कन्या राशि में गोचर करेगा। इन दोनों ज्योतिषीय घटनाक्रमों की वजह से शक्कर, तेल, चाँदी और बैंकिंग शेयर्स में तेजी के योग देखने को मिलेंगे। 

इस सप्ताह 17 सितंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। जानें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली के अनुसार आने वाला समय उनके लिए कैसा होगा? क्या नरेंद्र मोदी 2014 की तरह दोबारा प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में बीजेपी की सरकार बनाने में कामयाब होंगे?


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


इस सप्ताह आप किसी सुदूर यात्रा पर जा सकते हैं लेकिन यात्रा पर जाने से पहले पूरी तैयारी से जाएं ताकि आपको वहां पर किसी प्रकार की परेशानी ना हो...आगे पढ़ें

वृषभ


इस सप्ताह व्यर्थ की मानसिक चिंताएं बढ़ सकती हैं इसलिए मन को शांति देने वाले कार्यों में लगे रहें...आगे पढ़ें

मिथुन


इस सप्ताह आप को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य भी कमजोर रह सकता है...आगे पढ़ें


कर्क


इस सप्ताह आपके पारिवारिक जीवन में ख़ुशियाँ आने वाली हैं। जिससे आपका हर दिन खुशनुमा रहेगा...आगे पढ़ें

सिंह


इस सप्ताह पारिवारिक जीवन में आने वाली समस्याओं से आप परेशान हो जाएंगे और किसी बात को लेकर विवाद हो सकता है...आगे पढ़ें

कन्या


इस सप्ताह आप अपनी बातों से लोगों का मन मोह लेंगे और अपना हर कार्य बनाने में सक्षम सिद्ध होंगे...आगे पढ़ें


तुला


इस सप्ताह आप ऐसे निर्णय लेंगे जो भविष्य में आपके लिए लाभकारी सिद्ध होंगे। पारिवारिक जीवन और अपने कार्य क्षेत्र में संतुलन बनाकर चलना होगा...आगे पढ़ें

वृश्चिक


इस सप्ताह आप को विशेष रूप से अपने कुटुंब और पारिवारिक जीवन पर ध्यान देना होगा...आगे पढ़ें

धनु


इस सप्ताह आप मानसिक चिंताओं से घिरे रह सकते हैं और कभी भी बिना किसी वजह के उदास महसूस कर सकते हैं...आगे पढ़ें

मकर


इस सप्ताह आप को आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि अचानक से खर्च आपको चिंतित कर देंगे...आगे पढ़ें

कुंभ


इस सप्ताह आपको धन लाभ होने की संभावना बन रही है। कार्यक्षेत्र में आपको वरिष्ठ अधिकारियों के सामने स्वयं को सिद्ध करना आवश्यक होगा...आगे पढ़ें

मीन


इस सप्ताह आपके लिए सबसे अधिक आवश्यक होगा कि आप अपने कार्य क्षेत्र पर पूरा फोकस रखें और मेहनत करें...आगे पढ़ें

रत्न, यंत्र समेत समस्त ज्योतिषीय समाधान के लिए विजिट करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

Read More »

सूर्य का कन्या राशि में गोचर कल, पढ़ें राशिफल

इन 5 राशि वालों पर होगी सूर्य देव की कृपा! पढ़ें सूर्य के कन्या राशि में होने वाले गोचर का आपके जीवन पर होने वाला असर!


नवग्रहों का राजा सूर्य राशि परिवर्तन कर रहा है। सूर्य 17 सितंबर 2018, सोमवार को सुबह 7:02 बजे कन्या राशि में गोचर करेगा और 17 अक्टूबर 2018, बुधवार शाम 7 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा। सूर्य के इस गोचर का ज्योतिषीय प्रभाव सभी राशियों पर देखने को मिलेगा। चूंकि वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, पिता, पूर्वज और उच्च सेवा का कारक माना जाता है, इसलिए इस गोचर का प्रभाव सभी राशि के जातकों के परिवार, नौकरी और व्यावसायिक जीवन आदि पर देखने को मिलेगा। 

आइये इस राशिफल के माध्यम से जानते हैं सूर्य के इस गोचर का आपके जीवन पर होने वाला असर…


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


सूर्य की यह स्थिति आपके लिए सकारात्मक रहेगी। इस दौरान आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। वहीं आपके साहस और बल के कारण शत्रु भयभीत महसूस करेंगे...आगे पढ़ें

वृषभ


इस दौरान आप असमंजस की स्थिति में रह सकते हैं और बड़े निर्णय लेने में आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है...आगे पढ़ें

मिथुन


आपको मानसिक तनाव तथा स्वास्थ्य में कमज़ोरी रह सकती है। मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मनोरंजन का सहारा लिया जा सकता है...आगे पढ़ें


कर्क


स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर आपको सकारात्मक परिणाम देने वाला है। भौतिक सुख सुविधाओं का आप आनंद लेंगे...आगे पढ़ें

सिंह


आपको थोड़ा संभलकर चलना होगा। कठोर शब्द बोलकर किसी की भावना को आहत न करें, बल्कि सभी से प्रेम से बातचीत करें...आगे पढ़ें

कन्या


धन के लेन-देन में सावधानी बरतें और ऐसा कोई काम न करें जिससे समाज में आपकी मानहानि होती हो...आगे पढ़ें


ज़रूर पढ़ें: सूर्य की शांति के लिए धारण किये जाने वाले माणिक्य रत्न की विशेषताएं

तुला


इस दौरान आप विदेश यात्रा पर जा सकते हैं। काम के चलते घर से दूर भी रहना पड़ सकता है...आगे पढ़ें

वृश्चिक


सूर्य की यह स्थिति आपके लिए सकारात्मक रहेगी। विभिन्न स्रोतों से आपको लाभ मिलने के योग हैं...आगे पढ़ें

धनु


इस दौरान कार्य क्षेत्र में आपको सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। जैसे- नौकरी में आपकी पदोन्नति और आय में वृद्धि हो सकती है...आगे पढ़ें

मकर


इस अवधि में आपको उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। अनैतिक और ग़ैरक़ानूनी कामों से दूर रहें वरना समाज में आपका मान-सम्मान गिर सकता है...आगे पढ़ें

कुंभ


इस दौरान किसी कारण आपको विवाद का सामना करना पड़ सकता है इसलिए ऐसा कोई भी काम न करें जिससे विवाद की स्थिति पैदा हो...आगे पढ़ें

मीन


जीवनसाथी से मतभेद होने के संकेत हैं। अहंकार आपके वैवाहिक रिश्ते में खटास पैदा कर सकता है, इसलिए इसका त्याग करें...आगे पढ़ें

रत्न, यंत्र समेत समस्त ज्योतिषीय समाधान के लिए विजिट करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

Read More »

गणेश चतुर्थी आज, इस मुहूर्त में करें पूजा

जानें राशि अनुसार श्री गणेश पूजन की विधि! पढ़ें आज 13 सितंबर 2018 को मनाई जा रही गणेश चतुर्थी का महत्व और पूजा विधि।


विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी के रूप में आज से देशभर में मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य हैं, इसलिए हर शुभ कार्य से पहले उनकी वंदना की जाती है ताकि कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न हो। हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसे विनायक चतुर्थी, कलंक चतुर्थी और डण्डा चतुर्थी आदि नामों से भी जाना जाता है।

Click here to read in English

गणेश चतुर्थी पूजा मुहूर्त 2018
13 सितंबर 2018, गुरुवार11:02:34 से 13:31:28 तककुल अवधि- 2 घंटे 28 मिनट

चंद्र दर्शन निषेध का समय
12 सितंबर 201816:08:43 से 20:32:00 तक
13 सितंबर 201809:31:59 से 21:11:00 तक

सूचना: तालिका में दिया गया मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में गणेश चतुर्थी पूजा मुहूर्त

गणेश चतुर्थी व्रत व नियम


  • सुबह स्नान ध्यान के बाद तांबे अथवा मिट्टी की गणेश प्रतिमा लें और गणेश जी के सिद्धि विनायक रूप की पूजा करें। 
  • कलश में जल भरें और उसके मुख पर नवीन वस्त्र बांधें। अब उसके ऊपर गणेश जी को विराजमान करें।
  • गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करें और उन्हें 21 लडडुओं का भोग लगाएं। लडडुओं का प्रसाद ग़रीबों तथा ब्राह्मणों को बाँटें।

राशि अनुसार भगवान गणेश को प्रसन्न करने के उपाय


मेष और वृश्चिक राशि- इन राशि वाले जातकों को भगवान गणेश की सिन्दूरी रंग की प्रतिमा घर में स्थापित करनी चाहिये और उन्हें लाल व सिंदूरी रंग के वस्त्र पहनाने चाहिए। प्रसाद के रूप में गणेश जी को बूंदी के लड्डू, अनार और लाल गुलाब के पुष्प अर्पित करें।

उपाय: प्रतिदिन ‘ऊँ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जप करते हुए 11 दूर्वा चढ़ाएँ

वृषभ और तुला राशि- इन दोनों राशि के जातक गणेश जी को श्वेत वस्त्र पहनाएँ और उन्हें मोदक का भोग लगाएँ। 

उपाय: श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और गणेश जी को सफेद रंग के पुष्प व इत्र चढ़ाएँ।

मिथुन और कन्या राशि- इन राशि वाले जातकों को गणेश जी को हरे रंग के वस्त्र पहनाना चाहिए। पान, हरी इलायची, दूर्वा, हरे मूंग चढ़ाएँ और सूखे मेवों को भोग लगाएँ।

उपाय: श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ विशेष लाभकारी होगा।

कर्क राशि- इस राशि वाले जातक गणेश जी को गुलाबी रंग के वस्त्र पहनाएँ। चावल से बनी खीर का भोग लगाएँ व गुलाब के पुष्प गणेश जी को अर्पित करें।

उपाय: गायत्री गणेश मंत्र का जप विशेष लाभकारी होगा।


सिंह- इस राशि वाले जातक गणेश जी को लाल रंग के वस्त्र पहनाएँ। गुड़ या गुड़ से बने मिष्ठान का भोग लगाएँ। गणेश जी को कनेर के पुष्प अर्पित करें।

उपाय: नियमित रूप से संकट नाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें।

मकर और कुंभ राशि- इन राशि वाले जातक गणेश जी को नीले रंग के वस्त्र धारण करवाएँ और मावे से बने प्रसाद का भोग लगाएँ। सफेद पुष्प व चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर गणेश जी को चढ़ाएँ।

उपाय: श्री गणेश के बीज मंत्र का जप करें।

धनु और मीन राशि- इस राशि के जातक गणेश जी को पीले वस्त्र पहनाएँ, साथ ही पीले पुष्प, पीले रंग की मिठाई, बेसन के लड्डू और केले का भोग लगाएँ।

उपाय: श्री गणेश के बीज मंत्र का जप करें।

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों माना जाता है निषेध?


ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को मिथ्या कलंक लगता है यानि बिना किसी वजह से व्यक्ति पर झूठा आरोप लग जाता है। कहते हैं कि भगवान कृष्ण को भी चंद्र दर्शन की वजह से मिथ्या का शिकार होना पड़ा था। गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन को लेकर एक पौराणिक मत है कि इस चतुर्थी के दिन भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था, जिसकी वजह से चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को निषेध माना गया। यदि भूल से चन्द्र दर्शन हो जाए तो शास्त्रों में इसके लिए चंद्र दर्शन दोष निवारण मन्त्र का विवरण है। ऐसा होने पर इस मंत्र का 28, 54 या 108 बार जाप करना चाहिए। इसके साथ ही श्रीमद्भागवत के दसवें स्कन्द के 57वें अध्याय का पाठ करने से भी चन्द्र दर्शन दोष समाप्त हो जाता है। 

चन्द्र दर्शन दोष निवारण मन्त्र 

सिंहःप्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः।।

ज्योतिषाचार्य, शास्त्रों के जानकार और विद्वान पुरुषों का मानना है कि यदि आप शनि के बुरे प्रभाव से ग्रस्त हैं, शनि की दशा आपके लिए बाधक हो, शुत्र आपको परेशान कर रहे हैं और दुर्घटना की आशंका बन रही है। इस स्थिति में यदि भगवान श्री गणेश की सच्चे मन से आराधना की जाये, तो समस्त दुःख दूर हो जाते हैं।

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएँ!

Read More »

हरतालिका तीज आज, जानें पूजा मुहूर्त

पढ़ें भगवान शिव-पार्वती के इस व्रत का महत्व! जानें हरतालिका तीज व्रत की पूजा विधि और नियम, साथ ही पढ़ें कुंवारी कन्या और विवाहित स्त्रियों के लिए क्या है हरतालिका तीज व्रत का महत्व?


करवा चौथ, हरियाली तीज और कजरी तीज की तरह ही हरतालिका तीज भी सुहागिनों का व्रत होता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत पार्वती जी ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए रखा था। इसलिए इस व्रत को कुंवारी कन्याएँ भी रख सकती हैं। भारत में कई स्थानों पर हरतालिका तीज को बड़ी तीज भी कहते हैं। यह व्रत विशेष रूप से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है। 

हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त
प्रात:काल मुहूर्त06:04:17 से 08:33:31 तक
अवधि2 घंटे 29 मिनट

सूचना: यह मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त

हरतालिका तीज व्रत के नियम


हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है। क्योंकि भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन रेत के भगवान शंकर और माता पार्वती बनाए जाते हैं और उनका पूजन किया जाता है। चूंकि यह निर्जल और निराहार व्रत है इसलिए इसमें प्रसाद के रूप में फल ही चढ़ाये जाते हैं। 

हरतालिका तीज व्रत में रात्रि जागरण कर भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा की जाती है और अगले दिन सुबह पूजन सामग्री का विसर्जन करने के बाद यह व्रत संपन्न होता है।



हरतालिका तीज व्रत कथा और महत्व


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पार्वती जी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप किया था। अपनी बेटी की यह स्थिति देखकर उनके पिता पर्वत राज हिमालय बेहद दुःखी हुए। इस बीच नारद मुनि भगवान विष्णु की ओर से पार्वती जी के लिए विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे, लेकिन इस बारे में जब पार्वती जी को पता चला तो वे बेहद दुःखी हुईं। उनकी एक सहेली के पूछने पर उन्होंने बताया कि वे भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तप कर रही है। इसके बाद पार्वती जी की सहेलियां उन्हें वन लेकर चली गईं। सखियों द्वारा उनके हरण से ही इस व्रत का नाम हरतालिका तीज पड़ा। जहां हरत यानि हरण और आलिका मतलब सहेली। इसके बाद पार्वती जी ने कठोर तप किया। भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की आराधना में मग्न होकर रात्रि जागरण किया। माता पार्वती के कठोर तप को देखकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पार्वती जी की इच्छानुसार उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

मान्यता है कि माता पार्वती और भगवान शिव हरतालिका तीज व्रत रखने और विधि विधान से पूजा करने वाली सभी स्त्रियों को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देते हैं। इस वजह से कुंवारी कन्या और विवाहित महिलाओं के लिए हरतालिका तीज व्रत का विशेष महत्व है। 

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को हरतालिका तीज व्रत की शुभकामनाएं !

Read More »