शरद पूर्णिमा कल, जानें महत्व

जानें इस दिन व्रत रखने से होने वाले लाभ। पढ़ें शरद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व और व्रत की पूजा विधि। 


शरद पूर्णिमा का पुराने समय से हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ये माना गया है कि धन की देवी मां लक्ष्मी का जन्म इसी दिन हुआ था। इसके अलावा भगवान कृष्ण ने भी वृन्दावन में गोपियों संग निधिवन में इसी दिन रास रचाया था। शायद इसलिए ही इस पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा, रास पूर्णिमा, और कौमुदी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा यानि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी का पूजन किया जाना शुभ माना जाता है, जिसके लिए कोजागरा व्रत करने का विशेष महत्व है। कहते हैं इस ख़ास दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत भर जाता है और ये किरणें हर प्राणी के लिए अमृत के समान लाभदायक होती हैं।


शरद पूर्णिमा मुहूर्त 2018
अक्टूबर 23, 2018 को 22:38:01 से पूर्णिमा आरम्भ
अक्टूबर 24, 2018 को 22:16:44 पर पूर्णिमा समाप्त

सूचना: उपरोक्त मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में शरद पूर्णिमा का मुहूर्त

शरद पूर्णिमा 2018 शुभ मुहूर्त 


  • वर्ष 2018 में शरद पूर्णिमा 24 अक्‍टूबर को घटित हो रही है और यह 23 अक्टूबर रात से ही शुरू हो जाएगी। 
  • इस दिन चावलों की खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे कुछ घंटे तक रखने और देर रात 12 बजे के बाद खाने की पुरानी परंपरा चली आ रही है। 
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष शरद पूर्णिमा के लिए पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 23 अक्टूबर को रात 10:38 पर होगी जो 24 अक्टूबर रात 10:14 बजे समाप्त हो जायेगी। 

शरद पूर्णिमा व्रत कथा 


हिन्दू धर्म के अनुसार पुराने समय में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को खुश करने के लिए एक साहूकार की दोनों बेटियां हर पूर्णिमा को व्रत किया करती थीं। दोनों बहनों में से जहाँ बड़ी बहन पूर्णिमा का व्रत पूरे विधि-विधान से करती थी। वहीं छोटी बहन व्रत तो करती थी लेकिन वो अक्सर नियमों को आडंबर मानकर उनकी अनदेखी कर बैठती थी। विवाह योग्य होने पर साहूकार ने अपनी दोनों बेटियों का विवाह कर दिया। विवाह के कुछ समय बाद दोनों के घर संतानों ने जन्म लिया. बड़ी बेटी के घर स्वस्थ संतान का जन्म हुआ तो वहीं छोटी बेटी के घर संतान जन्म तो लेती परन्तु पैदा होते ही दम तोड़ देती थी।

ऐसा दो-तीन बार हुआ तब जाकर उसने एक ब्राह्मण को सलाह के लिए बुलाया और अपनी व्यथा कहते हुए उससे धार्मिक उपाय पूछा। छोटी बेटी की पूरी बात सुनकर ब्राह्मण ने उससे कहा कि तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती हो, इस कारण तुम्हारा व्रत कभी सफल नहीं हुआ और तुम्हें अधूरे व्रत का दोष भी लगता है। ब्राह्मण की बात सुनकर छोटी बेटी ने उस वर्ष पूर्णिमा व्रत पूरे विधि-विधान से करने का निर्णय लिया, लेकिन पूर्णिमा आने से पहले ही उसने एक बेटे को जन्म दिया और उस बालक ने भी जन्म लेते ही दम तोड़ दिया। बालक की मृत्यु होने पर छोटी बेटी ने बेटे के शव को एक पीढ़े पर रख कर उसपर कपड़ा ढक दिया ताकि किसी को पता न चले।


फिर उसने अपनी बड़ी बहन को अपने घर आमंत्रित किया और बैठने के लिए उसे वही पीढ़ा दे दिया। जैसे ही बड़ी बहन उस पीढ़े पर बैठने लगी, उसकी साड़ी का किनारा बच्चे को छू गया और वह जीवित होकर तुरंत रोने लगा। ये सब देख बड़ी बहन डर गई और छोटी बहन पर क्रोधित होकर बोलने लगी कि, क्या तुम मुझ पर बच्चे की हत्या का दोष और कलंक लगाना चाहती हो! मेरे बैठने से यह बच्चा मर जाता तो? 

ख़ुशी से रोते हुए छोटी बहन ने उत्तर दिया, दीदी यह बच्चा पहले से मरा हुआ था। तुम्हारे तप और स्पर्श के कारण ही यह जीवित हो गया है। तुम जो व्रत पूर्णिमा के दिन करती हो, उसके कारण तुम दिव्य तेज से परिपूर्ण और पवित्र हो चुकी हो। अब मैं भी तुम्हारी ही तरह पूरी विधि के साथ व्रत और पूजन करूंगी। इसके बाद बड़ी बहन की तरह ही छोटी बहन ने भी पूर्णिमा व्रत विधि पूर्वक किया और इस व्रत के महत्व और फल का पूरे नगर में प्रचार किया।



शरद पूर्णिमा व्रत का महत्व 


  • हिन्दू धर्म के अनुसार शरद पूर्णिमा का मुहूर्त अनुसार विधि-विधान पूर्वक व्रत रखने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है जिससे व्यक्ति के सभी दुख दूर हो जाते हैं। 
  • चूंकि इसे कौमुदी व्रत भी कहा जाता है इसलिए ये माना गया हैं कि इस दिन जो विवाहित स्त्रियां व्रत रखती है उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। 
  • साथ ही अगर कोई माँ इस व्रत को विधि अनुसार अपने बच्चे के लिए करें तो उसकी संतान की आयु लंबी होती है। 
  • जो कोई भी कुंवारी कन्या इस त को रखती हैं तो उसे भी सुयोग्य और उत्तम वर की प्राप्ति होती है। 
  • माना गया हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा किसी भी दिन के मुकाबले सबसे ज्यादा चमकीला होता है। इस दिन आसमान से अमृत बरसता है। 
  • शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों का तेज बहुत होता है जिससे आपकी आध्यात्मिक और शारीरिक शक्तियों का विकास होता है। 
  • शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों में असाध्य रोगों को दूर करने की क्षमता भी होती है। 

शरद पूर्णिमा व्रत विधि


  • शरद पूर्णिमा के दिन सुबह इष्ट देव का पूजन करना शुभ होता है। 
  • इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का पूजन करके घर में घी के दीपक जलाकर पूजन करना चाहिए। 
  • इस दिन ब्राह्मणों को खीर का भोजन कराकर उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।
  • माँ लक्ष्मी को खुश करने के लिए इस व्रत को विशेष रुप से किया जाता है। इस दिन सच्चे भाव से भजन-कीर्तन करके आप धन-संपत्ति में वृद्धि देख सकते है। 
  • पूर्णिमा का व्रत करके रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए।
  • इस दिन मंदिर में खीर आदि दान करके व्रत को सफल बना सकते है। 
  • कई लोग शरद पूर्णिमा के दिन गंगा व अन्य पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस दौरान स्नान-ध्यान के बाद गंगा घाटों पर ही दान-पुण्य करना शुभ होता है। 

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं !


Read More »

साप्ताहिक राशिफल- 22 से 28 अक्टूबर 2018

यह सप्ताह मेष, वृषभ, मिथुन, तुला, धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। इस अवधि में करियर, नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा, प्रेम और पारिवारिक जीवन आदि क्षेत्रों में इन राशि के जातक आनंद का अनुभव करेंगे और उन्हें शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी।


इस सप्ताह 26 अक्टूबर को बुध ग्रह वृश्चिक राशि में गोचर करेगा। इस दौरान बुध वृश्चिक राशि में आकर गुरु के साथ एकराशि संबंध बनाएगा। इस गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर देखने को मिलेगा। वहीं इसके प्रभाव से घी, तेल, सोना-चांदी के भाव में घटा-बढ़ी के बाद तेजी बनेगी। यह सप्ताह महिला जातकों के लिए खास रहने वाला है। क्योंकि 27 अक्टूबर को महिलाएँ सुखद और सफल दाम्पत्य जीवन के लिए करवा चौथ का व्रत रखेंगी।


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। जानें चंद्र राशि कैल्कुलेटर से अपनी चंद्र राशि

मेष


मेष राशि के जातकों को इस सप्ताह किसी सुदूर यात्रा पर जाना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपका दबदबा कायम रहेगा और साथ ही साथ अच्छी आमदनी प्राप्त होगी...आगे पढ़ें

वृषभ


वृषभ राशि के जातकों को इस सप्ताह किसी प्रकार की खुशी मिल सकती है और उनकी कोई मनचाही इच्छा पूरी हो सकती है...आगे पढ़ें

मिथुन


मिथुन राशि के जातकों का यह सप्ताह आनंद में व्यतीत होगा और आप अपने दोस्तों और परिजनों के साथ अच्छा समय बिताएंगे...आगे पढ़ें

कर्क


कर्क राशि के लोगों को थोड़ा धैर्य का परिचय देना होगा। क्योंकि इस सप्ताह वह कुछ मानसिक रूप से परेशान रह सकते हैं...आगे पढ़ें

सिंह


सिंह राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह मिश्रित परिणाम देते हुए नज़र आ रहा है। आपके पारिवारिक जीवन में शांति आएगी...आगे पढ़ें

कन्या


कन्या राशि के लोगों को इस सप्ताह अच्छे अवसर प्राप्त होंगे और इस दौरान आप स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेंगे...आगे पढ़ें


तुला


तुला राशि के लोगों के लिए यह सप्ताह काफी अच्छा रहने की संभावना है। इस दौरान आप काफी खुश रहेंगे और वह खुशी आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी...आगे पढ़ें

वृश्चिक


वृश्चिक राशि के लोग इस सप्ताह अपनी सुख सुविधाओं और मनोरंजन के साधनों पर अधिक खर्च कर सकते हैं...आगे पढ़ें

धनु


धनु राशि के जातक इस सप्ताह धर्म-कर्म के मामलों में अधिक व्यस्त रह सकते हैं। आपकी आमदनी में जबरदस्त वृद्धि होगी...आगे पढ़ें

मकर


मकर राशि के जातकों को इस सप्ताह ना केवल अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा बल्कि अपने स्वभाव और व्यवहार पर भी नियंत्रण रखने की आवश्यकता होगी...आगे पढ़ें

कुंभ


कुंभ राशि के जातकों को अनेक प्रकार के लाभ मिल सकते हैं तथा यात्राओं के माध्यम से भी उन्हें खुशी के साथ-साथ धन लाभ हो सकता है...आगे पढ़ें

मीन


मीन राशि के जातकों को इस सप्ताह अपने कार्यस्थल पर अधिक मेहनत करनी होगी। इस बात का ध्यान रखें कि आप के वरिष्ठ अधिकारी काफी सख्त रवैया अपनाएंगे...आगे पढ़ें

रत्न, यंत्र समेत समस्त ज्योतिषीय समाधान के लिए विजिट करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

Read More »

विजयादशमी आज, जानें विजय मुहूर्त

इस मुहूर्त में पूजन से मिलेगी विजय और सफलता! पढ़ें आज 19 अक्टूबर को मनाये जा रहे विजयादशमी पर्व का महत्व और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ।


आज देशभर में विजयादशमी का त्यौहार मनाया जा रहा है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। शारदीय नवरात्रि के समापन के बाद शुक्ल पक्ष की दशमी पर दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था, इसलिए इस पर्व को विजयादशमी कहा गया है। दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजा का भी विधान है। इसी वजह से इस दिन अस्त्र-शस्त्र यानि हथियारों की पूजा की जाती है। दशहरा साल के शुभ दिनों में से एक है, ऐसा कहा जाता है कि इस दिन यदि शुभ मुहूर्त में कोई कार्य किया जाये तो इसका विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। विजयादशमी से पूर्व ही नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र का समापन दुर्गा विसर्जन के साथ होता है। दुर्गा विसर्जन का मुहूर्त प्रात:काल या अपराह्न काल में विजयादशमी तिथि लगने पर शुरू होता है। इसलिए प्रात:काल या अपराह्न काल में जब विजयादशमी तिथि व्याप्त हो, तब मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाना चाहिए। देखें: दुर्गा विसर्जन मुहूर्त


विजयादशमी मुहूर्त 2018
विजय मुहूर्त14:00:02 बजे से 14:45:38 बजे तक
अपराह्न पूजा का समय13:14:26 बजे से 15:31:14 बजे तक

सूचना: तालिका में दिया गया मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में विजयादशमी पूजा का मुहूर्त व पूजा विधि

दशहरा पर विजय मुहूर्त


विजयादशमी का दिन साल के सबसे पवित्र दिनों में से एक माना जाता है। यह साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है। साल का सबसे शुभ मुहूर्त - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अश्विन शुक्ल दशमी, वैशाख शुक्ल तृतीया, एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (आधा मुहूर्त) है। यह अवधि किसी भी काम की शुरूआत करने के लिए उत्तम है। हालाँकि कुछ निश्चित मुहूर्त किसी विशेष पूजा के लिए भी हो सकते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जब सूर्यास्त होता है और आसमान में कुछ तारे दिखने लगते हैं तो यह अवधि विजय मुहूर्त कहलाती है। इस समय में पूजा या कार्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीराम ने दुष्ट रावण को हराने के लिए युद्ध इसी मुहुर्त में प्रारंभ किया था। इसी समय शमी नामक पेड़ ने अर्जुन के गाण्डीव नामक धनुष का रूप लिया था। 

दशहरा पूजा एवं महोत्सव


दशहरे पर अपराजिता पूजन करने का विधान है, जिसे अपराह्न काल में किया जाता है। इस पूजा की विधि इस प्रकार है-

1. घर से पूर्वोत्तर की दिशा में कोई पवित्र और शुभ स्थान को चिन्हित करें। यह स्थान किसी मंदिर, गार्डन आदि के आस-पास भी हो सकता है। अच्छा होगा यदि घर के सभी सदस्य पूजा में शामिल हों, हालाँकि यह पूजा व्यक्तिगत भी हो सकती है।

2. उस स्थान को स्वच्छ करें और चंदन के लेप के साथ अष्टदल चक्र (आठ कमल की पंखुडियाँ) बनाएँ। 

3. अब यह संकल्प लें कि देवी अपराजिता की यह पूजा आप अपने या फिर परिवार के ख़ुशहाल जीवन के लिए कर रहे हैं।

4. उसके बाद अष्टदल चक्र के मध्य में अपराजिताय नमः मंत्र के साथ माँ देवी अपराजिता का आह्वान करें।

5. अब माँ जया को दायीं ओर क्रियाशक्त्यै नमः मंत्र के साथ आह्वान करें।

पूजा विधि विस्तार से पढ़ने के लिए क्लिक करें


दशहरे से जुड़ी पौराणिक कथाएँ


धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस के साथ नौ दिनों तक युद्ध किया था और दसवें दिन अर्थात आज ही के दिन माँ ने उस राक्षस का संहार कर समस्त सृष्टि की रक्षा की थी। इसके अलावा त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने लंकापति पापी रावण का वध किया था इसलिए इस पर्व का नाम दशहरा पड़ा और तभी से दस सिरों वाले रावण के पुतले को हर साल दशहरा के दिन प्रतीक के रूप में जलाया जाता है ताकि हम अपने अंदर के क्रोध, लालच, भ्रम, नशा, ईर्ष्या, स्वार्थ एवं अहंकार आदि को नष्ट कर सकें।

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएँ! 

Read More »

नवरात्रि नवमी पूजन आज, जानें पारण मुहूर्त

पढ़ें माँ सिद्धिदात्री की महिमा और महत्व! आज 18 अक्टूबर को मनाया जा रहा है नवरात्रि नवमी पूजन, जानें पारण का मुहूर्त और अगले दिन होने वाले दुर्गा विसर्जन का समय।


आज शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि और यह नवरात्र के समापन का दिन है। नवमी के अवसर पर आज देशभर के दुर्गा पंडालों और घरों में माँ दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। नवरात्रि की नवमी पर देवी दुर्गा के माँ सिद्धिदात्री रूप की जाती है। आज नवमी पर कई जगहों पर भंडारे और कन्या पूजन का आयोजन होता है। आइये जानते हैं नवरात्रि की नवमी तिथि का महत्व, पारण का मुहूर्त और 19 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन का समय।


शारदीय नवरात्रि पारण मुहूर्त
18 अक्टूबर 2018, गुरुवार15:30:41 के बाद से
दुर्गा विसर्जन मुहूर्त
19 अक्टूबर 2018, शुक्रवार06:24:02 से 08:40:50 तक
अवधि 2 घंटे 16 मिनट

सूचना: उपरोक्त समय नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में पारण मुहूर्त और दुर्गा विसर्जन का समय 

माँ सिद्धिदात्री


माँ सिद्धिदात्री का शाब्दिक अर्थ है सिद्धि को देने वाली। यह माँ दुर्गा का नौवाँ और अंतिम रूप है। देवी का यह स्वरूप सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाला है। यदि कोई साधक पूरे विधि-विधान और सच्चे मन से माँ के इस रूप की आराधना करता है तो उसकी सारी साधनाएं सिद्ध होती हैं और यदि किसी भक्त पर इनकी कृपा हो जाए तो वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। नवमी तिथि को दुर्गा महानवमी पूजा होती है। इस दिन विशेष हवन किया जाता है और हवन में सभी देवी-देवताओं के लिए आहुति दी जाती है।



नवरात्रि पारण 


शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि पारण दशमी तिथि को किया जाता है। पारण मुहुर्त में नौ दिनों तक चलने वाले व्रत को विधि-विधान से खोला जाता है। पारण के बाद ब्राह्मणों को फल, उपहार, वस्त्र, दान-दक्षिणा आदि दी जाती है, साथ ही 9 कन्याओं को भी ये वस्तुएं कन्या पूजन के बाद देनी चाहिए।

सिंदूर उत्सव


दुर्गा पूजा के समय सिंदूर उत्सव पश्चिम बंगाल में मनाई जाने वाली एक अनोखी परंपरा है। सिंदूर उत्सव को सिंदूर खेला भी कहते हैं। विजयादशमी के दिन दुर्गा विसर्जन से पहले सिंदूर खेला की रस्म निभाई जाती है। इस अवसर पर विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और शुभकामनाएं देती हैं। 

दुर्गा विसर्जन


दुर्गा पूजा उत्सव का समापन दुर्गा विर्सजन के साथ होता है। दुर्गा विसर्जन का मुहूर्त प्रात:काल या अपराह्न काल में विजयादशमी तिथि लगने पर शुरू होता है इसलिए प्रात: काल या अपराह्न काल में जब विजयादशमी तिथि व्याप्त हो, तब मॉं दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाना चाहिए।

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को दुर्गा नवमी की शुभकामनाएँ!

Read More »

नवरात्रि अष्टमी पूजन आज, जानें महत्व

इस मुहूर्त में करें माता महागौरी की पूजा! पढ़ें नवरात्रि पर अष्टमी पूजन का महत्व और इस दिन किये जाने वाले धार्मिक कर्म।


नवरात्रि में अष्टमी पूजन का बड़ा महत्व है। इस दिन देवी दुर्गा के महागौरी स्वरुप की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म से संबंधित विभिन्न समुदायों में नवरात्रि के अष्टमी पूजन का विशेष विधान है। हर परिवार में नवरात्रि पर अष्टमी पूजन अपनी कुल परंपराओं के अनुसार होता है। नवरात्रि के अष्टमी पूजन पर कई धार्मिक अनुष्ठान और अपनी कुल परंपराओं के अनुसार मुंडन, अन्नप्राशन संस्कार और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य भी किये जाते हैं। शारदीय नवरात्रि 2018 में अष्टमी पूजन आज यानि 17 अक्टूबर को किया जा रहा है।



नवरात्रि अष्टमी पूजा मुहूर्त
16 अक्टूबर 201810:18:29 से अष्टमी तिथि आरम्भ
17 अक्टूबर 201812:51:47 पर अष्टमी समाप्त

सूचना: यह मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में अष्टमी पूजा का मुहूर्त

विशेष : नवमी तिथि 17 अक्टूबर को 12:51:47 के बाद प्रारम्भ होगी और 18 अक्टूबर को दोपहर बाद 15:30:41 तक उपस्थित रहेगी। इस कारण नवमी की पूजा 18 अक्टूबर 2018 को करनी चाहिए। 

माता महागौरी की आराधना


महागौरी देवी माँ दुर्गा का आठवाँ रूप हैं। यह माँ दुर्गा का बेहद शांत एवं निर्मल स्वरूप है। वृषभ इनका वाहन है। सच्चे मन से यदि माँ की उपासना की जाए तो यह भक्तों के हर कष्ट को दूर करती हैं। मान्यता है कि माँ पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए महागौरी का जन्म लिया था। इसके लिए उन्होंने कड़ी तपस्या की थी। इस कड़े तप के कारण माँ पार्वती का रंग काला हो गया था। उसके बाद शिव जी उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और गंगा के पवित्र जल से स्नान कराया जिसके बाद देवी का रंग गोरा हो गया। तब से उन्हें महागौरी कहा जाने लगा।

विस्तार से पढ़ें: माता महागौरी की महिमा


अष्टमी पर कन्या पूजन का महत्व


नवरात्रि की अष्टमी को कन्या पूजा का बड़ा महत्व है। इस दिन विशेष रूप से कन्याओं की पूजा की जाती है। 2 से लेकर 10 वर्ष तक की आयु वाली कन्याओं को बुलाकर उनका पूजन और उन्हें भोजन व दक्षिणा देना चाहिए। मान्यता है कि कन्या के रूप में मॉं दुर्गा के नौ रूपों के पूजन से मॉं प्रसन्न होती हैं और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

कुमारी- वे बालिकाएँ जिनकी आयु दो वर्ष की होती हैं। उनका पूजन करने से दुःख और दरिद्रता का नाश होता है।

त्रिमूर्ति- वे बालिकाएँ जिनकी उम्र 3 वर्ष होती है। इनकी पूजा करने से पुत्र और पौत्र की प्राप्ति होती है।

कल्याणी- वे बेटियां जिनकी आयु 4 वर्ष तक होती है, उनका पूजन करने से विद्या और सुख-समृद्धि मिलती है।

रोहिणी- वे बालिकाएँ जिनकी उम्र 5 तक होती है। इनकी पूजा से रोगों का नाश होता है।

कालिका- वे कन्याएं जिनकी आयु 6 वर्ष होती है, उनकी पूजा से शत्रुओं का नाश होता है। 

चण्डिका- वे बालिकाएँ जिनकी आयु 7 वर्ष होती है। इनके पूजन से धन और वैभव की प्राप्ति होती है।

शाम्भवी- वे कन्याएँ जिनकी आयु 8 वर्ष होती है, उनके पूजन से हर क्षेत्र में विजय और सफलता मिलती है।

दुर्गा- 9 वर्ष की उम्र की कन्याओं का पूजन दुर्गा के रूप में किया जाता है। इनकी पूजा के प्रभाव से परलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है।

सुभद्रा- 10 वर्ष की आयु वाली कन्याओं को सुभद्रा के रूप में पूजा जाता है। इनके पूजन से हर मनोकामना पूर्ण होती है।

हम आशा करते हैं कि नवरात्रि अष्टमी पूजन पर आधारित यह लेख आपको पसंद आया होगा। एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को नवरात्रि की शुभकामनाएँ!

Read More »

साप्ताहिक राशिफल- 15 से 21 अक्टूबर 2018

इन 5 राशि वालों के लिए शानदार रहेगा यह सप्ताह! पढ़ें साप्ताहिक राशिफल और जानें नौकरी, व्यापार, शिक्षा, प्रेम व पारिवारिक जीवन के लिए कैसा रहेगा यह सप्ताह? 


नवरात्रि और दशहरे के बीच का यह सप्ताह इन 5 राशि कर्क, सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक के जातकों के लिए बेहद सुखद रहने वाला है। इस अवधि में इन राशि के लोगों को शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। 

धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह सप्ताह महत्वपूर्ण रहने वाला है। क्योंकि इस सप्ताह 18 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का समापन होगा और 19 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इसके अलावा 17 अक्टूबर को सूर्य राशि परिवर्तन कर तुला राशि में गोचर करेंगे। आज नवरात्रि का छठा दिन है और माँ कात्यायनी की आराधना का दिन है। पढ़ें माँ कात्यायनी की महिमा और पूजा का महत्व। 


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। जानें चंद्र राशि कैल्कुलेटर से अपनी चंद्र राशि

मेष


विजय सप्ताह मेष राशि वालों के लिए खट्टा और मीठा दोनों प्रकार के अनुभव लेकर आएगा। जहां एक और आपके पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ेगा...आगे पढ़ें

वृषभ


वृषभ राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह कुछ चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। इस दौरान आप मानसिक रूप से व्याकुल देखेंगे...आगे पढ़ें

मिथुन


मिथुन राशि के लोगों को इस सप्ताह मानसिक तनाव से गुजरना पड़ सकता है। कार्य क्षेत्र में जहां एक और आपको संघर्ष और उपरांत अच्छी सफलता प्राप्त होगी...आगे पढ़ें

कर्क


कर्क राशि के जातकों के लिए इस सप्ताह कुछ खुशखबरी भी है और कुछ बातें कौन है विशेष रुप से ध्यान रखना होगा...आगे पढ़ें

सिंह


इस सप्ताह सिंह राशि के जातकों को संचार कौशल संबंधित मामलों में बेहतर सफलता प्राप्त होगी। कुछ मामलों में आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं...आगे पढ़ें

कन्या


इस सप्ताह कन्या राशि के जातकों के परिवार में खुशियां आएंगी और परिवार में कोई मांगलिक कार्यक्रम संपन्न होने से घर में उत्सव का माहौल रहेगा...आगे पढ़ें


तुला


इस सप्ताह तुला राशि के जातक काफी प्रसन्न और संतुष्ट दिखाई देंगे और उनकी खुशी उनको हर काम में आगे बढ़ाएगी...आगे पढ़ें

वृश्चिक


वृश्चिक राशि वाले जातक इस सप्ताह मौज मस्ती के लिए कहीं दूर यात्रा पर जा सकते हैं या फिर विदेश यात्रा का प्लान भी कर सकते हैं...आगे पढ़ें

धनु


इस सप्ताह धनु राशि के जातक मानसिक रूप से कुछ कमजोर है सकते हैं और इन्हें किसी की सलाह अथवा किसी के साथ की आवश्यकता पड़ेगी...आगे पढ़ें

मकर


मकर राशि वाले जातकों को इस सप्ताह अपने व्यवहार और अपने स्वास्थ्य दोनों पर समान रूप से ध्यान देना होगा...आगे पढ़ें

कुंभ


कुंभ राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह मिश्रित परिणाम देने वाला प्रतीत होता है। इस दौरान आपके अपने पिता से संबंध बेहतर होंगे...आगे पढ़ें

मीन


मीन राशि के जातक इस सप्ताह धर्म-कर्म और पुण्य कार्य में अधिक समय व्यतीत करेंगे और उनके मान-सम्मान में वृद्धि होगी...आगे पढ़ें

रत्न, यंत्र समेत समस्त ज्योतिषीय समाधान के लिए विजिट करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

Read More »

सुपर सन डे, बिग एस्ट्रो फेस्टिवल!

इस सीज़न की शानदार डील्स और बंपर डिस्काउंट पाने का आखिरी मौका!
Read More »