साप्ताहिक राशिफल- 16 से 22 जुलाई 2018

5 राशि वालों को विशेष लाभ के योग! पढ़ें साप्ताहिक राशिफल और जानें नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन से जुड़ी अहम भविष्यवाणियाँ।



यह सप्ताह वृषभ, मिथुन, सिंह, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से अच्छा रहने वाला है। क्योंकि इस अवधि में इन राशि के लोगों को कार्य में सफलता, लंबी दूरी की यात्रा और पारिवारिक जीवन में आनंद की प्राप्ति होगी। वहीं अन्य राशि के जातकों को सामान्य रूप से लाभ और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। 

आज सूर्य कर्क राशि में गोचर की वजह से व्यावसायिक क्षेत्र में कुछ परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। दरअसल सूर्य कर्क राशि में आकर बुधराहु के साथ मेल करेगा। इन पर मंगल की विशेष सप्तम दृष्टि भी रहेगी। इस वजह से सोना और चांदी में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं गेहूं, चना, अरहर और चावल में मंदी के बाद अचानक से तेजी बनेगी। 

इसके अतिरिक्त इस सप्ताह 18 और 21 जुलाई को सर्वार्थ सिद्धि योग पड़ रहा है। यह एक एक शुभ योग है और इसमें संपन्न होने वाले हर कार्य निर्विघ्न रूप से सिद्ध होते हैं।


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


इस सप्ताह मेष राशि के जातकों को अपने कार्य क्षेत्र पर विशेष रुप से ध्यान केंद्रित करना होगा। इस दौरान उन्हें उनकी मेहनत का बहुत अच्छा परिणाम प्राप्त होगा...आगे पढ़ें

वृषभ


वृषभ राशि के जातक इस सप्ताह आनंद का अनुभव करेंगे और पारिवारिक जीवन का भरपूर मजा लेंगे...आगे पढ़ें

मिथुन


मिथुन राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह कुछ नए अवसर लेकर आएगा। आप अपनी वाणी के प्रभाव से अपने काम बनाएंगे...आगे पढ़ें


कर्क


कर्क राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। कार्य को लेकर आपको अपनी प्राथमिकता तय करनी होगी...आगे पढ़ें

सिंह


सिंह राशि वालों के लिए यह सप्ताह सुखद रहने वाला है। हर काम में सफलता की प्राप्ति होगी...आगे पढ़ें

कन्या


कन्या राशि के जातकों को इस सप्ताह खर्चों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यह खर्चे आपकी सुख सुविधाओं से ही संबंधित होंगे...आगे पढ़ें



तुला


तुला राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह मिश्रित परिणाम लेकर आया है। इस सप्ताह आप अत्यधिक व्यस्त रहेंगे और अपने काम में मन से लगे रहेंगे...आगे पढ़ें


वृश्चिक


इस सप्ताह कार्य क्षेत्र में जबरदस्त सफलता के योग बनेंगे। आप की मन की इच्छाएं पूरी होंगी...आगे पढ़ें

धनु


धनु राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह सुदूर यात्रा पर जाने के लिए काफी सफल सिद्ध होगा...आगे पढ़ें

मकर


यह सप्ताह मकर राशि के जातकों के लिए मिला-जुला रहने की संभावना है। आप सुदूर यात्रा पर भी जा सकते हैं...आगे पढ़ें

कुंभ


इस सप्ताह कुंभ राशि के जातक प्रसन्नचित रहेंगे और हर काम को पूरी निष्ठा से और ईमानदारी से करने का प्रयास करेंगे...आगे पढ़ें

मीन


मीन राशि के जातकों को इस सप्ताह अधिक मेहनत करनी होगी। वहीं दूसरी ओर धन लाभ के योग भी बनेंगे...आगे पढ़ें

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सूर्य का कर्क राशि में गोचर कल, जानें ज्योतिषीय प्रभाव

इन 6 राशि वालों पर होगी दया दृष्टि! पढ़ें कल यानि 16 जुलाई 2018 को सूर्य के कर्क राशि में होने वाले गोचर का ज्योतिषीय प्रभाव।


वैदिक ज्योतिष में सफलता, सम्मान और सरकारी सेवा आदि का कारक कहा जाने वाला सूर्य ग्रह 16 जुलाई 2018, सोमवार को रात्रि 10:42 पर कर्क राशि में गोचर करेगा। सूर्य 17 अगस्त 2018, शुक्रवार प्रातः 7:02 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा। इस एक माह की गोचरीय अवधि में सूर्य विभिन्न राशि के जातकों के जीवन को प्रभावित करेगा। 

वृषभ, कन्या, तुला, वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि के लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। चूंकि सूर्य को उच्च सरकारी सेवा का कारक माना जाता है इसलिए सरकारी नौकरी पेशा जातकों के जीवन पर इसका विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। 


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


पारिवारिक समस्या को लेकर आप थोड़े तनाव में रह सकते हैं। माता-पिता जी की सेहत भी कुछ कमज़ोर रह सकती है...आगे पढ़ें

वृषभ


इस गोचरीय स्थिति के कारण आपके साहस एवं संकल्प शक्ति में वृद्धि होगी। आप अपने शत्रुओं पर हावी रह सकते हैं...आगे पढ़ें

मिथुन


आपकी भाषा में कड़वाहट देखने को मिल सकती है। कठोर वाणी के चलते लोग आपसे नाराज़ अथवा दुखी हो सकते हैं...आगे पढ़ें


कर्क


आपके स्वभाव में अहंकार एवं भाषा में कड़वापन देखा जा सकता है। सिरदर्द, बुखार, सीने में किसी प्रकार का संक्रमण, सूजन जैसी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आपको हो सकती हैं...आगे पढ़ें

सिंह


इस गोचर के दौरान आपकी सेहत में गिरावट दर्ज होने की संभावना है इसलिए समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जाँच कराते रहें। आप विदेश में बसने का मन बना सकते हैं...आगे पढ़ें

कन्या


आपको विदेश संबंधों अथवा विदेशी कंपनियों से आर्थिक लाभ होने की संभावना है। गोचर के दौरान आपकी संकल्प शक्ति में वृद्धि हो सकती है...आगे पढ़ें




तुला


यह स्थिति आपके लिए शुभ संकेत दे रही है। इस अवधि में आप अपनी क्षमता से अधिक कार्य करेंगे, जिसका आपको अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकता है...आगे पढ़ें

वृश्चिक


यह आपके लिए अच्छा समय साबित हो सकता है। गोचर की अवधि में आप किसी लंबी यात्रा पर जा सकते हैं। यह यात्रा आपके लिए लाभकारी हो सकती है...आगे पढ़ें

धनु


इस दौरान आपका स्वास्थ्य कुछ कमज़ोर रह सकता है। इसके अलावा अचानक ही आपको धन हानि हो सकती है, इसलिए धन का निवेश पूरी सावधानी के साथ करें...आगे पढ़ें

मकर


इस दौरान घर में अशांति का वातावरण रह सकता है। आपके व्यवहार में अहंकार एवं भाषा में कड़वापन देखने को मिल सकता है...आगे पढ़ें

कुंभ


इस दौरान आप अपने शत्रुओं पर हावी रहेंगे। प्रतियोगी परीक्षा में आपको सफलता मिलने की संभावना है...आगे पढ़ें

मीन


इस स्थिति में नौकरी में ट्रांसफ़र होने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में सीनियर्स के साथ विवाद होने की भी संभावना है...आगे पढ़ें

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पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा आज

पढ़ें रथयात्रा से जुड़े अद्भुत तथ्य! पुरी में आज से होगी जगन्नाथ रथयात्रा की शुरुआत। जानें इस महोत्सव का महत्व और इतिहास।



जगन्नाथ रथयात्रा मुहूर्त
14 जुलाई 201804:34:14 से द्वितीया आरम्भ
15 जुलाई 201800:56:51 पर द्वितीया समाप्त

विशेष: उपरोक्त मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में रथयात्रा का मुहूर्त


भारत समेत विश्व भर में प्रसिद्ध पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा आज निकाली जाएगी। हर साल भगवान जगन्नाथ को एक बार उनके गर्भ गृह से निकालकर यात्रा कराई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान अपने गर्भ गृह से निकलकर प्रजा के सुख-दुःख को स्वयं देखते हैं। हिन्दू धर्म में बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम, इन चार धामों का विशेष महत्व है। पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है। मान्यता है कि पुरी में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था। इस अवतार में भगवान विष्णु सबर जनजाति के पूजनीय देवता बन गए। सबर जनजाति के देवता होने से पुरी में भगवान जगन्नाथ का रूप कबीलाई देवताओं की तरह है। होली, दीवाली, दशहरा और रक्षा बंधन आदि की तरह पुरी की रथयात्रा भी एक बड़ा पर्व है। पुरी के अतिरिक्त रथयात्रा का आयोजन भारत के विभिन्न शहरों में किया जाता है। वे लोग जो पुरी की रथयात्रा में शामिल नहीं हो पाते हैं। वे अपने नगर में निकलने वाली रथयात्रा में अवश्य सम्मिलित होकर पुण्य के भागी बनते हैं। 


कब निकाली जाती है जगन्नाथ रथयात्रा 


ओडिशा राज्य के पुरी शहर में हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया को निकाली जाती है। इस वर्ष रथ यात्रा 14 जुलाई को निकाली जा रही है। रथ यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ निर्मित किये जाते हैं। रथ यात्रा में सबसे आगे बलराम जी का रथ होता है। उसके पीछे में बहन सुभद्रा का रथ और सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ का रथ होता है। हालांकि इनमें सबसे ऊंचा रथ भगवान जगन्नाथ का होता है।

ऐसी मान्यता है कि जो लोग रथ खींचने में सहयोग करते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुरी में 9 दिनों तक चलने वाली यह रथयात्रा गुंडिचा मंदिर पहुँचकर संपन्न होती है। इस स्थान को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। इसके अतिरिक्त गुंडिचा मंदिर वह स्थान है जहां देव विश्वकर्मा ने तीनों देव प्रतिमाओं का निर्माण किया था। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ एक सप्ताह तक ठहरते हैं। वहीं आषाढ़ शुक्ल दशमी के दिन फिर से वापसी यात्रा शुरू होती है, जो मुख्य मंदिर तक पहुँचती है, यह बहुड़ा यात्रा कहलाती है।

कैसे बनता है भगवान जगन्नाथ का रथ


पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा का दृश्य बेहद अदभुत होता है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में रथ यात्रा प्रारंभ होती है। 3 भव्य रथों में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की सवारी निकलती है। इन तीनों रथों में भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे बड़ा होता है। इन तीनों रथों की निर्माण की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। क्योंकि रथों के निर्माण में लोहे के औजारों का प्रयोग नहीं किया जाता है। 

रथ यात्रा से 5 महीने पहले सरस्वती पूजा से रथ यात्रा के निर्माण का कार्य शुरू हो जाता है। इस यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ का रथ 65 फुट लंबा और 45 फुट ऊंचा होता है। रथ में कुल 7 फुट व्यास के 16 पहिये लगे होते हैं। इन रथों का निर्माण एक विशेष समिति की निगरानी में होता है। रथ बनाने के लिए नारियल, साल या सखुआ की लकड़ी के 1,072 टुकड़े जंगल से लाये जाते हैं। रथ निर्माण अनुभवी और पुश्तैनी शिल्पकारों की देखरेख में संपन्न होता है। इसके अतिरिक्त अन्य मजदूर भी रथ निर्माण के कार्य में अपना योगदान देते हैं। तीनों रथ पर विभिन्न प्रकार प्रतिमाएँ और चिन्ह उकेरे जाते हैं। 

जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी बातें


  • भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा के रथ नारियल की लकड़ी से बनाए जाते हैं। क्योंकि ये लकड़ी हल्की होती हैं। 
  • भगवान जगन्नाथ का रथ लाल रंग का होता है और यह अन्य रथों की तुलना में बड़ा होता है। 
  • भगवान जगन्नाथ का रथ बलभद्र और सुभद्रा के रथ के पीछे होता है।
  • भगवान जगन्नाथ के रथ के कई नाम हैं जैसे- गरुड़ध्वज, कपिध्वज, नंदीघोष आदि।
  • भगवान जगन्नाथ के रथ के घोड़ों का नाम शंख, बलाहक, श्वेत और हरिदाश्व है। इनका रंग सफेद होता है। रथ के रक्षक पक्षी राज गरुड़ हैं।
  • धार्मिक मान्यता है कि पुरी की रथयात्रा के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। 
  • स्कन्दपुराण के अनुसार आषाढ़ मास में पुरी तीर्थ में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।

जगन्नाथ मंदिर का ‘महाप्रसाद’


जगन्नाथ मंदिर ही एक ऐसा मंदिर है जहां का प्रसाद ‘महाप्रसाद’ कहलाता है, अन्यथा विश्व के सारे हिन्दू मंदिरों का प्रसाद केवल प्रसाद है। महाप्रसाद जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह सर्वोच्च प्रसाद है। जिसे बिना किसी भेदभाव हर प्राणी मात्र में वितरित किया जाता है। कहते हैं कि जगन्नाथ मंदिर की रसोई विश्व की सबसे बड़ी रसोई कही जाती है।



जगन्नाथ मंदिर से जुड़े हैरान करने वाले तथ्य


  • जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर स्थित झंडा सदैव हवा की विपरीत दिशा में लहराता है।
  • मंदिर परिसर में 752 चूल्हे हैं, जिनमें महाप्रसाद बनता है। यह जलने वाली अग्नि कभी नहीं बुझती है।
  • जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर कोई पक्षी नहीं बैठता है। इसके अतिरिक्त कोई विमान भी मंदिर के ऊपर से नहीं निकलता है।
  • दोपहर में किसी भी समय मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती है।
  • मंदिर में बनने वाला महाप्रसाद कभी भी कम नहीं पड़ता है और मंदिर के पट बंद होते ही महाप्रसाद खत्म हो जाता है।
अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की वजह से पुरी की रथ यात्रा भारत समेत पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। ओडिशा राज्य के पुरी में होने वाले यह आयोजन एक बड़ा महोत्सव है, जिसमें शामिल होने के लिए देश और दुनिया के लाखों श्रद्धालु यहां पहुचते हैं। 

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को जगन्नाथ रथयात्रा की शुभकामनाएँ!

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सूर्य ग्रहण, गुप्त नवरात्रि आज से प्रारंभ

पढ़ें ग्रहण का राशिफल, गुप्त नवरात्रि पूजा विधि! आज यानि 13 जुलाई को घटित हो रहा है साल 2018 का दूसरा सूर्य ग्रहण, साथ ही जानें आज से शुरू हो रहे आषाढ़ नवरात्र का महत्व।


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आज यानि 13 जुलाई 2018 से प्रारंभ हो गई है और 21 जुलाई को इसका समापन होगा, इसे गायत्री नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। आज ही साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भी घटित हो रहा है। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इसका सूतक और धार्मिक महत्व मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण- 13 जुलाई 2018
समयअवधिदृश्यता
सुबह 07:18:23 से 09:43:44 तक2 घंटे 25 मिनटदक्षिण ऑस्ट्रेलिया, पेसिफिक, हिन्द महासागर



हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि शुरू होती है। हिन्दू धर्म में प्रतिवर्ष 4 नवरात्रि मनाई जाती है। इनमें चैत्र और शरद नवरात्रि व पौष और आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि होती है। चैत्र और शरद नवरात्रि अधिक उल्लास के साथ मनाई जाती है। जबकि गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। गुप्त नवरात्रि में माता काली के गुप्त स्वरुप की पूजा करने का विधान है। तंत्र साधना के लिए की जाने वाली पूजा कठिन होती है, इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2018 मुहूर्त
घटस्थापना मुहूर्त8:17 से 10:09 बजे तक
अवधि1 घंटा 52 मिनट

नोट: घटस्थापना मुहूर्त अमावस्या तिथि में होगा। वहीं प्रतिपदा सुबह 8:19 के बाद प्रारंभ होगी। घटस्थापना के लिए जानें अपने शहर का पंचांग

घटस्थापना की पूजा विधि


● मिट्टी के बर्तन में सप्त धान्य (सात प्रकार के अनाज) को रखें

● अब एक कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बाँधकर उसे उस मिट्टी के पात्र पर रखें

● अब कलश के ऊपर अशोक अथवा आम के पत्ते रखें

● अब नारियल में कलावा लपेट लें

● इसके उपरान्त नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पल्लव के बीच में रखें

● घटस्थापना पूर्ण होने के बाद देवी का आह्वान करें


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पर बन रहे हैं विशेष योग


गुप्त नवरात्रि की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी और 21 जुलाई को इसका समापन भी सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा। इस योग को शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है इसलिए इस योग में देवी शक्ति की पूजा का विशेष फल प्राप्त होगा।

गुप्त नवरात्रि का महत्व


आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में भी आम नवरात्रि की तरह माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। इस नवरात्रि में तांत्रिक सिद्धियों के लिए विशेष पूजा और साधना की जाती है। गृहस्थ साधकों को गुप्त नवरात्रि के इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। इसके प्रभाव से घर-परिवार में धन-धान्य व सुख-समृद्धि आती है।

गुप्त नवरात्रि में क्या न करें


  • इन 9 दिनों में माता की साधना करने वाले जातकों को काले कपड़े नहीं पहनना चाहिए।
  • गुप्त नवरात्रि के दौरान व्रत व अनुष्ठान करने वाले भक्तों को दिन में नहीं सोना चाहिए।
  • देवी आराधना के इस पर्व में किसी नारी का अपमान नहीं करना चाहिए।
  • इन नौ दिनों में बाल और नाखून नहीं काटना चाहिए।
  • प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।

चैत्र और शरद नवरात्रि की तरह ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का भी बहुत महत्व है। क्योंकि ये नौ दिन देवी शक्ति की आराधना के दिन है और इन दिनों में माता की भक्ति से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुभकामनाएँ!

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सूर्य ग्रहण कल, जानें ज्योतिषीय प्रभाव

4 राशि वालों के लिए खुलेंगे समृद्धि के द्वार! जानें कल यानि 13 जुलाई 2018 को होने वाले सूर्य ग्रहण का समय, प्रकार और दृश्यता, साथ ही पढ़ें सभी राशियों पर इस ग्रहण का होने वाला असर।


साल 2018 का दूसरा आंशिक सूर्य ग्रहण 13 जुलाई को लगने जा रहा है। इस ग्रहण की अवधि लगभग 2 घंटे 25 मिनट होगी। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा इसलिए यहां पर इसका सूतक और धार्मिक महत्व मान्य नहीं होगा। खास बात है कि जुलाई के महीने में दो ग्रहण घटित होंगे। इसी महीने 27 जुलाई को पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। वहीं इसके बाद 11 अगस्त को साल का तीसरा सूर्य ग्रहण घटित होगा।

सूर्य ग्रहण- 13 जुलाई 2018
समयअवधिदृश्यता
सुबह 07:18:23 से 09:43:44 तक2 घंटे 25 मिनटदक्षिण ऑस्ट्रेलिया, पेसिफिक, हिन्द महासागर

कल यानि 13 जुलाई 2018 को घटित होने वाला सूर्य ग्रहण मिथुन राशि और पुनर्वसु नक्षत्र में लग रहा है। इस नक्षत्र से संबंधित राशि के लोगों के लिए यह ग्रहण कष्टकारी सिद्ध हो सकता है। वहीं इस ग्रहण के प्रभाव से मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों को विशेष लाभ होने की संभावना है।



यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए क्लिक करें: चंद्र राशि कैल्कुलेटर

मेष: आर्थिक लाभ और नौकरी व व्यवसाय में सफलता मिलने की संभावना...आगे पढ़ें

वृषभ: आय की तुलना में खर्च बढ़ेंगे, स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है...आगे पढ़ें

मिथुन: वाहन सावधानी से चलाएं और सेहत पर ध्यान देने की जरुरत होगी...आगे पढ़ें

कर्क: परिजनों के साथ विवाद की स्थिति बन सकती है। कठोर शब्द बोलने से बचें...आगे पढ़ें


सिंह: छोटी दूरी की यात्रा के योग बनेंगे और कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है...आगे पढ़ें

कन्या: माता जी की सेहत कमजोर रह सकती है। पारिवारिक समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं...आगे पढ़ें

तुला: गलतफहमी होने से लव लाइफ में मतभेद हो सकते हैं। धन लाभ धीमी गति से होगा...आगे पढ़ें

वृश्चिक: नौकरी और व्यवसाय में अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। सफलता मिलने से प्रसन्न रहेंगे...आगे पढ़ें

धनु: जीवनसाथी और बिजनेस पार्टनर को लेकर गलतफहमी व विवाद हो सकता है...आगे पढ़ें

मकर: धन हानि और मान-प्रतिष्ठा में कमी होने से निराशा रह सकती है...आगे पढ़ें

कुंभ: लंबी दूरी की यात्राएं कष्टकारी साबित हो सकती है...आगे पढ़ें

मीन: आय के नये साधन बनेंगे और सभी ओर से लाभ की प्राप्ति होगी...आगे पढ़ें


ग्रहण का सूतक काल


यह आंशिक सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इसका सूतक और धार्मिक महत्व मान्य नहीं होगा। लेकिन जिन देशों और स्थानों पर यह सूर्य ग्रहण दृश्य होगा, वहां इसका सूतक काल 12 घंटे पूर्व से लग जाएगा।

सूर्य ग्रहण के समय क्या करें, क्या न करें


मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक शक्तियां प्रबल हो जाती हैं। जिनका मानव समुदाय पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए कुछ कार्य अवश्य रूप से करना चाहिए और कुछ कार्य बिल्कुल नहीं करने चाहिए।
  • सूर्य ग्रहण से घटित होने से पहले दूध-दही और बने हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें। ऐसा करने से इन पदार्थों पर ग्रहण का असर नहीं होता है।
  • ग्रहण से पहले भोजन कर लें और ग्रहण के दौरान कुछ न खाएं।
  • ग्रहण के समय पूजन, भगवान की मूर्ति और तुलसी व शामी के पौधे का स्पर्श न करें।
  • गर्भवती स्त्रियां ग्रहण के दौरान काटने, छीलने और सिलने का कार्य करने से बचें। चाकू, कैंची और सुई का उपयोग भूलकर भी न करें।
  • ग्रहण के समय जितना अधिक से अधिक हो सके सूर्य मंत्र और ईश्वर का ध्यान करें।

ग्रहण समाप्ति के बाद करें ये काम


  • ग्रहण समाप्ति पर स्वयं स्नान करे और भगवान की मूर्तियों को स्नान कराएं।
  • तुलसी व शमी के पौधे में गंगाजल का छिड़काव करें।
  • ग्रहण के बाद गरीबों को दान और दक्षिणा दें। 
आधुनिक विज्ञान के अनुसार ग्रहण एक खगोलीय घटना है। हालांकि हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है। क्योंकि ग्रहण विभिन्न प्रकार से मानव समुदाय को प्रभावित करता है और इसका असर देश और दुनिया में देखने को मिलता है, इसलिए ग्रहण के दौरान हमें उपरोक्त बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।

एस्ट्रोसेज की ओर से उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ!

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अब कुंडली शेयर करना, नोट्स लिखना हुआ और आसान

एस्ट्रोसेज क्लाउड के नए वर्ज़न 11.6 में अब कुंडली शेयर करना, नोट्स लिखना, कुंडली का क्लाउड पर बैकअप लेना और सर्वर पर सेव कुंडली को ढूँढना हुआ और आसान। पायें और भी बहुत कुछ एस्ट्रोसेज कुंडली ऍप के नये संस्करण में। 

एस्ट्रोसेज कुंडली ऍप अपने यूजर्स को दिन-प्रतिदिन बेहतर सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में अब एस्ट्रोसेज ने अपनी क्लाउड सर्विसेज में दो अहम बदलाव किये हैं, साथ ही एस्ट्रोसेज कुंडली ऍप में जन्म कुंडली सेवा को और आसान बनाने का प्रयास किया है। ये बदलाव लगातार आपके द्वारा मिल रहे सुझावों के आधार पर किये हैं। 


एस्ट्रोसेज कुंडली ऍप और क्लाउड सर्विस में किये गये मुख्य बदलाव


  • अब मोबाइल से सर्वर पर लें कुंडलियों का बैकअप
  • जन्म कुंडली में नोट्स लिखने की सुविधा
  • ई-मेल, मैसेंजर या अन्य माध्यम से शेयर करें कुंडली
  • सर्वर और मोबाइल में सुरक्षित कुंडली आसानी से खोजें

विशेष रूप से ज्योतिषाचार्य, ज्योतिष शोधार्थी और आम यूजर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए क्लाउड सर्विस में दो प्रमुख बदलाव किये गये हैं।

कुंडली को सर्वर पर सेव करने की सुविधा: इस नई सुविधा के माध्यम से आप उन तमाम कुंडलियों का सर्वर पर बैकअप ले सकते हैं, जो आपके मोबाइल में सेव है। दरअसल हमारी क्लाउड सर्विस का लाभ उठा रहे यूजर्स अक्सर हमसे पूछते थे कि, वे अपने मोबाइल या अन्य डिवाइस में सेव कुंडलियों को सर्वर पर कैसे सिंक करें या उनका बेकअप कैसे लें। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने क्लाउड सर्विस में इस फीचर्स को जोड़ा है। इस फीचर्स का फायदा यह है कि आप मोबाइल में सेव कुंडलियों को आसानी से सर्वर पर सिंक कर सकते हैं। इससे यह लाभ होगा कि अगर आपका मोबाइल खराब या गुम हो जाता है, तो भी आपकी सभी कुंडलियां हमारे सर्वर पर सुरक्षित रहेंगी। साथ ही आप मोबाइल के अलावा कुंडलियों को कंप्यूटर, लैपटॉप या अन्य किसी डिवाइस की मदद से भी प्राप्त कर सकते हैं।


जन्म कुंडली में नोट्स लेने की सुविधा: इस सुविधा की मदद से आप कुंडली में आवश्यक जानकारी, योग या महत्वपूर्ण तथ्य अलग से लिख सकते हैं, जो विशेष रूप से ध्यान देने योग्य व जरूरी हों। साथ ही केस स्टडी के लिहाज से भी आवश्यक हों। क्योंकि कई बार ज्योतिषाचार्य कुंडली के आधार पर उपाय और सुझाव देते हैं। इस सुविधा की मदद से ज्योतिषी उन तमाम बातों को नोट कर सकते हैं, जो उन्होंने किसी व्यक्ति को बताई थी। यह सेवा हमारी वेब पर पहले से मौजूद थी लेकिन अब इसे हमने ऍप में जोड़ा है।



क्लाउड सर्विसेज़ के अलावा एस्ट्रोसेज कुंडली ऍप के कुंडली सेक्शन में दो नई सुविधा प्रदान की गई हैं। 

ई-मेल, मैसेंजर या अन्य माध्यम से शेयर करें कुंडली: इस सुविधा के माध्यम से आप किसी अन्य व्यक्ति को अपनी कुंडली भेजने के लिए सिर्फ कुंडली का लिंक शेयर कर सकते हैं। ई-मेल, व्हाट्स ऍप या अन्य मैसेंजर पर इस लिंक की मदद से संबंधित व्यक्ति को आपकी कुंडली प्राप्त हो जाएगी।





मोबाइल में सुरक्षित कुंडली आसानी से खोजें: कई यूजर्स की शिकायत के बाद हमने कुंडली सेक्शन के यूज़र इंटरफेस में बदलाव किया है। कुंडली ओपन सेक्शन में आपको कुंडली खोजने के लिए ज्यादा स्क्रॉल करने की आवश्यकता नहीं होगी। आप मोबाइल और सर्वर दोनों पर सुरक्षित कुंडलियों का आसानी से पता लगा सकते हैं और उन्हें प्राप्त कर सकते हैं। सर्च के अलावा आप कुंडली को ब्राउज करके भी खोज सकते हैं।



तकनीक की मदद से हम अपने यूजर्स को बेहतर सेवा देने का लगातार प्रयास करते आ रहे हैं। हम आशा करते हैं कि क्लाउड सर्विस और एस्ट्रोसेज कुंडली ऍप में किये गये ये महत्वपूर्ण बदलाव आपके लिए सुविधाजनक होंगे। अगर हमारी सेवाओं को लेकर आपके पास कोई शिकायत या सुझाव हैं तो हम से अवश्य साझा करें।
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गुरु आज तुला राशि में होंगे मार्गी, जानें प्रभाव

बृहस्पति की कृपा से होगा भाग्य उदय! पढ़ें बृहस्पति के तुला राशि में मार्गी होने का ज्योतिषीय प्रभाव और जानें आपके जीवन पर क्या होगा इसका असर।


वैदिक ज्योतिष में गुरु का गोचर महत्वपूर्ण माना जाता है। बृहस्पति एक शुभ ग्रह है, जो कि ज्ञान, धर्म, संतान और विवाह का कारक होता है। गुरु की कृपा से करियर में सफलता व उन्नति, मजबूत आर्थिक स्थिति, विवाह और संतान की प्राप्त होती है। बृहस्पति के शुभ प्रभाव से व्यक्ति का मन धर्म और आध्यात्मिक कार्यों में लगता है।

कुंडली में बृहस्पति की स्थिति बलवान होने से व्यक्ति को परिवार, समाज और दुनिया में सम्मान की प्राप्ति होती है। वहीं इसके निर्बल होने से कमजोर आर्थिक स्थिति, विवाह और संतान सुख में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

देव गुरु बृहस्पति 10 जुलाई 2018, मंगलवार रात्रि 10:46 बजे तुला राशि में मार्गी होंगे। गुरु के मार्गी होने का असर सभी राशियों पर देखने को मिलेगा। कुछ राशि वालों के लिए गुरु का मार्गी होना भाग्योदय का कारण बनेगा और अन्य राशि के लोगों को परेशानियों से राहत मिलेगी। इसके अलावा बृहस्पति के मार्गी होने से खाद्य पदार्थों के भाव में तेजी-मंदी बनी रहेगी, साथ ही राजनीतिक परिवर्तन के योग भी बनेंगे।

पढ़ें बृहस्पति के मार्गी होने का राशिफल- 


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। जानें चंद्र राशि कैल्कुलेटर से अपनी चंद्र राशि

मेष


गुरु के मार्गी होने से रुके और अटके हुए कार्य पूर्ण होंगे और उनमें तेजी देखने को मिलेगी। विशेष रूप से दाम्पत्य जीवन में चली आ रही परेशानियां दूर होंगी। यदि जीवनसाथी के साथ टकराव अधिक बढ़ गया है तो गुरु के प्रभाव से यह कम हो जाएगा और वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी। 10 जुलाई के बाद नौकरी पेशा जातकों को पदोन्नति की सौगात मिलेगी, साथ ही ट्रांसफर के योग भी बनेंगे। व्यवसाय करने वाले जातकों के कार्यक्षेत्र में विस्तार होगा, साथ ही खोई हुई प्रतिष्ठा और सम्मान की प्राप्ति होगी। 

उपाय: बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करें- ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:’

वृषभ


गुरु के मार्गी होने से रूका या अटका हुआ धन प्राप्त होगा, हालांकि इसके साथ-साथ खर्च भी बढ़ेंगे। गुरु की कृपा से नौकरी और व्यवसाय में तरक्की होगी। बिजनेस करने वाले जातकों को नये कॉन्ट्रेक्ट मिलेंगे। वहीं नौकरी पेशा जातकों को भी तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे, साथ ही अधिकारियों से मतभेद खत्म होंगे। अविवाहित युवक-युवतियों के लिए विवाह के योग बनेंगे और इस संबंध में आ रही बाधाएँ दूर होंगी। यदि किसी खास काम को लेकर कोई योजना बना रखी है तो उसमें सफलता मिलने की पूरी संभावना है।

उपाय: गुरुवार को हल्दी व चना दाल दान में दें और रोजाना गाय को रोटी खिलायें।

मिथुन


देवगुरु बृहस्पति की कृपा से स्थाई संपत्ति के प्रबल योग बनेंगे। वे जातक जो लंबे समय से नया कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, उन्हें इस कार्य में आशा अनुरुप सफलता मिलेगी और नये कार्य को प्रारंभ करने में आ रही सभी परेशानियां दूर होंगी। प्रेम संबंधों में और मधुरता आएगी, साथ ही संभावना है कि आप अपने प्रियतम के साथ विवाह के बंधन में बंध जाएँ। गुरु का मार्गी होना आपके लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी होगा। आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों में उन्नति प्राप्त होगी। छात्र जातकों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलने की पूरी संभावना है।

उपाय: ब्राह्मण को शक्कर दान करें और गाय को रोटी खिलाएं।


कर्क


गुरु का मार्गी होना कर्क राशि वाले जातकों के लिए भाग्योदय का कारक बन सकता है। भूमि, भवन और प्रॉपर्टी संबंधित कार्यों में आ रही अड़चनें समाप्त होगी। गुरु की कृपा से वाहन खरीद के योग बनेंगे, साथ ही यात्राओं से धन लाभ होने की संभावना होगी। बृहस्पति के प्रभाव से धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और इसके प्रभाव से परिवार में मान-सम्मान बढ़ेगा।

उपाय: बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करें- ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:’

सिंह


देवगुरु बृहस्पति की कृपा से समाज में किसी पद की प्राप्ति होगी और मान-सम्मान बढ़ेगा। धर्म और अध्यात्म के कार्यों में रुचि बढ़ेगी। यात्रा के योग भी बनेंगे। विशेषकर छात्र जातक उच्च शिक्षा के लिए विदेश जा सकते हैं। विवाह संबंधी मामलों में आ रही अड़चनें दूर होंगी और शादी होने की संभावना बनेगी। गुरु के मार्गी होने से व्यापारी वर्ग को अधिक यात्राएं करनी पड़ सकती है हालांकि इन यात्राओं से धन लाभ भी होगा। सांसारिक सुखों की प्राप्ति होगी, साथ ही नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति मिलने के योग बनेंगे।

उपाय: गुरुवार को केले के पेड़ का पूजन करें।

कन्या


गुरु के मार्गी होने पर कन्या राशि के जातकों को व्यावसायिक लाभ मिलने की संभावना है। वे जातक जो लंबे समय से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं उन्हें राहत मिलेगी, साथ ही मानसिक तनाव और परेशानियों का भी अंत होगा। वे सभी योजनाएं सफल होंगी, जिनके बारे में आपने सोच रखा है। इन योजना और कार्यों के सफल होने से धन लाभ की प्राप्ति होगी। पारिवारिक रिश्तों के लिहाज से भी अच्छा समय आने वाला है। परिवार में आपके निर्णयों को सराहा और स्वीकार किया जाएगा।

उपाय: अपने घर में नियमित रूप से कपूर का एक दीया जलायें।


तुला


देव गुरु बृहस्पति के मार्गी होने से तुला राशि के जातकों को कई सौगातें मिलने की संभावना है। आपको कई सुनहरे अवसरों का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। हालांकि इन मौकों को आपको पहचानना होगा। धन वृद्धि होने के साथ-साथ खर्च भी बढ़ेंगे इसलिए खर्चों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें। यह समय आपसी संबंधों के लिए अच्छा होगा। इस दौरान रिश्तों में सुधार होगा। बस अहंकार त्याग कर अपने टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने का प्रयास करें। आर्थिक तरक्की की दृष्टि से भी उत्तम योग बनेंगे और आपके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होगी।

उपाय: गुरुवार के दिन शुद्ध घी का दान करें।

वृश्चिक


गुरु के मार्गी होने से वृश्चिक राशि वाले जातकों को इच्छित सफलता मिलेगी। प्रॉपर्टी संबंधी कार्य व योजना के लिए अनुकूल समय होगा। आप भूमि, भवन या घर का सौंदर्यीकरण करवाने का विचार बनाएंगे। इसके साथ ही वाहन खरीद के योग भी बनेंगे। दाम्पत्य जीवन में चली आ रही परेशानियों का अंत होगा। प्रेम संबंधी मामलों के लिए भी यह समय अच्छा होगा। आप अपने प्रियतम के साथ विवाह के बंधन में बंध सकते हैं। वहीं विवाहित जातकों को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है।

उपाय: श्री शिव रुद्राभिषेक कराएं।

धनु


देवगुरु बृहस्पति की कृपा से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उत्तम योग बनेंगे। वे जातक जो मानसिक और आर्थिक संकटों से परेशान हैं उनकी सभी समस्याएँ दूर होंगी। आय के नये साधन बनेंगे और धन अर्जन होगा। वे जातक जो बिजनेस करते हैं उनके व्यापार में विस्तार होगा और सफलता मिलेगी। वहीं वे जातक जिन्हें नौकरी की तलाश है उन्हें रोजगार के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। बस नकारात्मक विचार वाले लोगों से दूर रहने की कोशिश करें। गुरु के प्रभाव से धर्म के कार्यों में रुचि बढ़ेगी और आप धार्मिक कार्यों में शामिल होंगे।

उपाय: बृहस्पति यंत्र की स्थापना करें और उसकी नियमित पूजा करें।


मकर


बृहस्पति का मार्गी होना भाग्योदय की संभावना को दर्शाता है। इसके परिणामस्वरुप आप कोई बड़ी योजना बनाने में सफल होंगे। धन के नये साधन प्राप्त होंगे। पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में चल रही उठापटक बंद होगी और रिश्तों में मधुरता आएगी। वे जातक जो विदेश या तीर्थ यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं उनके लिए समय बहुत शुभ है। बाहर की यात्रा करने से आपके अंदर वैचारिक परिवर्तन होंगे। गुरु की कृपा से इस समय में आप कोई नया कारोबार भी शुरू कर सकते हैं।

उपाय: हर गुरुवार को सुबह के समय पीपल के वृक्ष को बिना स्पर्श किये जल चढ़ाएं।

कुंभ


गुरु मार्गी होने से आर्थिक तरक्की के लिए किये गये प्रयासों में सफलता मिलेगी। यानि अगर आपने पूर्व कोई कोशिश की है तो उसका फल अब मिलने वाला है। वे जातक जो बिजनेस करते हैं लेकिन लाभ नहीं होने से परेशान हैं, वे लोग अपने व्यवसाय में परिवर्तन कर सकते हैं। वहीं नौकरी पेशा जातकों के ट्रांसफर के योग बन रहे हैं, साथ ही अधिकारी वर्ग के सहयोग से प्रमोशन मिलेगा और सैलरी में बढ़ोत्तरी होगी। अविवाहित युवक-युवतियां शादी के बंधन में बंध सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुंभ राशि के जातकों को नये वस्त्र और आभूषण की प्राप्ति होगी।

उपाय: पेंट या शर्ट की जेब में पीले रंग का रुमाल रखें और मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।

मीन


बृहस्पति के मार्गी होने से मीन राशि के जातक अपने कार्यक्षेत्र में स्वयं को स्थापित करने में कामयाब होंगे। वे जातक जो विवाह की तैयारी में हैं उनके लिए बेहद शुभ समय है। क्योंकि गुरु की कृपा से शादी में आ रही बाधाएँ दूर होंगी। वहीं विवाहित जातकों के जीवन में मधुरता और बढ़ेगी। यदि कोई अनबन चल रही है तो वह दूर हो जाएगी। आर्थिक परेशानियां खत्म होंगी और नये कार्यों का शुभारंभ होगा। पैतृक संपत्ति मिलने से प्रसन्नता होगी।

उपाय: पुखराज रत्न को सोने की अंगूठी में जड़वा कर गुरुवार के दिन तर्जनी अंगुली में धारण करें।



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