मंगला गौरी व्रत कल: सावन में शिव जी के साथ पाएँ माँ गौरी का वरदान

मंगला गौरी व्रत सावन के महीने में प्रथम मंगलवार से प्रारंभ होकर माह के सभी मंगलवारों को किया जाने वाला व्रत है। यह एक ऐसा व्रत है जो पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती की कृपा पाने का सबसे सुलभ मौका प्रदान करता है और ऐसा ही एक मौका कल मिलेगा जब सावन का पहला मंगला गौरी व्रत पूरे विधि-विधान के रखा जाएगा। 


सावन का महीना हर मामले में बहुत ही पवित्र महीना है क्योंकि जहां एक ओर पूरे महीने भक्तजन भगवान शंकर की आराधना में लगे रहते हैं और प्रत्येक सोमवार को शंकर भगवान का व्रत रखते हैं, वहीं दूसरी ओर सावन के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती की प्रसन्नता और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए सुहागिन स्त्रियां और अविवाहित कन्याएं मंगला गौरी व्रत रखती हैं।

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देश के विभिन्न राज्यों में मंगला गौरी व्रत


माँ पार्वती जो भगवान शंकर की सहधर्मिणी हैं उनकी कृपा पाने के लिए विभिन्न स्थानों पर मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। केवल किसी विशेष राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे देश में यह पूरे रीति-रिवाज के अनुसार मनाया जाता है। उत्तर भारत के राज्य उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, बिहार, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा झारखंड आदि राज्यों में मंगला गौरी व्रत के नाम से जाना जाता है। दूसरी ओर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और समस्त दक्षिण भारत में श्री मंगला गौरी व्रथम के नाम से जाना जाता है। 

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सावन के दौरान मंगला गौरी व्रत का महत्व


अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए हमारे देश में अनेक व्रत रखे जाते हैं जिनमें से मंगला गौरी व्रत का अत्यधिक महत्व माना गया है। सावन के दौरान जहां सोमवार के दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा होती है, तो मंगलवार के दिन माता पार्वती को समर्पित मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है, जो माता पार्वती की ही पूजा करने के लिए होता है। सावन के महीने में माता पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या द्वारा और व्रत रखकर भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त किया था इसलिए सभी सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए माता गौरी का व्रत रखती हैं। 

ऐसी मान्यता है कि जो स्त्री मंगला गौरी व्रत रखती हैं, उसके पति की आयु लंबी होती है और उनके दांपत्य जीवन में सभी खुशियां मौजूद होती हैं। यदि कुंडली में मंगल दोष भी हो तो उसके संबंध के लिए भी मंगला गौरी व्रत रखना सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अतिरिक्त जो कन्याएं अविवाहित हैं, वे भी यह व्रत रख सकती हैं। इससे उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि श्रावण मास में आने वाले मंगला गौरी व्रत को सभी सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे विधि-विधान के अनुसार रखती हैं और नियमों का पालन करती हैं। 

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मंगला गौरी व्रत 2019 


मंगला गौरी व्रत श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाता है। चूंकि यह व्रत मंगलवार को किया जाता है, इस हेतु 'मंगला' और गौरी नाम देवी पार्वती का ही एक नाम है, इसलिए, इस व्रत का नाम मंगला गौरी व्रत है। 2019 में मंगला गौरी व्रत की तिथियाँ:

प्रथम मंगला गौरी व्रत 
मंगलवार 
द्वितीय मंगला गौरी व्रत 
मंगलवार 
तृतीय मंगला गौरी व्रत 
मंगलवार 
चतुर्थ मंगला गौरी व्रत 
मंगलवार 

सावन सोमवार व्रत 2019 कब है, जानने के लिए यहां क्लिक करें

मंगला गौरी व्रत क्यों किया जाता है


ऐसी मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत करने से सौभाग्यवती स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। सावन के महीने में ही माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। यही कारण है कि सभी स्त्रियां मंगला गौरी व्रत पूरे मन और विधि विधान से करती हैं, ताकि उन्हें भी एक अच्छा वर प्राप्त हो।

मंगला गौरी व्रत सामग्री


मंगला गौरी व्रत की पूजा के दौरान विवाहित महिलाओं (सुहागन) के साथ-साथ 16 चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। अनुष्ठान के दौरान आवश्यक समाग्री से शुरुआत करते हैं। सावन के प्रत्येक मंगलवार को, आपको देवी गौरा की पूजा के लिए विशिष्ट प्रक्रियाओं का पालन करना होगा, और आपको निम्नलिखित वस्तुओं या समाग्री की आवश्यकता होगी:

  • एक चौकी या वेदी
  • सफेद और लाल कपड़ा
  • कलश
  • गेहूँ के आटे से बना एक चौमुखा दीया (दीपक) 
  • 16 कपास से बनी चार बत्तियां 
  • देवी पार्वती की मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी का पात्र
  • अभिषेक के लिए: पानी, दूध, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी का मिश्रण)
  • देवी गौरी के लिए कपड़े, भगवान गणेश के लिए जनेऊ
  • पवित्र लाल धागा (कलावा / मौली), रोली या सिंदूर, चावल, रंग, गुलाल, हल्दी, मेंहदी, काजल
  • 16 प्रकार के फूल, माला, पत्ते और फल
  • गेहूं, लौंग, इलायची से बने 16 लड्डू
  • सात प्रकार का अनाज
  • 16 पंचमेवा (5 प्रकार के सूखे मेवे)
  • 16 सुपारी, सुपारी, लौंग
  • सुहाग पिटारी (सिंदूर, काजल, मेंहदी, हल्दी, कंघी, तेल, दर्पण, 16 चूड़ियाँ, पैर की अंगुली के छल्ले, पायल, नेल पॉलिश, लिपस्टिक, हेयरपिन, आदि)
  • नैवेघ / प्रसाद

मंगला गौरी व्रत विधि


  • ब्रह्म मुहूर्त में सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ, नए कपड़े पहनें।
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और वेदी स्थापित करें। 
  • वेदी के आधे भाग पर सफेद कपड़ा बिछा दें और उसके ऊपर चावल के नौ छोटे ढेर लगा दें। 
  • दूसरे आधे भाग पर लाल कपड़ा बिछाएं और उसके ऊपर 16 छोटे गेहूं के दाने बिछाएं।
  • अब चौकी पर अलग से कुछ चावल रखें, और एक सुपारी पर, पत्तल पर एक स्वास्तिक का चित्र बनाकर, उस पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें। 
  • उसी तरह, कुछ गेहूं भी रखें और उनके ऊपर कलश रखें।
  • बर्तन में पांच सुपारी रखें और उसके ऊपर एक नारियल रखें। 
  • अंत में, वेदी पर गेहूं के आटे का दीया (दीपक) रखें और 16 लटों वाली चारों बत्तियां जलाएं।
  • भगवान गणेश की पूजा करके शुरू करें, जो किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने से पहले हमेशा व्रत रखना चाहिए। 
  • जनेऊ (कपड़े का प्रतीक) और रोली-चावल और सिंदूर चढ़ाएं। 
  • इसी प्रकार कलश और दीए की वंदना करें। 
  • इसके बाद, नवग्रह (नौ ग्रह) के रूप में चावल के नौ ढेर और देवी के सोलह अवतारों के रूप में गेहूं के 16 ढेर की पूजा करें। 
  • एक ट्रे में, साफ और पवित्र मिट्टी लें, और इसके साथ देवी गौरी की एक मूर्ति बनाएं। 
  • अब निम्न मंत्र का जाप करें, शुद्ध मन से भक्ति से भरकर व्रत का संकल्प करें: 
  • मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरी प्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरी व्रतमहं करिष्ये।
  • मूर्ति को पूरी श्रद्धा के साथ वेदी पर रखें और उसका अभिषेक पंचामृत, दूध और शुद्ध जल से करें और फिर देवी को कपड़े पहनाएं।
  • देवी गौरा का षोडशोपचार पूजन रोली-चावल से करें और उन्हें निम्न मंत्र का जाप करते हुए सुहागन (विवाहित महिला) के 16 सौंदर्य प्रसाधन अर्पित करें: कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। 
  • नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्।।
  • इसके बाद, उसे 16 फूल, माला, फल, पत्ते, गेहूं से बने लड्डू, सुपारी, सुपारी, लौंग, इलायची और पंचमेवा (5 प्रकार के सूखे मेवे) चढ़ाएं।
  • अब पूर्ण मंगला गौरी व्रत कथा (कहानी) पढ़ें और उसके बाद आरती करें। 
  • प्रत्येक बुधवार को व्रत का समापन करने के बाद, गौरी विसर्जन शुद्ध मन से करें।
  • यह कार्य किसी झील, तालाब या नदी में पूरी श्रद्धा के साथ करें।
  • अपने संकल्प / व्रत के अनुसार उद्यापन के साथ व्रत पूरा करें। 
  • ऊपर बताए विधि विधान के अनुसार मंगला गौरी पूजा पूरी करने के बाद अपने संकल्प समय के अंतिम मंगलवार को अपने पूरे परिवार के साथ हवन करें। 
  • बाद में, एक कुशल पुजारी के मार्गदर्शन में, उचित रस्मों का पालन करते हुए 16 विवाहित महिलाओं को भोजन कराएं।

मंगला गौरी व्रत कथा


मंगला गौरी व्रत करने वाली स्त्रियों को मंगला गौरी व्रत कथा पढ़नी चाहिए और सुननी चाहिए। यह कथा इस प्रकार है: धरमपाल नाम का एक व्यापारी था। वह बहुत धनी था और उसने एक सुंदर महिला से शादी की थी। उनके पास सभी सुख-सुविधाएं थीं। हालाँकि, उनके जीवन में केवल एक चीज की कमी थी, वो ये कि उनके कोई संतान नहीं। इसलिए उन्होंने प्रभु से प्रार्थना की और एक पुत्र का वरदान प्राप्त किया। उन्हें जल्द ही पता चला कि बच्चा बहुत कम अवधि तक जीवित रहेगा और उसके 16 वें वर्ष में पहुँचते ही उसकी मृत्यु हो सकती है। 

भगवान की कृपा से, उनके बेटे की शादी उसके सोलहवें जन्मदिन से पहले एक लड़की से हुई, जो हमेशा मंगला गौरी व्रत रखती थी। इस व्रत को रखते हुए माँ ने वरदान मांगा कि उनकी बेटी कभी विधवा न बने। इसी के परिणाम स्वरूप, शादी के बाद, 16 साल की उम्र में मरने के बजाय, धरमपाल के बेटे ने 100 साल तक एक खुशहाल और सुखी जीवन व्यतीत किया। इस प्रकार, हिंदू धर्मग्रंथ बताते हैं कि किसी को भी मंगला गौरी का व्रत श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। ऐसा करने से वैवाहिक सुख, पुत्रों और पौत्रों का वरदान, पति / पुत्र की दीर्घायु और भक्तों के जीवन में सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।

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शीघ्र विवाह के लिए मंगला गौरी व्रत की पूजा और नियम


किसी भी व्रत को करने के कुछ मुख्य नियम होते हैं, जिन्हें जान लेना अत्यंत आवश्यक होता है, तभी उस व्रत का पूरा फल आपको प्राप्त होता है। जिन कन्याओं को विवाह होने में समस्या का सामना करना पड़ रहा है या उनकी कुंडली में मांगलिक दोष है उन्हें मंगला गौरी व्रत के भी कुछ नियम हैं जिन्हें आप सरलता से समझ समझकर माता की पूजा कर सकती है:

  • सावन के मंगलवार को प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध हो जाएं। 
  • प्रातकाल अथवा संध्याकाल में माता गौरी की पूजा करें। 
  • उनके समक्ष देसी घी का एक बड़ा सा चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें। 
  • माता पार्वती को 16 प्रकार के पुष्प अर्पित करें। 
  • ध्यान रखें उसमें लाल रंग के पुष्प अवश्य होने चाहिए क्योंकि लाल रंग माता को अत्यंत प्रिय है और यह अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। 
  • इसके बाद माता को चुनरी और चूड़ियां पहनाएँ। 
  • ॐ ह्रीं गौर्यै नमः, इस मंत्र का जाप माता की प्रतिमा के समक्ष कम से कम 108 बार करें। 
  • इसके बाद आप अपनी मनोवांछित कामना माता के समक्ष रख सकते हैं अर्थात शीघ्र विवाह की कामना कर सकती हैं। 

दांपत्य जीवन में सुख और संबंधों में प्रेम की वृद्धि के लिए मंगला गौरी व्रत 


  • आपको संध्या के समय में माता गौरी की पूजा अर्चना करनी चाहिए। 
  • माता की प्रतिमा के समक्ष देसी घी के तीन दीपक जलाएं। 
  • क्योंकि आप एक विवाहित स्त्री हैं, इसलिए आपको माता के चरणों में सिंदूर अर्पित करना चाहिए। 
  • माता को लाल चुनरी और लाल पुष्प अर्पित करें। 
  • तदोपरांत 16 इलायची चढ़ाएं और इत्र भी समर्पित करें। 
  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चै मंत्र का कम से कम 11 माला जप करें। 
  • इसके बाद माता से अपने दांपत्य जीवन में आने वाली समस्याओं को बताकर उनसे इन समस्याओं को दूर करने की प्रार्थना करें। 
  • उसके बाद प्रसाद स्वरूप उन सभी इलायचियों को अपने पास प्रसाद के रूप में रख लें और धीरे धीरे खाएं। 

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वैवाहिक संबंधों को टूटने से बचाने के लिए मंगला गौरी व्रत


कई बार हमारे जीवन में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जब हमारा दांपत्य जीवन अत्यंत ही कठिन दौर से गुजर रहा होता है। स्थिति यहां तक आ जाती है कि तलाक की नौबत आने लगती है और हमारा रिश्ता चाहकर भी दोबारा नहीं जुड़ रहा होता है। ऐसे में माता गौरी की कृपा प्राप्ति के लिए मंगला गौरी व्रत रखने से आपके वैवाहिक संबंधों में उन्हें नई ऊर्जा का संचार हो सकता है। इसके लिए आपको निम्नलिखित नियमों का पालन करते हुए मंगला गौरी व्रत करना चाहिए: 

  • आपको माता पार्वती और भगवान शंकर की संयुक्त रूप से पूजा अर्चना करनी चाहिए। क्योंकि यह दोनों ही साक्षात एक सफल और सुखद दांपत्य जीवन के प्रतीक हैं। 
  • इसके लिए माता गौरी की पूजा करने का उपयुक्त समय अर्धरात्रि में अर्थात मध्यरात्रि में है। 
  • सर्वप्रथम माता गौरी और भगवान शंकर के चरणों में निवेदन करें कि आप जिस संकल्प से यह पूजा कर रही हैं उसमें आपको सफलता प्राप्त हो।
  • उसके बाद शिव शक्ति युगल को तिलक करें और वस्त्र समर्पित करें। 
  • तदुपरांत माता गौरी को अखंड सौभाग्य प्राप्ति की कामना करते हुए सुहाग की सामग्री भेंट करें जिसमें लाल रंग की बिंदी, चूड़ियां, सिंदूर, मेहंदी, काजल, आलता, शीशा और आभूषण हों। 
  • ॐ गौरीशंकराय नमः" मंत्र का कम से कम 11 माला जाप करें। 
  • माला रुद्राक्ष की हो तो उत्तम उत्तम होगी। 
  • जब आप का जाप समाप्त हो जाए तुम माता गौरी और भगवान शंकर से अपने वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याओं के बारे में अवगत कराते हुए उनकी कृपा प्रदान करने के लिए निवेदन करें। 
  • इस प्रकार विभिन्न प्रकार की समस्याओं के निवारण के लिए मंगला गौरी व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है और शीघ्र अतिशीघ्र मनोवांछित फल देने वाला माना जाता है। 

हमें उम्मीद है कि मंगला गौरी व्रत पर यह ब्लॉग आपके लिए मददगार साबित होगा! माता गौरी का आशीर्वाद आपको इस पूरे सावन में अच्छी वर्षा के रूप में प्राप्त हो!

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साप्ताहिक राशिफल (22 से 28 जुलाई 2019)

सावन के पहले सोमवार में पढ़ें इस सप्ताह का फलादेश। पढ़ें 22 से 28 जुलाई का इस सप्ताह का राशिफल और जानिये नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा, प्रेम, वैवाहिक और पारिवारिक जीवन के लिए कैसे रहेगा ये हफ्ता। 

एस्ट्रोसेज का सबसे सटीक राशिफल आपके लिए हाज़िर है। जहाँ हम आपको बताएँगे जुलाई के चौथे हफ्ते से जुड़ी हर छोटी-बड़ी भविष्यवाणियाँ वो भी आपकी राशि के अनुसार। इस साप्ताहिक राशिफल की मदद से आप जानेंगे कि इस हफ्ते क्या कुछ ख़ास है आपके लिए। इस राशिफल की मदद से आप घर बैठे पा सकेंगे अपने प्रेम जीवन, वैवाहिक जीवन, करियर, परिवार, स्वास्थ्य, आर्थिक तथा दांपत्य जीवन आदि से जुड़ा फलादेश। इसके साथ-साथ ही आपको आपकी राशि के अनुसार कुछ विशेष उपाय भी बताए जाएंगे जिन्हे अपना कर आप जीवन की कई बाधाओं से निजात पा सकेंगे। 

इस सप्ताह भगवान शिव का मिलेगा आशीर्वाद 


चूँकि इस सप्ताह की शुरुआत के साथ ही सावन के पहले सोमवार व्रत भी हैं, इसलिए इस सप्ताह का महत्व और भी अधिक हो जाता है। इसके साथ ही यह सप्ताह शिव भक्तों के साथ-साथ कई विशेष राशि वाले जातकों के लिए भी महत्वपूर्ण रहने वाला है। ग्रहों-नक्षत्रों की दशा और दिशा को देखें तो उनसे ये पता चलता है कि इस सप्ताह विशेष कुम्भ, मीन, मेष और वृषभ राशि वाले जातकों को अपने जीवन में कई अच्छे बदलाव देखने को मिलेंगे। इसलिए वे इस हफ्ते का भरपूर फायदा उठा सकते हैं। वहीं इसके अलावा शेष अन्य राशियों को थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता होगी, क्योंकि संभावना है कि उन्हें कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 


इस सप्ताह का हिन्दू पंचांग एवं ज्योतिषीय तथ्य


हिन्दू पंचांग के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से होगी और सप्ताह का अंत कृष्ण पक्ष की एकदशी तिथि के साथ होगा। वहीं इस सप्ताह में चंद्र देव मीन राशि से होते हुए वृषभ राशि तक अपनी गोचरीय अवस्था जारी रखेंगे। इसके अलावा इस सप्ताह 22 जुलाई, सोमवार को वर्ष 2019 का पहला सोमवार व्रत रखा जाएगा और 28 जुलाई, रविवार को कामिका एकादशी का आयोजन होगा। इन दिनों विशेष तौर से व्रत और दान-पुण्य करने महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार कामिका एकादशी को पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, जिस दिन भक्त भगवान विष्णु के उपेन्द्र स्वरुप की पूजा करते है। माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अपने पूर्वजन्म के दोषों से मुक्ति मिलती है। इसलिए पवित्रा एकादशी के फल लोक और परलोक दोनों में उत्तम कहे गये हैं।

कामिका एकादशी 2019 का महत्व और मुहूर्त- यहाँ क्लिक कर पढ़ें!

सावन के पहले सोमवार पर बने महायोग 


17 जुलाई को भगवान शिव के प्रिय सावन मास 2019 की शुरुआत हुई और 22 जुलाई को देशभर में शिव भक्तों के द्वारा सावन का पहला सोमवार व्रत रखा जाएगा। सावन और सोमवार दोनों ही शिव को बेहद प्रिय हैं। माना गया है कि पूरे वर्ष शिव की पूजा करने का जो पुण्य है वह सावन में आने वाले सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने मात्र से ही प्राप्त हो जाता है। अगर इस वर्ष के पहले सोमवार की बात करें तो इस दिन कई सुंदर योग बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। जो सावन के पहले सोमवार के महत्व को कई गुणा बढ़ा रहे हैं। इस बार अदभुद संयोग ये बन रहा है कि सावन मास में नक्षत्रों में उत्तम श्रवण नक्षत्र में सावन के पहले सोमवार की शुरुआत हो रही है। इसके अलावा सोमवार के दिन सर्वार्थ सिद्ध योग नामक एक अन्य शुभ योग बना है, जो अपने नाम के अनुसार ही सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाला योग है। सरल शब्दों में कहें तो इस दिन आप जिस भी कामना से कोई कार्य करते है उसमें सफलता ज़रूर मिलती है। इसके अलावा इस सोमवार को प्रीति योग भी है जो शिव के प्रति आपका प्रीत यानि श्रद्धा भाव बढ़ाकर शिव कृपा दिलाने में सबसे ज्यादा सहायक होगा।


इस सप्ताह किन ग्रहों की बदलेगी चाल?


ग्रह और नक्षत्र को देखें तो उनसे ज्ञात होता है कि विशेष तौर से विवाहित स्त्रियों को और लड़कियों के लिए इस सप्ताह के बेहद महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है। क्योंकि इस दौरान उनके लिए भगवान शिव का आशीर्वाद अमृत के समान है। इसलिए उन्हें भगवान महादेव की असीम कृपा पाने के लिए सोमवार का व्रत करना चाहिए। इस सप्ताह की शुरुआत में जहाँ चंद्र देव कुम्भ राशि में स्थित होंगे वहीं अंत में वे मीन, मेष, और वृषभ राशि में गोचर करेंगे जिससे चंद्र अपना प्रभाव सबसे ज्यादा इन्ही राशि के जातकों पर दिखाएँगे। इस दौरान अलग -अलग नक्षत्रों में भी चंद्र का प्रभाव देखने को मिलेगा। साथ ही इसके अलावा 23 जुलाई को मिथुन राशि में मौजूद शुक्र ग्रह गोचर करते हुए कर्क राशि में जाएगा। यहाँ शुक्र ग्रह बुध, सूर्य और मंगल के साथ युति करेगा। 

प्रदोष व्रत 2019 की तिथि व व्रत विधि: यहाँ क्लिक कर पढ़ें

इस सप्ताह कैसी रहेगी शेयर बाज़ार की चाल


इस माह के चौथे सप्ताह के शेयर बाज़ार को देखें तो, सोमवार, 22 जुलाई को शेयर बाज़ार की स्थिति काफी अच्छी रह सकती है। इसके बाद 23 जुलाई, मंगलवार को भी स्थिति ठीक ही रहेगी, लेकिन 24 जुलाई को बाज़ार में कुछ मंदी के संकेत नज़र आ रहे हैं। जिसका असर अगले दिन 25 जुलाई को मंदी के साथ साफ़ तौर से दिखाई देगा। इसके बाद सप्ताह के अंत तक बाज़ार में मंदी छायी रह सकती है। इस हफ्ते विशेष तौर से सरकारी क्षेत्रों, ऊर्जा, एफ. एम. सी. जी., चीनी, मनोरंजन, वाहन, बैंकिंग, निवेश और कुछ तकनीकी क्षेत्रों में अच्छा ख़ासा दवाब देखने को मिलेगा। इसके अलावा रियल एस्टेट, रसायन, सीमेंट, फार्मास्यूटिकल्स व सेवा क्षेत्रों की स्थिति अच्छी रहने वाली है, इसलिए निवेशकों को इनमें निवेश करने की सलाह दी जाती है। 


जन्मदिन विशेष 


इस सप्ताह चर्चित हस्तिओं में 22 जुलाई को भारतीय राजनीति के जाने माने चेहरे अजित पवार, 23 जुलाई को प्रसिद्ध गायक हिमेश रेशमिया, 24 जुलाई को दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार, 26 जुलाई को मुग्धा गोडसे, 28 जुलाई को रजनीकांत के दामाद और बॉलीवुड व साउथ के मशहूर अभिनेता धनुष का जन्मदिन है। जानें इन हस्तियों के लिए कैसा रहेगा आने वाला समय और क्या कहती है उनकी कुंडली। हमारी ओर से इन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ। चलिए अब जानते हैं इस सप्ताह का राशिफल:-


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


सबसे पहले बात करें कार्यक्षेत्र की तो, इस गोचर के दौरान कार्यस्थल पर आपकी मेहनत को सराहा जाएगा। जो भी प्रोजेक्ट आप हाथ में लेंगे उसमें आपको सफलता मिलने की पूरी संभावना है...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम जीवन के लिए ये सप्ताह मध्यम फलदायी साबित होगा। प्रेमी जातकों को उनके पार्टनर का साथ तो मिलेगा लेकिन कुछ बातों को लेकर दोनों के बीच मतभेद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है...आगे पढ़ें

वृषभ


आपके लिए करियर के लिहाज से ये समय बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जहाँ एक तरफ आप अपने काम की वजह से कार्यस्थल पर अपनी पैठ जमा पाएंगे, वहीं दूसरी तरफ आपकी...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- शुक्र ग्रह के प्रभाव से आपका प्रेम जीवन इस सप्ताह अच्छा व्यतीत हो सकता है। अपने पार्टनर के साथ कुछ पल सुकून के...आगे पढ़ें

मिथुन


क्र के प्रभाव से आपके जीवन में धन का आगमन होता रहेगा। पारिवारिक स्तर पर आपके लिए ये हफ्ता अच्छा बीत सकता है। लेकिन अपने पिता की सेहत का ख़ास ख्याल रखें क्योंकि...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- जहाँ तक प्रेम जीवन की बात है तो, इस राशि के जातकों को इस हफ्ते अपने पार्टनर के प्रेम का विशेष एहसास हो सकता है...आगे पढ़ें

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कर्क


चन्द्रमा का गोचर इस हफ्ते आपकी राशि से आठवें, नौवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में होगा। वहीं शुक्र आपके प्रथम भाव यानि कि लग्न भाव में विराजमान होंगें...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- शुक्र देव के प्रभाव से आपका प्रेम जीवन काफी अच्छा व्यतीत होने वाला है। अपने पार्टनर के साथ आप कुछ खुशनुमा पल बिता सकते हैं...आगे पढ़ें

सिंह


सबसे पहले बात करें कार्यक्षेत्र की तो इस हफ्ते आपको अपनी मेहनत का भरपूर फल मिलेगा। आप जिस दिशा में सफलता के लिए प्रयास कर रहे हैं उसमें आपको सफलता मिल सकती है...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम जीवन के लिए ये सप्ताह माध्यम फलदायी सिद्ध हो सकता है। आपके पार्टनर की कोई बात आपके लिए मानसिक तनाव का कारण बन सकती है, लेकिन...आगे पढ़ें

कन्या


इस सप्ताह चन्द्रमा का गोचर आपकी राशि से छठे, सातवें, आठवें और नौवें भाव में होगा। इसके साथ ही शुक्र आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में स्थित होंगें। आपकी कुंडली में मौजूद चंद्रमा और शुक्र की स्थिति आपके जीवन के...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम जीवन के लिहाज से ये सप्ताह आपके लिए अनुकूल फल देने वाला सिद्ध हो सकता है। आप अपने पार्टनर के साथ छुट्टियों पर जा सकते हैं। इस दौरान...आगे पढ़ें


तुला


चूंकि पंचम भाव का संबंध शिक्षा से जुड़ा हुआ है इसलिए छात्रों को इस सप्ताह अच्छे फल प्राप्त होंगे। परीक्षा में उनकी मेहनत रंग लाएगी...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- यह सप्ताह प्रेम संबंधों के लिए सामान्य रहेगा। प्रियतम आपसे किसी बात से रूठ सकता है। उन्हें मनाने के लिए आप प्रियतम के साथ...आगे पढ़ें

वृश्चिक


कार्य क्षेत्र में सहकर्मियों का सपोर्ट आपको आगे ले जाएगा। वहीं पंचम भाव में चंद्रमा के गोचर से आपको घर में छोटे भाई बहनों का साथ मिलेगा। आर्थिक लाभ के भी होने की संभावनाएँ है...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- इस सप्ताह आपको अपने प्रेम जीवन में ताज़गी का अहसास होगा। आपके प्यार का रिश्ता गहरा होगा। प्रियतम आपके जज़्बातों को न केवल समझेगा...आगे पढ़ें

धनु


अच्छा होगा कि आप इसके लिए तैयार रहें। सप्ताहांत में आपके विरोधी आपके लिए किसी प्रकार का कुचक्र रच सकते हैं। लिहाज़ा उनसे आपको सावधान रहना होगा...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- सप्ताह प्रेम संबंधों के लिए अनुकूल रहने वाला है। प्रियतम के साथ कोई प्यारा-सा लम्हा गुजारने का समय मिलेगा। प्रियतम आपके प्यार की परीक्षा ले सकता है...आगे पढ़ें

मकर


इस सप्ताह की शुरुआत में चन्द्रमा का गोचर आपके द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ और पंचम भाव में होगा। इसके साथ ही इस सप्ताह शुक्र का गोचर आपके सप्तम भाव में होगा। सप्ताह की शुरुआत में जब चंद्र देव...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- प्रेम संबंधित मामलों के लिए ये सप्ताह सामान्य रहने की उम्मीद है। इस दौरान आपको इस बात का विशेष ख्याल रखना होगा कि आप अपने प्रियतम पर...आगे पढ़ें

कुंभ


इस सप्ताह की शुरुआत में चंद्रमा आपकी ही राशि में विराजमान होंगे अर्थात आपके प्रथम भाव में होंगे और जो बाद में द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ भाव में गोचर करेंगे। इसके साथ ही इस सप्ताह शुक्र का गोचर आपके षष्टम भाव में होगा...आगे पढ़ें

प्रेम जीवन :- अगर प्रेम संबंधित मामलों की बात करें तो ये सप्ताह प्रेम में पड़े जातकों के लिए अधिक अनुकूल नहीं रहेगा। आपके और प्रियतम के बीच वाद विवाद या बहस बाजी...आगे पढ़ें

मीन


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सावन का पहला सोमवार कल, पढ़ें महत्व और विशेष बातें

कल रखा जाएगा इस वर्ष के सावन माह का पहला सोमवार व्रत। ऐसे करें महादेव की पूजा मिलेगा मनोवांछित फल। साथ ही जानें सावन के सभी सोमवार की तिथि और उससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें।


हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान शिव की उपासना के लिए सावन मास के अलावा सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि का समय भी शुभ माना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार जिसे श्रावण मास कहा जाता है उसे ही लोग सावन का महीना कहते हैं इस समय भगवान शिव की अराधना और सोमवार व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन के महीने में शिव भक्तों द्वारा रखे जाने वाले व्रत का शुभ फल उन्हें मिलता है इस दिन व्रत रखने वाले भक्त रात को पूजा के बाद भोजन करते हैं। सावन सोमवार व्रत की विधि भी अन्य सोमवार व्रत की तरह ही होती है। इस बार सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई को है।


सावन सोमवार का व्रत देगा मनोवांछित फल


हिंदू पंचांग की मानें तो सावन वर्ष का पांचवा महीना होता है जो इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार जुलाई-अगस्त में ही आता है। सावन का महीना विशेष तौर से भगवान शंकर को समर्पित होता है, इसलिए इस मास का महत्व बढ़ जाता है। इसलिए इसे भगवान शंकर का प्रिय महीना भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर अपने शयन करने क्षीरसागर में चले जाते हैं तो इस दौरान संसार के पालन का दायित्व भगवान शिव स्वयं अपने ऊपर ले लेते हैं। इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि यदि कोई भक्त सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा माता पार्वती के साथ करता है तो उसे भगवान शिव की कृपा से सभी प्रकार के मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और उसे अनेक प्रकार की समस्याओं से भी मुक्ति मिल जाती है। 

वर्ष 2019 में सावन सोमवार की तिथि


पहला सावन सोमवार व्रत
सोमवार
जुलाई 22, 2019
दूसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
जुलाई 29, 2019
तीसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
अगस्त 5, 2019
चौथा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
अगस्त 12, 2019

सावन सोमवार को व्रत करने के लाभ 


ज्योतिष विशेषज्ञों अनुसार ये देखा गया है कि यदि आपके विवाह में कोई समस्या आ रही है या फिर आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर है या आपको अपने स्वास्थ्य से संबंधित कोई तकलीफ़ चली आ रही है तो सावन के सोमवार का व्रत रखने पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं जिससे आपको इन सभी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। वेदों में भी भगवान शिव और माता पार्वती को पुरुष और प्रकृति के रूप में ही जाना जाता है। ऐसे में मान्यता है कि जब प्रकृति पृथ्वी पर अपनी अनुपम छटा बिखेरती है तो भगवान शिव उनकी काया देख अत्यंत प्रसन्न रहते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं को शीघ्र ही प्रसन्न होकर पूरा कर देते हैं। 

सावन सोमवार की कुछ ज़रूरी बातें ध्यान रखें


  • पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि देव को भगवान शिव का प्रिय शिष्य माना गया है इसलिए सावन के सोमवार के व्रत रखने से आप भगवान शिव और माता गौरी के साथ-साथ शनि देव को भी अत्यंत प्रसन्न कर सकते हैं। 
  • चूंकि चंद्र देव भगवान शंकर के शीश पर विराजित हैं, और सोमवार को चंद्र देव का दिन भी कहा जाता है इसलिए इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव के साथ-साथ चंद्रमा का भी आपको आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि आपकी कुंडली में कोई भी चंद्र दोष है तो वो भी सावन के सोमवार को व्रत रखने से समाप्त हो जाता है। 
  • जिस भी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहण दोष या सर्प दोष का निर्माण हो रहा होता है तो यदि वो व्यक्ति सावन के सोमवार का व्रत करता है तो भगवान शंकर उससे प्रसन्न होकर उसके सभी दोष समाप्त कर देते हैं। 
  • इसके अतिरिक्त अपनी कुंडली में बन रहे विभिन्न प्रकार के दोषों से मुक्ति पाने हेतु एवं अपने जीवन के सभी पापों के शमन हेतु भी भगवान शंकर की पूजा सावन के महीने में करना अत्यंत लाभदायक साबित होता है। 
  • ये देखा गया है कि सावन सोमवार के दिन यदि नाग पंचमी का त्यौहार आए तो इसका महत्व अत्यंत बढ़ जाता है और इसे एक प्रकार का शुभ संयोग माना जाता है। इस दिन नागों की पूजा करने से भक्तों पर शिवजी की सीधी कृपा होती है।

सावन सोमवार का उद्देश्य


सावन सोमवार पर भगवान शिव प्रकृति का अद्भुत तालमेल देख विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। अगर भगवान भोलेनाथ के स्वरूप को देखें तो जहाँ वे एक ओर अपने गले में विषधर वासुकि नाग को धारण किए रहते हैं तो वहीं दूसरी तरफ उनके मस्तक पर चंद्र देव विराजमान रहते हैं और साथ ही मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकल रही होती हैं। उनका वाहन वृषभ होता है जिसे हम नंदी बैल के नाम से भी जानते हैं। वहीं शिव देव की अर्धांगिनी माता पार्वती अपने वाहन शेर पर सवार रहती हैं। भगवान शंकर के पुत्र गणेश और कार्तिकेय के वाहन क्रमशः मूषक और मयूर हैं। यहां अगर आप ध्यान दें तो पता चलता है कि यह सभी जीव एक दूसरे के शत्रु हैं लेकिन भगवान शंकर के निवास कैलाश पर सभी एक साथ बड़े प्रेम पूर्वक तरीके से रहते हैं। इसलिए माना जाता है कि इन्हीं के माध्यम से भगवान शंकर हमें संदेश देते हैं कि हमें प्रकृति के बीच सही संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत होती है, और इसी कारण सावन मास में जब प्रकृति अपनी अनुपम छटा चारों ओर बिखेरती है तो उसे प्रकृति का श्रंगार स्वरूप माना जाता है। ठीक इसी प्रकार प्रत्येक मानव को भी प्रकृति संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत होती है जिससे हमें किसी प्रकार की कोई परेशानी भविष्य में न हो। ऐसा करने से भगवान शंकर अपना आशीर्वाद खुद ही दे देते हैं। 


सावन सोमवार व्रत व पूजन विधि 


जैसा हमने पहले ही बताया सावन सोमवार के व्रत की विधि भी आम सोमवार के व्रत की तरह ही होती है लेकिन इसका महत्व अधिक होता है। इस व्रत के पूजन की विधि इस प्रकार से है:-

  • प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठें और स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर शुद्ध हो जाएं । 
  • इसके पश्चात भगवान शंकर का अभिषेक दूध, दही, गंगा जल, गन्ने का रस, सरसों का तेल आदि से करें। 
  • महादेव को सफेद चंदन लगाएं और फिर उन्हें धतूरा, भांग, बिल्वपत्र आदि अर्पित करें। 
  • उनके समक्ष शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्जवलित करें। 
  • इसके बाद सावन सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें व दुसरों को भी सुनाए और शिव चालीसा और आरती करें। 
  • उसके पश्चात उन्हें प्रसाद का भोग लगाएं। 
  • व्रत वाले दिन सुबह और शाम दोनों समय भगवान शंकर की उपासना करनी चाहिए। 
  • संध्याकाल के समय भगवान शिव की पूजा के बाद ही व्रत खोलें और ध्यान रखें कि दिन में केवल एक बार ही भोजन करें। 


सावन सोमवार की पौराणिक कथा 


भगवान शिव के प्रिय सावन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार कहा माता पार्वती ने भगवान शिव से शादी करने के लिए श्रावण मास को ही निराहार अत्यंत कठिन व्रत किया था। जिस दौरान भगवान शिव उनकी इस उपासना से प्रसन्न हुए थे और उन्होंने माता पार्वती को दर्शन देकर उनसे विवाह करने का वरदान दिया था। इसलिए ही लड़कियों और महिलाओं को इस दिन व्रत और शिव जी की पूजा करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

इसके अलावा एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी मास में भगवान शिव ने अपनी ससुराल पृथ्वी पर जाने का फैसला लिया था। जहाँ उनका स्वागत जलाभिषेक द्वारा किया गया था। इसलिए मान्यता है कि जो भी मनुष्य इस दिन उनका व्रत करते हुए उनकी पूजा करता है तो भगवान शिव की सहज कृपा उसको प्राप्त होती है। माना जाता है कि सावन के महीने में ही भगवान शंकर स्वंय पृथ्वी पर आकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। इस कारण भी सोमवार व्रत रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। 

हम आशा करते हैं कि सावन सोमवार से संबंधित हमारा यह आलेख आपको पसंद आया होगा और आप अपनी अभिलाषाओं की पूर्ति के लिए सावन सोमवार व्रत रखकर भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और सभी समस्याओं से मुक्ति प्राप्त करेंगे।
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आज से शुरू हुआ सावन मास, जानें शिव पूजन विधि

भगवान शिव को करें प्रसन्न और पाएँ मनचाहा वरदान ! आज 17 जुलाई 2019 से हुई श्रावण मास की शुरुआत। जानें भगवान शिव को प्रिय इस माह की महिमा और महत्व।


आज, 17 जुलाई से सावन मास की शुरुआत हो गई है। इस श्रावण मास से व्रत और त्योहारों की भी शुरुआत हो जाती है। हिन्दू धर्म में श्रावण मास का सबसे बड़ा महत्व बताया गया है, विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए इस माह का विशेष महत्व होता है। क्योंकि माना गया है कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। हिंदू पंचांग की मानें तो चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले हर वर्ष का पांचवां महीना श्रावण मास होता है। वहीं अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना हर वर्ष जुलाई या अगस्त माह में आता है। इसके साथ ही ये देखा गया है कि वर्षा ऋतु के समय ही श्रावण मास का आगमन हर वर्ष होता है। यही वह समय होता है जब पृथ्वी पर चारों ओर प्रकृति अपना रंग दिखाती है और हरियाली ही हरियाली होती है। सावन मास में स्नान और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।


सावन सोमवार व्रत की तिथियां


पहला सावन सोमवार व्रत
सोमवार
जुलाई 22, 2019
दूसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
जुलाई 29, 2019
तीसरा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
अगस्त 5, 2019
चौथा सावन सोमवार व्रत
सोमवार
अगस्त 12, 2019

सावन 2019 पर बना दुर्लभ संयोग 


इस बार के सावन महीने में कई शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार पहले सोमवार को श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि का संयोग, दूसरे सोमवार को त्रयोदशी प्रदोष व्रत के साथ-साथ सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग, तीसरे सोमवार को नागपंचमी का शुभयोग व चौथे सोमवार को त्रयोदशी तिथि का शुभ संयोग होगा। इस कारण इस वर्ष के सावन माह का महत्व बढ़ गया है। 

सावन सोमवार व्रत व पूजा विधि 


सावन का महीना भगवान शिव के सभी भक्तों के लिए किसी पर्व से कम नहीं होता है। भक्त इस मास में आने वाले प्रत्येक सोमवार को भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, साथ ही भगवान् शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु सच्ची श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखते हैं। देश-विदेश के तमाम ज्योतिर्लिंगों, शिवालयों और मंदिरों में भगवान भोलेनाथ के भक्तों का तांता लगा रहता है, इसलिए हर ज्योतिर्लिंग और शिवालय की साज-सजावट की जाती है। चलिए अब जानते हैं कि शिव पूजन और सावन मास में की जाने वाली पूजा और व्रत विधि:-

  • सावन मास के शुरू होते ही सुबह जल्दी उठकर स्नान व नए स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। 
  • पूजा स्थान की सफाई करें। 
  • तत्पश्चात आसपास कोई मंदिर हो तो वहां जाकर भगवान शिव का जल व दूध से अभिषेक करें।
  • इसके बाद पहले भगवान शिव को और शिवलिंग को चंदन का तिलक लगाएं और फिर ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान शंकर को सुपारी, पंच अमृत, नारियल, बेल पत्र, धतूरा, फल, फूल आदि चढ़ाएँ। 
  • इसके बाद घी या तेल का दीपक जलाएं।
  • इसके बाद भोलेनाथ के सामने आंख बंद कर शांति से बैठें और व्रत का संकल्प लें। 
  • इसके बाद कथा व शिव चालीसा का पाठ कर मंगल आरती करनी चाहिए। 
  • व्रत के दिन सुबह और शाम शिवलिंग का पूजन करें व भगवान शिव की आराधना करें। 
  • शाम को पूजा समाप्ति के बाद, यदि व्रत रखा है तो अपना व्रत खोलें और सात्विक भोजन करें।


भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय होता है श्रावण मास


हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार सावन मास में किए जाने वाले सोमवार के व्रत और दान-पुण्य भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होते हैं। इस संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं सुनने को मिलती हैं। उन्हीं में से एक पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए सावन मास में निराहार रहकर कठोर व्रत किया था। उनकी इस कठोर तपस्या से ही प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह रचाया था। इसलिए ही इस माह पड़ने वाले सावन सोमवार का व्रत यदि कुंवारी कन्याएँ रखती हैं तो माना गया है कि उन्हें भगवान शिव के समान पति की प्राप्ति होती है। 

वहीं एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा भी माना जाता है कि इसी माह को भगवान शिव ने पृथ्वी पर अवतरित होकर अपने ससुराल जाने का निर्णय लिया था। जहाँ उनका भव्य स्वागत जलाभिषेक आदि से किया गया था। तभी से ऐसा माना जाता है कि हर वर्ष इसी माह भगवान शिव पृथ्वी पर अपने ससुराल आते हैं। ऐसे में इस समय भगवान भोले नाथ के भक्त उनकी पूजा अर्चना कर उनका आशीर्वाद और कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 

सावन सोमवार व्रत का महत्व


शास्त्रों में भी इस बात का उल्लेख किया जाता है कि सावन के महीने में जो भी भक्तगण भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें भगवान शिव अपना आशीर्वाद ज़रूर देते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि सावन सोमवार के व्रत करके कोई भी विवाहित महिला अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बना सकती है। वहीं अविवाहित महिलाएं अच्छे वर की प्राप्ति कर सकती हैं। वहीं भक्तों को सावन माह में भगवान शिव का पूजन व व्रत करने से भगवान शिव से लंबी आयु का वरदान भी प्राप्त होता है।

सावन की शुरुआत के साथ हुआ कांवड़ और झंडा यात्रा का भी शुभारंभ 


सावन माह की शुरुआत होते ही भगवान भोलेनाथ के भक्त कांवड़ और झंडा यात्रा का शुभारंभ कर देते हैं। हर वर्ष इस मास की शुरुआत होते ही आस्था और उत्साह पूर्वक कांवड़ यात्राएं निकालने की एक विशेष धार्मिक परम्परा होती है। इस दौरान सावन के सोमवार को कांवडि़ए मां गंगा और नर्मदा के तट से अपनी कांवड़ में पवित्र जल भरते हैं और शिवालयों में उसी पवित्र जल से भक्त शिव के शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। सावन माह में कावंडि़ए बोल बम और हर हर महादेव के जयघोष के साथ आपको सड़कों पर कांवड़ लिए चलते दिखाई दे जाएंगे, जिसे देख पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। इसी प्रकार शारदा मंदिर मदन महल में भी सावन सोमवार के दिन झंडा चढ़ाने की विशेष पौराणिक परम्परा है। इस दौरान झंडों के लिए लम्बे-लम्बे बांसों की रंगाई-पुताई कर उन्हें सजाया जाता है। जिसके बाद उनमें भगवती के झंडे बांधकर गाजे-बाजे के साथ लोग इन झंडों को मंदिर में अर्पित करने जाते हैं। 

हम आशा करते हैं कि सावन के इस पवित्र माह में भगवान भोलेनाथ की कृपा आप पर बनी रहेगी। एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को अनंत शुभकामनाएँ!

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सूर्य का कर्क में गोचर आज, जानें प्रभाव।

चंद्र ग्रहण के तुरंत बाद सूर्य ने किया कर्क राशि में गोचर ! हो जाएं सावधान अब आएँगे ये बड़े बदलाव। पढ़ें सूर्य के कर्क राशि में हुए गोचर का प्रभाव।


सूर्य ग्रह सौर मंडल के सभी ग्रहों में एकमात्र स्वयं प्रकाशित ग्रह है। चंद्र और दूसरे अन्य ग्रह सूर्य से ही प्रकाशित होते हैं। इसीलिए इसे नौ ग्रहों में राजा की उपाधि प्राप्त है। सूर्य की अनमोल किरणें सभी जीव-जंतुओं के लिए वरदान हैं। इसलिए, सूर्य को पूरे संसार का पालनहार कहा जाता है। सूर्य की इसी महत्ता को देखते हुए ज्योतिष में सूर्य देव को पिता, पुत्र, हृदय और सत्ता का कारक माना गया है। वैदिक ज्योतिष्य के अनुसार सूर्य का रत्न माणिक्य है। इसलिए यदि किसी भी जातक की कुंडली में सूर्य शुभ प्रभाव में है तो उस जातक को अवश्य ही माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए। 

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सूर्य देव का कुंडली पर प्रभाव 


सूर्य को जगत की आत्मा भी कहा जाता है। इसीलिए, हर जन्म कुंडली का विचार करते समय ज्योतिष विशेषज्ञ सबसे पहले मुख्य तौर पर सूर्य का विचार करते हैं। जो पूर्व दिशा में स्थान बली बनता है और राशि चक्र की 5वीं राशि यानि सिंह राशि पर अपना आधिपत्य रखता है। इसलिए, सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य स्वगृही है। मेष राशि में ये परम उच्च का हो जाता है। यानि यह बहुत ही अच्छी स्थिति में पहुँचकर अति शुभ हो जाता है। वहीं तुला राशि में सूर्य नीच का गिना जाता है।

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इसके साथ ही अन्य ग्रहों की सूर्य से दूरी यह बताती है कि जातक पर सूर्य का कैसा प्रभाव पड़ेगा। साथ ही एक कुंडली में सूर्य किस राशि में है, वह उसकी नीच राशि, उच्च राशि, स्वगृही, मित्र या शत्रु राशि तो नहीं यह सब भी फलित ज्योतिष में फलादेश करते समय सभी ज्योतिषी ध्यान में रखते हैं।

यदि किसी कुंडली में सूर्य के अशुभ प्रभावों को कम करना और कुंडली में सूर्य को मजबूत करना हो तो सूर्य यंत्र का प्रयोग करना सबसे ज्यादा उत्तम माना गया है। कोई भी जातक सूर्य यंत्र का सही विधि–विधान से पूजन कर शीघ्र ही शुभ फल प्राप्त कर सकता है। इसके शुभ प्रभाव से जातक को अच्छी सेहत के साथ ही पद–प्रतिष्ठा, नौकरी और ख़ास तौर से सरकारी कार्य में सफलता मिलती है।

कुंडली में मंगल को मजबूत करने के उपाय- यहाँ क्लिक कर पढ़ें!

गोचर काल का समय 


अग्नि तत्व और लाल वर्ण वाला सूर्य ग्रह एक बार फिर राशि परिवर्तन कर रहा है। सूर्य देव 17 जुलाई 2019, बुधवार को प्रातः 04:23 बजे मिथुन राशि से कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं जो अगले महीने 17 अगस्त 2019 तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। सूर्य के इस गोचर का प्रभाव सभी बारह राशियों के जातकों पर होगा। ऐसे में हम इस लेख में प्रत्येक राशि पर होने वाले सूर्य के इस गोचर का प्रभाव जानेंगे लेकिन उससे पहले आइये जानते हैं इस गोचर से देशभर में क्या बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे:-


  • बुधादित्य योग से छात्रों को मिलेंगे अच्छे फल

17 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर चंद्र की राशि कर्क में प्रवेश करेंगे जहाँ वो बुध के साथ युति करते हुए बुधादित्य योग बनाएंगे। जिसके चलते जिस भी राशि में सूर्य अच्छी स्थिति में होगा उस जातक की बुद्धि में वृद्धि देखी जायेगी। इन लोगों को इस गोचर के दौरान पढ़ाई-लिखाई एवं सरकारी नौकरी में सफलता मिलने की संभावना बन रही है। 


  • सूर्य के गोचर के दौरान गर्मी से परेशान होगा देश

सृष्टि के पालनहार देव सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने के दौरान सूर्य के प्रभाव से देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप परेशान करेगा, जिसके परिणामस्वरूप देशभर के कई राज्यों में जगह-जगह आगजनी की घटनाएँ बढ़ेंगी। साथ ही साथ कई इलाकों में जल की कमी से सम्बन्धी कई समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। 


  • सूर्य के गोचर से ठीक पहले लगा चंद्र को ग्रहण 

चूँकि सूर्य सरकारी पदों, आत्मबल, प्रतिष्ठा आदि का कारक होता है इसलिए इस गोचर काल के दौरान जब सूर्य मिथुन राशि छोड़कर कर्क राशि में गोचर करेगा तो वहां मौजूद मंगल सेनापति की भूमिका निभाते हुए पराक्रम योग का निर्माण करेगा, जिससे गोचर से ठीक पहले घटित हुए चंद्र ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव भी मंगल सूर्य की युति से समाप्त हो जाएंगे। 

चंद्र ग्रहण 2019 की दिनांक और उसके सूतक का समय: यहाँ क्लिक कर पढ़ें

आइये अब जानते हैं सभी राशियों पर कैसा होगा सूर्य के इस गोचर का असर:- 


यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है। चंद्र राशि कैल्कुलेटर से जानें अपनी चंद्र राशि

मेष


सूर्य का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में होगा। इसलिए इस गोचर के समय आपको अपने माता-पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत है। उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। पारिवारिक जीवन में किसी समस्या के चलते आपको मानसिक तनाव होने की भी संभावना है। हालांकि आप अपनी सूझबूझ से समस्या का हल निकालने की कोशिश करेंगे, लेकिन इस...आगे पढ़ें

वृषभ


तृतीय भाव में सूर्य का यह गोचर आपके साहस में वृद्धि करेगा। आप इस दौरान जो भी काम हाथ में लेंगे उसे एकाग्रता के साथ पूरा करने की कोशिश करेंगे। आपकी ऊर्जा कार्यक्षेत्र में आपको अच्छे फल दिलाएगी। अपने विरोधियों पर इस दौरान आप हावी रहेंगे और तर्क-वितर्क की स्थिति में उनपर विजय प्राप्त करेंगे। इस राशि के कुछ लोगों को काम के सिलसिले में इस दौरान...आगे पढ़ें

मिथुन


इस गोचर के कारण आपके कठोर वचनों से कुछ लोग आपसे नाराज़ भी हो सकते हैं। परिवार के लोगों के साथ सामंजस्य बिठाना है तो अपनी वाणी में आपको मधुरता लानी होगी। आपका जीवनसाथी इस समय आपको समझने में कामयाब होगा और आपकी कई समस्याओं को वो दूर कर देगा। सरकारी क्षेत्र से आपको मुनाफ़ा हो सकता है। आर्थिक पक्ष भी इस दौरान मजबूत होगा यह वह समय है जब...आगे पढ़ें


कर्क


सूर्य का गोचर आपकी ही राशि यानि आपके लग्न भाव में होगा। जिससे आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इस समय ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें जिनसे आपको एलर्जी है। सूर्य के आपकी राशि में गोचर के चलते आपके स्वभाव में अहंकार की वृद्धि हो सकती है और वाणी में भी कड़वापन आ सकता है। आपके व्यवहार के कारण परिवार के लोगों से भी आपकी...आगे पढ़ें

सिंह


इस गोचर के दौरान आपको धन से जुड़े मामलों में बहुत संभलकर चलना होगा। किसी ऐसे इंसान को इस वक्त उधार देने से बचें जिस पर आपको भरोसा नहीं है। यह गोचर आपकी सेहत के लिहाज से अच्छा नहीं कहा जा सकता इसलिए इस दौरान आपको अपने शरीर को तंदरुस्त रखने के लिए योग करना चाहिए। नियमित प्राणायाम करना आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा। अगर समस्या बड़ी है तो तुरंत चिकित्सक के पास जाएं...आगे पढ़ें

कन्या


सूर्य देव के आपके एकादश भाव में गोचर करने से आपको आर्थिक लाभ होने की पूरी संभावना है। खासकर वो लोग जो विदेशों से व्यापार करते हैं उन्हें इस समय मुनाफ़ा हो सकता है। आपके विरोधी इस समय में आपके तेज के सामने टिक नहीं पाएंगे। नौकरी पेशा से जुड़े लोगों को भी कार्यक्षेत्र में इस दौरान अच्छे फल मिलेंगे। आपके सीनियर्स आपके काम से खुश रहेंगे ऐसे में आप भी...आगे पढ़ें

तुला


सूर्य की ये स्थिति आपके लिए मंगलकारी है। आपके काम करने की गति इस अवधि में बहुत तीव्र होगी। आप जो भी काम हाथ में लेंगे उसे पूरी रचनात्मकता के साथ करेंगे। कार्यस्थल में आपको उन्नति मिल सकती है। आपके काम से खुश होकर आपके सीनियर्स के द्वारा आपकी तारीफ होने की पूरी संभावना है। सरकारी योजनाओं का इस दौरान आपको लाभ प्राप्त होगा। हालांकि पारिवारिक जीवन में...आगे पढ़ें

सूर्य देव को मजबूत व प्रबल करने के लिए आज ही स्थापित करें सूर्य यंत्र

वृश्चिक


नवम भाव में सूर्य का गोचर आपके लिए अच्छा रहने वाला है। गोचर के दौरान आप धर्म के प्रति जुड़ाव का अनुभव करेंगे। इस दौरान आप किसी लंबी यात्रा पर भी जा सकते हैं और इस यात्रा से आपको लाभ भी हो सकता है। इस अवधि में दान-पुण्य करना आपके लिए लाभदायक रहेगा। इससे आपको मानसिक शांति का अनुभव होगा। सामाजिक जीवन में आप इस दौरान अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे...आगे पढ़ें

धनु


आर्थिक पक्ष इस दौरान कमजोर हो सकता है इसलिए धन से जुड़े मामलों में इस दौरान सावधानी बरतें। अगर धन का निवेश करने का सोच रहे हैं तो ऐसा करने से पहले किसी जानकार से सलाह अवश्य लें। इस दौरान आपकी सेहत भी नासाज़ रहेगी जिसकी वजह मानसिक तनाव हो सकता है। खुद को तरोताज़ा रखने के लिए आप सुबह शाम सैर कर सकते हैं या घर पर योग कर सकते हैं...आगे पढ़ें

मकर


इस गोचर के चलते आपको पारिवारिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपकी भाषा का कठोरपन घर में अशांति ला सकता है इसलिए इस दौरान अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें और उतना ही बोलें जितना ज़रूरी है। यह गोचर आपको शारीरिक परेशानियां भी दे सकता है, अत: अपने स्वास्थ्य के प्रति ढुलमुल रवैया इस दौरान न अपनाएं। इस राशि के छात्रों के लिए...आगे पढ़ें

कुंभ


सूर्य के गोचर के दौरान आप अपने विरोधियों पर पूरी तरह से हावी रहेंगे। अपने तर्कों से आप अपने विरोधियों का मुंह बंद कर देंगे। हालांकि आपको इस दौरान किसी से भी ऐसी बात कहने से बचना चाहिए जिससे बाद में आपको ही बुरा लगे। जिन छात्रों ने हाल ही में प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया है उन्हें इस गोचर के दौरान सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में आपको...आगे पढ़ें

मीन


सूर्य के इस गोचर के चलते कार्यक्षेत्र मे आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सीनियर्स के साथ विवाद की स्थिति बन सकती है इसलिए संभलकर चलें। प्रेम जीवन में प्रियतम के साथ अनबन की स्थिति बन सकती है लेकिन आप यदि शांति बनाए रखेंगे तो स्थिति जल्द ही सुधर जाएगी। हालांकि अगर आपने अपने गुस्से को खुद पर हावी होने दिया तो रिश्ते में खटास आ सकती है...आगे पढ़ें

रत्न, यंत्र समेत समस्त ज्योतिष समाधान के लिए विजिट करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

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आंशिक चंद्र ग्रहण आज, पढ़ें राशिफल

149 साल बाद गुरु पूर्णिमा के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण, सभी राशियों पर होगा इसका असर। पढ़ें 16-17 जुलाई की मध्य रात्रि में होने वाले चंद्र ग्रहण का समय, सूतक और 12 राशियों पर उसका प्रभाव।


ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण घटना होती है और इसको लेकर लोगों के मन में भी एक प्रकार की उत्सुकता देखने को मिलती है। खगोल विज्ञान के मुताबिक, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच धरती आ जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है और यही स्थिति चंद्र ग्रहण कहलाती है। वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि राहु और केतु जब चंद्रमा को निगल जाते हैं तो उस घटना को चंद्र ग्रहण कहते है। हालाँकि इसके पीछे समुद्र मंथन से जुड़ी एक रोचक एवं पौराणिक कथा है। यूँ तो चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण की तरह ही हर साल घटित होते हैं, जिस दौरान उनकी संख्या कभी दो होती है तो कभी तीन। अगर साल 2019 की बात करें तो इस वर्ष कुल 2 चंद्र ग्रहण घटित होने थे, जिसमें पहला पूर्ण चंद्रग्रहण 21 जनवरी को घटित हुआ था, जबकि दूसरा चंद्र ग्रहण 16 व 17 जुलाई की मध्य रात्रि में दिखाई देगा। हालांकि भारत वासियों के लिए इसे ही पहला चंद्र ग्रहण कहा जाएगा क्योंकि 21 जनवरी को घटित हुआ पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में नहीं देखा गया। जिस कारण इसका सूतक भी यहाँ मान्य नहीं था। लेकिन आज रात घटित होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में भी दृश्य होगा, जिसके चलते यहाँ ग्रहण का सूतक भी लगेगा।

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आज देश भर में गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जा रहा है। गौरतलब है कि इस चंद्र ग्रहण के सूतक की वजह से गुरु पूर्णिमा पर होने वाला हर प्रकार का पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान सूतक काल से पहले ही यानी दोपहर 3 बजकर 54 मिनट से पहले करना शुभ है। क्योंकि ये देखा गया है कि ग्रहण का सूतक लगने के बाद मूर्ति पूजा और मूर्ति को स्पर्श करना वर्जित होता है।

चंद्र ग्रहण 16-17 जुलाई 2019
समय
प्रकार
दृश्यता
25:32:35 से 28:29:50 बजे तक (भारतीय समयानुसार, 01:32:35 से 04:29:50 बजे तक)
आंशिक चंद्र ग्रहण   
भारत और अन्य एशियाई देश, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया

चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल की अवधि


यह चंद्रग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, इसलिए यहां पर इसका सूतक और धार्मिक महत्व दोनों ही मान्य होंगे। चंद्र ग्रहण का सूतक 16 जुलाई को दोपहर 03:54 बजे से प्रारंभ होगा जो अगली सुबह 17 जुलाई, बुधवार को 04:29:50 बजे ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म हो जाएगा। चूंकि 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा भी है इसलिए पूजा संबंधी सभी धार्मिक कार्य दोपहर 03:54 बजे से पहले ही कर लें। 

चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव


इस आंशिक चंद्र ग्रहण का प्रभाव लोगों के जीवन पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा। चूँकि ये ग्रहण आषाढ़ मास में घटित हो रहा है जिसके चलते नदी और तालाबों का जल स्तर कम हो जाएगा। साथ ही देश के कई राज्यों में सूखा व अकाल पड़ने की भी आशंका बनेगी। चंद्र पर लग रहे इस ग्रहण के चलते भारत के कश्मीर और चीन से सटे राज्यों में कुछ सियासी उथल-पुथल या प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की हानि होने की आशंका है। 

यह चंद्र ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लगेगा और सबसे ज्यादा इसका असर धनुमकर दोनों राशि के जातकों पर को मिलेगा। जिसके अनुसार इस ग्रहण के दौरान साफ़ तौर से इन राशि व नक्षत्र से संबंधित लोगों को सबसे अधिक कष्ट होने की संभावना होगी। हालांकि ये लोग इस संभावना से बचने के लिए हिन्दू धर्म में सुझाए गए हवन, शांति, दान और मंत्र जप आदि उपाय कर सकते हैं। अतः इस चंद्र ग्रहण से प्रभावित होने वाली राशि के सभी जातकों को विशेष रूप से चंद्र-राहु तथा शनि और गुरु बृहस्पति का जप और इन ग्रहों से संबंधित वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है। 

  • खुदरा बाज़ार पर चंद्र ग्रहण का असर

चंद्र ग्रहण मंगलवार को घटित होने से चांदी, मोती के भाव में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनेगी। वहीं सफ़ेद वस्तुएं जैसे चावल, घी और तेलवान वस्तुओं में मंदी आएगी। इसके अलावा अनाजवान व दलहन वस्तुओं में तेजी आने की सम्भावना है। 

  • ग्रहण का राशिफल 

चूँकि यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में घटित हो रहा है, जो सूर्य का नक्षत्र है इसलिए सूर्य से प्रभावित जातकों को इस ग्रहण के दौरान कष्ट पहुँच सकता है। साथ ही धनु और मकर राशि में ग्रहण पड़ने के कारण इन्हे भी सावधान रहने की ज़रूरत होगी। हालाँकि ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा।

चलिए अब जानते है इस ग्रहण का राशिफल हर राशि के अनुसार :-

मेष: इस ग्रहण के दौरान आपके पारिवारिक सुखों में कमी आएगी और परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। 

वृषभ: जीवन में किसी बात को लेकर चिंता बढ़ सकती है। जिसका सीधा असर आपके पारिवारिक जीवन पर नज़र आएगा। 

मिथुन: इस दौरान आपको विशेष तौर से विरोधियों से सावधान रहने की आवश्यकता होगी। 

कर्क: इस समय आपको वैवाहिक जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 

सिंह: चंद्र ग्रहण से आपको धन हानि होने की संभावना है। इसके आलावा आपको इस दौरान शारीरिक कष्ट होने से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

कन्या: आय की तुलना में ख़र्चा अधिक है और यह आपकी परेशानी का विषय हो सकता है।

तुला: आपके ज्यादातर हर कार्य में निपुणता आएगी और लाभ प्राप्त होगा। इसलिए आपके लिए ये ग्रहण लाभकारी साबित होगा। 

वृश्चिक: आपको अपनी नौकरी व व्यवसाय में प्रगति मिलेगी और दौरान आपको धन लाभ होने से आर्थिक स्थिरता आएगी। 

धनु: आपकी ही राशि में ग्रहण घटित होने पर आपको धन हानि होने की संभावना है। कुछ कारणों से यात्राएं करनी पड़ सकती हैं, लेकिन अगर संभव हो तो इसे अपनी टालना आपके लिए सही रहेगा। 

मकर: आपकी भी राशि में चंद्र को ग्रहण लग रहा है, इसलिए आपको वाहन सावधानी से चलाना होगा, अन्यथा चोट लगने की संभावना है। 

कुंभ: आपको इस समय धन हानि होने की संभावना है। व्यर्थ की चिंता से मानसिक तनाव बढ़ेगा। 

मीन: आपको छोटी दूरी की यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। भाई-बहनों के लिए समय अच्छा रहेगा, उनसे संबंधों में सुधार आएगा। 

सूतक के दौरान बरतनी चाहिए ये सावधानियाँ


विशेषज्ञों अनुसार, माना गया है कि ग्रहण के सूतक के दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इस साल का ये दूसरा चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ योग बना रहा है। इससे पहले यह योग वर्ष 1870 में 12 जुलाई को यानी आज से लगभग 149 साल पहले बना था। जब गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण हुआ था और उस समय भी केतु के साथ चंद्र भी धनु राशि में स्थित था। जबकि सूर्य, राहु के साथ मिथुन राशि में स्थित था और इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही नज़ारा दिखाई देने वाला है। अब जानते हैं सूतक काल के दौरान किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य होता है:- 

  • सूतक और ग्रहण काल के दौरान विशेष रूप से मूर्ति पूजन, मूर्ति स्पर्श और कुछ भी खाना या पीना वर्जित माना गया है। 
  • तुलसी के पौधे का स्पर्श करने से भी परहेज करें।
  • सूतक और ग्रहण काल के समय कुछ मंत्रों का जप करना विशेष लाभकारी माना गया है। 
  • सूतक काल के समय सभी गर्भवती महिलाएं काटने, छीलने या सिलने का कार्य बिल्कुल न करें।
  • हालांकि कई लोग मानते हैं कि सूतक के ये नियम असहाय,गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग, बच्चे और बीमार व्यक्ति पर यह लागू नहीं होते है।

ग्रहण के समय क्या करें या क्या न करें


विशेषज्ञों की माने तो ग्रहण से वातावरण में नकारात्मक शक्तियाँ बहुत प्रबल हो जाती हैं। जिनका सीधा बुरा असर मानव समुदाय पर देखने को मिलता है। इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के हर प्रकार के बुरे प्रभावों से बचने के लिए या इन्हे कम करने के लिए कुछ कार्य सुझाए गए हैं, जिन्हे अवश्य रूप से करना चाहिए और कुछ कार्य करने से परहेज करना चाहिए। 

  • चंद्र पर ग्रहण लगने से पहले दूध-दही और बने हुए भोजन में तुरंत तुलसी के कुछ पत्ते आवश्यक ही डाल दें। माना गया है कि ऐसा करने से इन पदार्थों पर ग्रहण का असर खत्म हो जाता है। 
  • ग्रहण से पहले ही भोजन कर लें और ग्रहण के दौरान उपवास रखें। 
  • ग्रहण के समय पूजन, भगवान की मूर्ति और तुलसी व शमी के पौधे का स्पर्श पर्ने से परहेज करें। 
  • गर्भवती स्त्रियां ग्रहण के दौरान कुछ भी धारदार वास्तु का उपयोग जैसे:- चाकू, कैंची, सुई, आदि न करें। 
  • ग्रहण के समय जितना अधिक से अधिक हो सके चंद्र मंत्र का जप करें और ईश्वर का ध्यान करें।

ग्रहण समाप्ति के बाद तुरंत करें ये काम


  • ग्रहण की समाप्ति पर तुरंत स्नान करे और भगवान की मूर्तियों को भी गंगाजल से शुद्ध करें। 
  • तुलसी व शमी के पौधे को भी गंगाजल से शुद्ध करें।
  • ग्रहण के बाद हवन और गरीबों को दान और दक्षिणा दें। 

ये देखा गया है कि ग्रहण का असर हर राशि पर पड़ता है लेकिन माना गया है कि गर्भवती स्त्री और उसके होने वाले बालक के लिए ग्रहण का प्रभाव 108 दिनों तक रहता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को इसको लेकर बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसा कहते हैं कि जो गर्भवती महिलाएं ग्रहण को नग्न आँखों से देख लेती हैं तो इसके प्रभाव से उनके शिशु को शारीरिक या मानसिक हानि हो सकती है। हालांकि आधुनिक विज्ञान में इस तथ्य का कोई आधार नहीं मिलता है। 

आशा करते हैं आंशिक चंद्र ग्रहण पर आधारित यह लेख आपको पसंद आया होगा। एस्ट्रोसेज की ओर से उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ!

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