केतु का मीन राशि में गोचर (जुलाई, 2014) - जानिए गोचर के प्रभाव

केतु जुलाई 12 2014, को मीन राशि में प्रवेश कर रहा है। क्या आप जानते हैं यह गोचर आपके जीवन में क्या क्या बदलाव लाएगा? आइए इनके बारे में ज़्यादा जानते हैं ‘प. दीपक दूबे जी’ से।



केतु का गोचर परिवर्तन मेष राशि से मीन राशि में July 12, 2014 को हो रहा है। मीन राशि में रहते हुए केतु पुरे १८ महीनों में पूर्वाभाद्रपद का अंतिम चरण, उत्तराभाद्रपद के चारो चरण, तथा रेवती नक्षत्र के चारो चरणो में भ्रमण करता है, चूँकि सभी नक्षत्रों तथा उसके चरणों के स्वामी अलग - अलग होते हैं और उनका केतु सम्बन्ध भी अलग - अलग होता है अतः इसी कारण किसी भी राशि के जातक के लिए पूरे समय तक केतु का परिणाम एक जैसा नहीं रहता, परन्तु फिर भी किसी राशि के जातक के लिए केतु के मीन राशि में प्रवेश का सामान्य प्रभाव और परिणाम क्या होगा यह हम बताने का प्रयास कर रहे हैं, पाठकों से अनुरोध है कि वे इसे अंतिम परिणाम ना माने क्योंकि आपके जन्म के समय केतु की उपस्थिति तथा वर्तमान दशा - अंतरदशा के अनुसार परिणाम में न्यूनता या वृद्धि हो सकती है। केतु का शुभ या अशुभ परिणाम तुरंत होता है, अतः किसी विशेष परिस्थिति में विशेषज्ञों की राय आवश्यक है। 


केतु के इस गोचर का विभिन्न राशियों पर क्या असर होगा आइए जानते हैं-


मेष राशि के जातकों के लिए केतु द्वादश भाव में होंगे, अतः विदेश यात्रा या विदेश से संपर्क की प्रबल सम्भावना रहेगी, यदि किसी कारण विदेश यात्रा नहीं भी तो यात्रायें अवश्य होंगी। अनायास खर्चे होंगे तथा कई बार अनावश्यक कार्यों में जातक उलझेगा, जिसके कारण आर्थिक संतुलन बिगड़ेगा। त्वचा रोग, अग्नि तथा दुर्घटना का भय बना रहेगा। यदि जन्म के समय केतु की स्थिति अच्छी है तो धार्मिक कार्य, धार्मिक यात्रायें तथा धर्म के प्रति रूचि, दान - परोपकार इत्यादि खूब बढ़ेगा।


वृषभ राशि के जातकों के लिए केतु एकादश भाव में होंगे, केतु का यहाँ आना शुभ माना जाता है, इस समय आपको हर कार्य में सफलता मिलेगी, मनोबल बहुत बढ़ा रहेगा। अत्यधिक धनी तथा प्रभावशाली लोगो से संपर्क बनेगा जिसके कारण खुद का प्रभाव अत्यधिक बढ़ेगा। व्यापारियों के लिए यह समय अत्यंत ही अच्छा रहेगा, नौकरी पेशा लोगो की तरक्की के योग बनेंगे तथा अपने उच्च अधिकारीयों के सामने धाक जमेगी। कुल मिलकर धन का आगमन अच्छा होगा, तथा जन समपर्क तेज रहेगा। यदि जन्म के समय कुंडली में केतु की स्थिति अच्छी नहीं है तो बड़े भाई से कष्ट मिल सकता है और अपने सगे भाई - बहनो से गलतफहमियाँ हो सकती है।


मिथुन राशि के जातकों के लिए केतु दशम भाव में होंगे, राजनैतिक तथा धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह अत्यंत ही अच्छी स्थिति है, इस क्षेत्र से जुड़े लोगो को उच्च पद प्राप्त हो सकता है, आर्थिक स्थिति मजबूत होगी क्योंकि धन प्रचुर मात्रा में आएगा। समाज में खूब मान - सम्मान मिलेगा, पिता का सहयोग तथा पैतृक संपत्ति के प्राप्त होने की पूरी सम्भावना रहेगी। मनोबल बहुत अधिक बढ़ा रहेगा, शत्रु परास्त होंगे या यूँ कहें की कोई सामने खड़ा नहीं हो पाएगा। यदि जन्म के समय आपकी कुंडली में केतु की स्थिति अच्छी है और वर्तमान दशा - अन्तर्दशा किसी शुभ गृह की है तो समय बहुत ही अच्छा जायेगा।


कर्क राशि के जातकों के लिए केतु नवम भाव में होंगे, यहाँ केतु मिश्रित परिणाम देंगे। यदि केतु शुभ ग्रहों की दृष्टि या प्रभाव में होंगे तो अत्यंत ही शुभ फल प्राप्त होगा, जहाँ एक ओर चल-अचल संपत्ति में वृद्धि होगी वहीँ पैतृक संपत्ति भी प्राप्त होगी। यदि किसी केस - मुकदमे में फंसे हैं तो उसके आपके पक्ष में फैसला आने की पूरी सम्भावना बनेगी। भाग्य अनुकूल रहेगा तथा सम्मान में वृद्धि होगी, परन्तु यदि ग्रहों का प्रभाव अच्छा नहीं है या जन्म के समय केतु की स्थिति अच्छी नहीं है तो सावधान रहें अन्यथा बहुत बदनामी हो सकती है। किसी प्रतिकूल परिस्थिति वश अपमान सहना पड़ सकता है तथा किसी बड़े षड़यंत्र का शिकार हो सकते हैं। शेयर मार्केट से दूर ही रहें तो अच्छा अन्यथा बहुत हानि हो सकती है, कोई अति विश्वसनीय व्यक्ति आपको धोखा दे सकता है, अतः अपनी आँखे खुली रखें।


सिंह राशि के जातकों के लिए केतु अष्टम भाव में होंगे। सिंह राशि सूर्य से सम्बंधित है और सूर्य केतु के परम शत्रु, उसपर केतु का अष्टम भाव में आना, यह कहीं से भी शुभ सूचक नहीं है। अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता रहेगी, चारों तरफ से उलझे हुए महसूस करेंगे, हर तरफ समस्या ही नजर आएगी, मानसिक उलझनें बहुत बढ़ जाएंगी, अनिर्णय की स्थिति के कारण धन हानि हो सकती है। साथ ही इसी कारण वाहन चलाते समय दुर्घटना का भी योग बनेगा। किसी बहुमूल्य वस्तु जैसे गहने, गाड़ी, या पैसे - रुपये की चोरी की सम्भावना रहेगी। घर में अग्नि भय भी हो सकता है। किसी षड़यंत्र का शिकार हो सकते हैं। यदि जन्म के समय भी कुंडली में केतु की स्थिति अच्छी नहीं है और दशा भी किसी प्रतिकूल ग्रह की चल रही है तो अत्यंत ही नाजुक समय है, सावधानी बरतें।


कन्या राशि के जातकों के लिए केतु सप्तम भाव में होंगे। एक - दो परिस्थितियों को छोड़ दें तो सप्तम भाव में केतु का आना अत्यंत दुःख और विवाद का कारण बनेगा। यदि महिला हैं तो किसी गलत पुरुष और यदि पुरुष हैं तो किसी गलत महिला के संगत में आने से बहुत बदनामी होने और मान-सम्मान को हानि पहुँचने का खतरा बनेगा। गर्भवती महिलाओं के लिए भी गर्भ का खतरा बनेगा। जो लोग अविवाहित हैं और विवाह के उम्र के हैं वो अंतरजातीय विवाह कर सकते हैं। जीवन साथी के साथ वैचारिक मनमुटाव होने का भय रहेगा, अतः व्यवहार में सावधानी बरतें। जन्म के समय केतु यदि कर्क, वृश्चिक या मीन राशि में हों तो गहरे पानी के पास जाने से बचें।


तुला राशि के जातकों के लिए केतु छठें भाव में होंगे। तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं जो राक्षसों के गुरु माने जाते हैं, तुला लग्न के लिए केतु योग कारक है, अतः केतु का छठे भाव में गोचर में आना अत्यंत शुभ है। नए संपर्क बनेंगे और उससे बहुत फायदा होगा, शत्रुओं का समूल नाश होगा, केस - मुकदमों में फैसला आपके पक्ष में होगा। लोग आपकी वाक्पटुता का लोहा मानेंगे अर्थात वाणी अत्यंत ही ओजपूर्ण और प्रभावशाली होगी, यदि लेखन के क्षेत्र में हैं तो दुनिया आपका लोहा मानेगी। यश - कीर्ति - प्रसिद्धि चरम पर पहुंचेगी। धन भी खूब आएगा, यात्राओं से लाभ होगा। देश - समाज के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। परोपकार की भावना बनी रहेगी। कुल मिलाकर कम से कम केतु के कारण अत्यंत ही अच्छा समय जायेगा, यदि जन्म के समय केतु की स्थिति अच्छी है फिर तो पूछना ही क्या। 


वृश्चिक राशि के जातकों के लिए केतु पंचम भाव में होंगे। केतु का गोचर में यहाँ आना मिला जुला फल देगा, जान - संपर्क तेज होगा एवं समाज में प्रभाव बढ़ेगा, धन के लिए भी यह स्थिति ठीक ही है। लोगो का सहयोग मिलेगा। निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी अर्थात निर्णय शीघ्र और सटीक लेंगे। परन्तु केतु का यहाँ आना गर्भवती महिलाओं के लिए ठीक नहीं है, गर्भ गिरने या गर्भ सम्बन्धी रोग होने का भय रहेगा। शिक्षा में रुकावट की सम्भावना बनेगी। यहाँ सब मिलाकर कुछ अच्छा और कुछ बुरा परिणाम देखने को मिलेगा, यदि जन्म के समय कुंडली में केतु की स्थिति अच्छी होगी तो शुभ फलों में वृद्धि होगी अन्यथा परेशानियां थोड़ी बढ़ सकती हैं।


धनु राशि के जातकों के लिए केतु चतुर्थ भाव में होंगे। केतु यहाँ अनावश्यक भय की वृद्धि करेंगे अर्थात अकारण मन में भय बना रहेगा। बुद्धि भ्रमित रहेगी, निर्णय लेने में अत्यंत कठिनाई महसूस होगी। गृहस्थ सुख में कमी महसूस करेंगे। माता को कष्ट हो सकता है। वहीँ चलते समय या यात्रा में सावधानी बरतें क्योंकि दुर्घटना का योग बनेगा। उच्च रक्त चाप के मरीजों के लिए अत्यंत सावधानी बरतने वाला समय होगा, हृदय रोग की सम्भावना बढ़ेगी। सगे - सम्बन्धियों से हानि और तनाव बढ़ सकता है। नौकर धोखा या चोरी कर सकते हैं, अतः सावधानी बरतें। जन्म के समय यदि केतु मेष, सिंह, या धनु राशि में हैं तो अग्नि से भय तथा मानसिक तनाव चरम पर पहुँच सकता है, अतः केतु सम्बन्धी उपाय अवश्य करें।


मकर राशि के जातकों के लिए केतु तृतीय भाव में होंगे। अत्यंत शुभता भरा है केतु का यहाँ आना, पराक्रम और पुरुषार्थ चरम पर होगा। खूब मान-सम्मान मिलेगा। नए और उच्च पद की प्राप्ति होगी। आय में वृद्धि के साथ - साथ आय के और भी नए साधन बनेगे। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी, राजनैतिक क्षेत्र के लोगों को बहुत ख्याति मिलेगी। यदि आप लेखक, कलाकार, संगीतकार या इस तरह के किसी आम जनता के कार्य के क्षेत्र में हैं तो आपको बहुत ख्याति मिलेगी, आपके किये गए कार्य को बहुत सराहा जायेगा। भाई - बहन - सगे - सम्बन्धियों से सम्बन्ध और प्रगाढ़ होगा, कुल मिलाकर अत्यंत ही अच्छा समय है।


कुम्भ राशि के जातकों के लिए केतु द्वितीय भाव में होंगे। यहाँ केतु का गोचर में आना परिवार के सदस्यों से मनमुटाव करायेगा। धन की हानि की प्रबल सम्भावना बनेगी। आय में भी कमी होगी। वाणी बहुत ख़राब हो सकती है जिसके कारण बहुत से दुश्मन पैदा हो जायेगे, अतः अपने वाणी पर बहुत ही नियंत्रण रखें अन्यथा नुकसान होगा। बिना वजह शत्रु पैदा होंगे। मुंह में कोई रोग हो सकता है, अतः किसी छोटी समस्या को भी छोटे में ना लें। अनावश्यक और अचानक धन खर्च होगा। कुल मिलाकर आपकी वाणी, आपके धैर्य एवं साहस की परीक्षा होगी।


मीन राशि वालों के लिए केतु लग्न अर्थात प्रथम भाव में होंगे, मीन राशि केतु की उच्च राशि मानी गयी है (चूँकि केतु का राशि चक्र में अपना कोई स्थान नहीं है अतः इसे गुरु की राशियों का स्थान दिया गया है अतः कुछ विद्वान धनु को तथा कुछ मीन को उच्च मानते हैं, मेरे निजी अनुभव से केतु मीन में उच्च का फल देता है )। अतः जातक के पराक्रम में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, नए कार्यों के अवसर मिलेंगे, समाज में मान सम्मान बढ़ेगा, घर - परिवार में शुभ कार्य होंगे \, किसी धार्मिक कार्य या यात्रा के होने की पूरी सम्भावना है, कुल मिलकर मीन राशि वालों के लिए केतु अत्यंत लाभकारी रहेंगे।

विशेष : 

केतु के परिणाम अचानक होते हैं चाहे वो अच्छे हों या बुरे, अतः जिनके लिए भी ख़राब होने की सम्भावना बन रही है वे केतु की शांति के लिए और जिनके लिए अच्छे की सम्भावना बन रही है वे और अच्छा परिणाम पाने के लिए निम्नलिखित उपाय करें - 

१. ॐ कें केतवे नमः। इस मन्त्र का जप बुधवार को १७००० बार करें और इसका दशांश हवन भी इसी मन्त्र से करें। 

२. केतु भगवन गणेश से शांत होते हैं। अतः "ॐ गं गणपतयै नमः " मंत्र का ५१००० बार जप अत्यंत लाभकारी होगा , इससे केतु के अशुभ प्रभाव नष्ट होंगे और शुभ प्रभाव में वृद्धि होगी। 

३. काली तिल , काला वस्त्र , सप्तधान्य , कम्बल , उड़द , सरसों या तिल का तेल , लोहे या स्टील का बर्तन यथा संभव बुधवार या शनिवार केतु के निमित्त दान करें। 

४. जप स्वयं कर सकें तो अति उत्तम अन्यथा किसी विद्वान ब्राह्मण से पूरे विधि विधान तथा योग देखकर कराएं तो फल की प्राप्ति अच्छी होगी। 

५. यदि यह उपचार केतु के गोचर परिवर्तन से एक सप्ताह पूर्व ही कर लिए जाएँ तो अत्यंत प्रभावशाली होंगे।

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7 comments:

  1. जरा टंकण की भूल हो रही है.मीन के अपने गोचर में केतु पूर्वाभाद्रपद के चारो नहीं अपितु मात्र एक चरण (चतुर्थ) का भोग करेगा.प्रथम तीन चरणों का आधिपत्य कुम्भ को प्राप्त है.

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    1. हाँ अब टंकण की भूल सुधार ली गयी है.

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  2. Ketu ka rashi parivartan ke bare me aap ki aur se diye Gaye sabhi rashi ke jatak ka faladesh Bahoot hi yogya he.kintu lagnesh ka satru or mitra Kya relation he Ketu ka is par bhi faladesh change ho sakta he.
    Kundli me Ketu ka shat Bal aur uski degree aur avashta ko bhi dhayan me lene se faladesh jyada anukul ho sakta he.
    Hum aap ko appreciate karte huve dhanyvad de rahe he.
    Jagdish shrimali.jyotish acharya.Canada.

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  3. Ketu ka rashi parivartan ke bare me aap ki aur se diye Gaye sabhi rashi ke jatak ka faladesh Bahoot hi yogya he.kintu lagnesh ka satru or mitra Kya relation he Ketu ka is par bhi faladesh change ho sakta he.
    Kundli me Ketu ka shat Bal aur uski degree aur avashta ko bhi dhayan me lene se faladesh jyada anukul ho sakta he.
    Hum aap ko appreciate karte huve dhanyvad de rahe he.
    Jagdish shrimali.jyotish acharya.Canada.

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    1. bahut bahut dhanyvaad. aapki sarahna ke liye..mera vyaktigat anubhav hai ki lagnesh se grah ke sambandh se bhi parniamo me antar jarur aata hai..aap se sahmat hun ki ketu ka shat bal aur degree se bhi faladesh par antar padega aur isiliye maine apne article ke prarambh ka jo ek para hai wo inhi baaton ko cover karta hai... yah ek samanya adhar par predcition hota hai jo mai likh chuka hun.. visesh samsya ya paristhiti me vyakti ko vidwanon ka paramarsh le kar hee kisi nirnya par pahuchna chahiye..ek baar punah article padhne aur apna feed back dene ke liye aabhar..
      pt. deepak dubey

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  4. Pandit ji ik sawal hai ke yeh jo rasshifal hai wo date of birth ke hesab se ya name ke hesab se pls clear thankd

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