कजरी तीज – मुहूर्त व विधि-विधान

आज कजरी तीज है। आज के दिन महिलाएँ प्रेममय वैवाहिक जीवन का उत्सव मनाती हैं। साथ ही इस पर्व का गहरा धार्मिक महत्व भी है। आइए, जानते हैं इस तीज से जुड़ी विशेष बातें...

Kajari Teej is the day to celebrate womanhood and the nuptial bond.



कजरी तीज का मुहूर्त


यूँ तो कजरी तीज का कोई विशेष मुहूर्त नहीं होता है, लेकिन पारंपरिक तौर पर धार्मिक रीति-रिवाज़ों को किसी शुभ मुहूर्त में करने का चलन है। इस दिन के पंचांग के अनुसार निम्न समय इसके लिए उत्तम हैं –

  • 07:31:20 - 09:08:57
  • 09:08:57 - 10:01:30
  • 10:53:13 - 11:44:56
  • 14:20:05 - 15:24:43
  • 18:54:43 - 20:17:06
  • 20:17:06 - 21:39:28

(उपर्युक्त मुहूर्त उत्तम चौघड़िया के आधार पर दिए गए हैं। इनमें से अशुभ समय को हटा दिया गया है।)

अभिजीत मुहूर्त: 11:44:56 से 12:36:39 तक

सुर्योदय: 05:53:39
सूर्यास्त: 18:54:08
चन्द्रोदय: 21:03:00

विशेष: ऊपर दिए सभी मुहूर्त नई दिल्ली, भारत के आधार पर बताए गए हैं। यदि आप अपने शहर के लिए सटीक मुहूर्त जानना चाहते हैं तो कृपया यहाँ क्लिक करें –

कजरी तीज की विशेषता


  1. प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्णपक्ष की तृतीया को यह पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है। भारत सहित समूचे दक्षिण एशिया में यह त्यौहार विभिन्न नामों से प्रचलित है, मसलन बड़ी तीज, कजली तीज, सत्व तीज और बूढ़ी तीज आदि।
  2. कजरी तीज का उत्सव
  3. अधिकांश क्षेत्रों में महिलाएँ उपवास रखती हैं, देवी की आराधना करती हैं, झूला झूलती हैं, कजरी गाती हैं, भिन्न-भिन्न पकवान बनाती हैं और शृंगार करती हैं।
  4. कई लोग इस दिन जौ, गेंहूँ, चने आदि को घी, फल-मेवे वग़ैरह में मिलाकर सत्तू बनाते हैं। चन्द्र-दर्शन के बाद इसे खाने की परम्परा है। यही वजह है कि इस पर्व को सतूड़ी तीज या सत्त्व तीज के नाम से भी जाना जाता है।
  5. कुछ जगहों पर इस दिन सिंजारे भी उपहार में दिया जाता है। बहुएँ मिठाई और धन अपनी सास को देती हैं।
  6. इस दिन विशेषतः गौ माता का पूजन भी होता है। गाय को आटे की 7 लोईयों के ऊपर घी और गुड़ रखकर खिलाने के बाद ही भोजन किया जाता है।
  7. उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ क्षेत्रों में इसे कजरी तीज के नाम से जाना जाता है। इस दिन कजरी गीत गाए जाते हैं और उनकी अंताक्षरी भी होती है। नौकाओं पर बैठकर भी कजरी गीत गाए जाते हैं। ये गीत विशेषतः वर्षा ऋतु से जुड़े होते हैं।
  8. प्रायः इस दिन तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं और झूलों का आनन्द लिया जाता है।

एक वर्ष में चार तीज त्यौहार होते हैं। कजरी तीज के बाद वर्ष में सिर्फ़ एक तीज ही शेष रह जाती है – हरतालिका तीज। 2016 में हरतालिका तीज 4 सितम्बर 2016 को मनायी जाएगी।

हमें उम्मीद है कि यहाँ दी गयी जानकारी आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी। कजरी तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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