जानें क्या है ओणम पर्व का धार्मिक महत्व? पढ़ें ओणम के त्यौहार की विशेषताएं। केरल में कल ओणम पर्व मनाया जायेगा। आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं ओणम पर्व का महत्व और परंपरा…!
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ओणम केरल का सबसे प्रमुख त्यौहार है इसलिए यह पर्व बड़ी धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व का अंतिम दिन बहुत ख़ास होता है। यह दिन थिरुवोणम के नाम से जाना जाता है। मलयालम में श्रावण नक्षत्र को थिरुवोणम कहा जाता है। मलयालम कैलेंडर (कोल्लावर्षम) के अनुसार चिंगम माह के आगमन पर ओणम का पर्व मनाया जाता है। चिंगम मलयालम कैलेंडर का पहला महीना होता है।
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थिरुवोणम नक्षत्र की समयावधि
थिरुवोणम नक्षत्र
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दिनांक
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समय
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प्रारंभ
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3 सितंबर 2017
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09:37:33 से
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समापन
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4 सितंबर 2017
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11:18:15 पर
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ओणम का धार्मिक महत्व
ओणम आस्था का पर्व है। इस त्यौहार से धार्मिक मान्यता जुड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि ओणम के दिनों में राजा महाबलि केरल में लोगों से मिलने के लिए आते हैं और उनके स्वागत और दर्शन के लिए लोग ओणम महोत्सव मनाते हैं। ओणम के दिन ही भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था।
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ओणम पर्व पर होने वाली परंपरा
इस दिन थिरुवोणम नक्षत्र में पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर लोग अपने घर की साफ़-सफ़ाई करके उसे फूलों, बंदनवार, लड़ियों आदि से सजाते हैं। घर के मुख्य द्वार पर राजा महाबलि के स्वागत के लिए फूलों की कालीन बिछाई जाती है। कुछ घरों में चावल के लेप से भी प्रवेश द्वार पर सुंदर आकृतियाँ बनाई जाती हैं। ओणम सध्या इस पर्व की मुख्य परंपरा है। इसके बिना यह उत्सव अधूरा है। सध्या में राजा महाबलि के लिए विशाल भोज का आयोजन होता है। इस भोज में क़रीब 26 तरह के स्वादिष्ट व्यंजन होते हैं जो केले के पत्तों पर परोसे जाते हैं। इसके अलावा केरल में इस दिन विभिन्न तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेलों का आयोजन होता है।
एस्ट्रोसेज की ओर से सभी पाठकों को ओणम पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं !
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