श्रावण पुत्रदा एकादशी २०१४ - नया मेहमान लाएगा जीवन में बहार!

अपने पूर्व जन्म के कर्मों के फलस्वरूप कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हे संतान सुख नहीं प्राप्त हो पाता है। पुत्रदा एकादशी एक ऐसा दिन है जिस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखकर संतान सुख को प्राप्त किया जा सकता है। यह दिन पूरी तरह से भगवान विष्णु को समर्पित है। अधिक जानने के लिए आगे पढ़े। 


श्रावण पुत्रदा एकादशी पवित्रा एकादशी और पवित्रोपणा एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह व्रत हिन्दू श्रावण मास शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन मनाया जाता है। 

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यह दिन उन जोड़ो के लिए महत्व रखता है जो पैतृक सुख से वंचित हैं। संतान प्राप्ति की भावना से भगवान विष्णु की पूजा इस पवित्र दिन पर बहुत शुभ मानी गई है। पुत्रदा एकादशी का दिन वैष्णव संतों द्वारा भी अत्यंत श्रद्धापूर्वक भाव से मनाया जाता है जो भगवान विष्णु के अनुयायी हैं। 

यह व्रत पाँच दिन चलने वाली झूलन यात्रा से प्रारंभ होता है जो पांचवे दिन यानी पूर्णिमा के दिन समाप्त होती है। इसमे झूलों को फूलों और अन्य सजाने वाली वस्तुओं से सजाया जाता है और छोटी, रंगीन और मनमोहक भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियों की पूजा की जाती है।

पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा 


पुत्रदा एकादशी की कथा के अनुसार एक बार एक महिजित नाम का राजा था। उसके पास दुनिया की सारी सुख सुविधाएँ थी पर भगवान ने उसे संतान से वंचित रखा था। उसने कई साधुओं और संतों का परामर्श लिया पर उसे कोई उपाय नही मिला। फिर एक सर्वज्ञ ज्ञानी साधु लोमेश ने उसे वजह इसकी वजह से अवगत कराया। उन्होंने राजा को यह बताया कि ये उनके पिछले जन्म के बुरे कर्मों का फल है। साधु लोमेश ने बताया कि राजा पिछले जन्म में एक व्यवसायी थे और उन्होंने प्यासे कोए और बछड़े को नदी के किनारे पानी पीने से रोका था। 

इस पाप से मुक्त होने के लिए लोमेश ने उन्हें परामर्श दिया कि वे पुत्रदा एकादशी का व्रत करें। उस शाही जोड़े ने पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखा और पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा की। परिणाम स्वरुप, उन्हे एक संतान की प्राप्ति हुई। 

अब पुत्रदा एकादशी की रस्मों का अनुष्ठान करने के लिए यहाँ देखें। 

पुत्रदा एकादशी की रस्में 


  • प्रातः जल्दी उठ कर स्नान के उपरांत साफ और स्वछ कपड़ों को धारण करें 
  • पूजा का स्थान और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर साफ़ करें 
  • भगवान विष्णु की पुष्प, अगरबत्ती तथा दिये से पूजा करें और उन्हें फ़ल और मिष्ठान अर्पित करें 
  • पूरी श्रद्धा से पूरे दिन का व्रत रखें 
  • शाम को भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने कथा पढ़ें / सुनें 
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और उपहार स्वरूप वस्त्र, दक्षिणा इत्यादि दान करें 
  • भगवान विष्णु की मूर्ति वाले कमरे में ही सोयें 
  • यदि इस दिन संतान गोपाल मन्त्र का जप भी करें तो अत्यंत लाभकारी होगा

जैसा की इसका नाम है, पुत्रदा एकादशी व्रत यह “संतान प्रदान करने वाला व्रत है” ऐसा कथाओं में कहा गया है। अगर आप संतान की लालसा रखते हैं तो निराश ना हों, बस इस व्रत को श्रद्धा और संयम पूर्वक करें और पैतृक सुख का आनंद उठायें।

आज का पर्व


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